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छत्तीसगढ़ः राजनांदगांव फास्ट ट्रैक कोर्ट ने रेप-मर्डर केस में सुनाई फांसी की सजा

पिछले साल अगस्त में हुई घटना के बाद बच्ची और उसके परिवार के पक्ष में शहर में कई रैलियां निकाली गईं और रेप के आरोपी को त्वरित फांसी देने की मांग की गई थी.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत आरोपी को दी फांसी की सजा
  • पिछले साल आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी
  • गांव के 25 वर्षीय आरोपी शेखर को मामले में किया गया था गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए POCSO एक्ट के तहत आरोपी को फांसी की सजा सुना दी. पिछले साल दोषी ने तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या कर दी थी जिसके बाद वहां पर काफी हंगामा हुआ और लोगों ने आरोपी को मौत की सजा देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था. 

राजनांदगांव जिला न्यायालय के फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश शैलेष शर्मा ने POCSO एक्ट के तहत आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है. बीते साल आरोपी ने तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या कर दी थी. 

जिले की चिखली पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कांकेतरा में पिछले साल 22 अगस्त को साढे़ तीन वर्षीय मासूम बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर उसे अपने घर बुलाने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया. इस दौरान बच्ची की चीख-पुकार बंद करने के लिए आरोपी ने तकिए से उसका मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी थी.

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जिले में फांसी की पहली सजा 

इस मामले में पुलिस ने गांव के ही 25 वर्षीय आरोपी शेखर कोर्राम को गिरफ्तार किया था. इसके बाद मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलता रहा. बच्ची और उसके परिवार के पक्ष में शहर में रैलियां भी निकली और आरोपी को त्वरित फांसी देने की मांग की गई.

कोरोना काल की वजह से कोर्ट बंद रहने के चलते मामले की सुनवाई में कुछ बाधाएं भी आईं. इसके बावजूद फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष जज अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश शैलेष शर्मा ने त्वरित न्याय करते हुए लगभग 1 साल में ही आरोपी को फांसी की सजा सुना दी. इस मामले में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता परवेज अख्तर ने कहा कि बच्चे के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने वाले आरोपी को आज फांसी की सजा दी गई है. हाईकोर्ट से पुष्टि होने के बाद फांसी की तारीख तय होगी.
 
फास्ट ट्रैक कोर्ट में मासूम बच्ची की दुष्कर्म और हत्या के मामले में पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय देने के लिए डीएनए टेस्ट के जरिए मामले की पुष्टि की गई. इसके बाद अन्य सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को फांसी की सजा धारा 302 के तहत सुनाई गई है. फास्ट ट्रैक कोर्ट में त्वरित न्याय देते हुए जिले में इस तरह के आरोप की पुष्टि के बाद फांसी की सजा का यह पहला मामला है.

(इनपुट- परमानंद रजक)

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