छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी की छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस को दो झटके लगे हैं. पिछले 24 घंटे में उसके दो बड़े नेता वापस कांग्रेस में जा मिले हैं. गुरुवार को यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी और फिर शुक्रवार को डोमेन्द्र भेडिया कांग्रेस में शामिल हो गए है. डौंडीलोहारा विधानसभा सीट से डोमेन्द्र भेडिया तीन बार विधायक रहे हैं. तीनों बार वो कांग्रेस के टिकट से ही चुनाव जीते हैं.
पिछले साल डोमेन्द्र भेडिया ने जोगी कांग्रेस का दामन थाम लिया था. आदिवासियों के बीच उनकी अच्छी खासी पकड़ है. उनकी घर वापसी से कांग्रेस की बांहें खिल गई हैं. इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस को खूब जोड़-तोड़ करना पड़ रहा था. माना जा रहा है कि डोमेन्द्र भेडिया की वापसी से इलाके में कांग्रेस मजबूत होगी. दूसरी ओर जोगी जनता कांग्रेस के यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी ने भी पार्टी छोड़ दी. उनको भी कांग्रेस ने हाथों-हाथ लिया.
कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने गले लगाकर उनका स्वागत किया. विनोद तिवारी लंबे तक अजित जोगी के साथ जुड़े रहे. जब जोगी ने कांग्रेस से अपना नाता तोड़ा, तब विनोद तिवारी उनके साथ खड़े रहे. जनता कांग्रेस के गठन के बाद प्रदेशभर में उन्होंने अपने संगठन का विस्तार किया. शहरों और गांव-कस्बों में उन्होंने बड़ी तादाद में नौजवानों को जनता कांग्रेस से जोड़ा था. इसलिए उनके कांग्रेस में शामिल हो जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है.
उधर, बलौदाबाजार जिले से लगभग डेढ़ हजार बीजेपी कार्यकर्ताओ ने जनता कांग्रेस का दामन थाम लिया. कसडोल विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने के चलते परमेश्वर यदु बीजेपी छोड़कर जोगी का साथ देना मुनासिब समझा. इस विधानसभा सीट पर मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल के खिलाफ वो ताल ठोंक रहे थे.
यदु के जनता कांग्रेस में शामिल होने से बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है. बताया जा रहा है कि इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने सतनामी समाज के धर्मगुरु बालक दास को मैदान में उतारने की तैयारी की है. उसे उम्मीद है कि बालक दास के इस सीट पर चुनाव लड़ने से कांग्रेस को तीन विधानसभा सीटों पर बढ़त मिलेगी, जबकि इससे बीजेपी के पूर्व निर्धारित समीकरण बिगड़ने के आसार जताए जा रहे हैं.
वहीं, पार्टी प्रवेश को लेकर अभी बीजेपी का खाता नहीं खुला है. कांग्रेस, बीएसपी या फिर कोई और दूसरी पार्टी से किसी नेता ने उनके दफ्तर में दस्तक नहीं दी है. बीजेपी नेतृत्व को इंतजार है कि उनके विरोधी दलों के नेता उनकी पार्टी में शामिल हों, ताकि चुनाव के दौरान अच्छा माहौल बन सके.