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रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी ने दिया इस्तीफा, बीजेपी के टिकट पर लड़ेंगे चुनाव!

छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है. चुनाव से पहले रायपुर के कलेक्टर ओ.पी. चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और बीजेपी का दामन थाम लिया है.

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आईएएस ओ पी चौधरी
आईएएस ओ पी चौधरी

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने के लिए अब आईएएस अधिकारी भी मैदान में कूद पड़े हैं. रायगढ़ जिले की खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए रायपुर के कलेक्टर ओ पी चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. ओ पी चौधरी 2005 बैच के आईएसएस अधिकारी हैं. 

बताया जाता है कि केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है. लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. हालांकि छत्तीसगढ़ मंत्रालय में इस बात की चर्चा है कि मुख्य सचिव कार्यालय ने इस्तीफे पर अपनी मुहर लगाकर उसे केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को भेजा है.

चर्चा है कि चौधरी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के उमेश पटेल से होगा. बता दें कि उमेश पटेल राज्य के पूर्व गृहमंत्री नंदकुमार पटेल के बेटे हैं. बता दें कि छत्तीसगढ़ में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है.

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बताया जा रहा है कि ओ पी चौधरी इसी हफ्ते दिल्ली या रायपुर में बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामेंगे. उधर रायपुर कलेक्टर के बीजेपी प्रेम के सामने आने के बाद कांग्रेस ने उन्हें तत्काल कलेक्टर पद से हटाने की मांग की है. कांग्रेस की दलील है कि बीजेपी नेताओं का जादू खत्म हो चुका है. जनता का भरोसा उनपर से उठ चुका है, इसलिए वो सरकारी अधिकारियों को चुनावी मैदान में उतार रहे हैं.  

उधर आईएएस अघिकारियों के बीजेपी प्रेम से पार्टी गदगद है. बीजेपी की दलील है कि पढ़े-लिखे अफसर जब बीजेपी का दामन थाम रहे हैं तो कांग्रेस को समझ लेना चाहिए कि उसके अरमानों पर एक बार फिर पानी फिर चुका है. बीजेपी का दावा है कि राज्य में चुनावी लहर उसी के पक्ष में है. इसके चलते सरकारी अफसर कांग्रेस के बजाए उनकी पार्टी में प्रवेश करना मुनासिब समझ रहे हैं.

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक ओ पी चौधरी ने 16 अगस्त को अपना इस्तीफा मुख्य सचिव अजय सिंह को सौंपा था. जिसके बाद मुख्य सचिव ने राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह से इस बारे में चर्चा कर 17 अगस्त को उनका इस्तीफा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को भेज दिया. इस पूरे मामले को बेहद गोपनीय रखा गया था. हालांकि जिस तरह से खरसिया विधानसभा सीट पर ओ पी चौधरी दिलचस्पी ले रहे थे उससे अटकलें लगाई जा रही थी कि वो कभी भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. सालभर पहले से ही उन्होंने इस विधानसभा सीट पर बेरोजगारों,  ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होने का गुरु मंत्र देना शुरू किया था.

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कई जगह उन्होंने फ्री कोचिंग भी चलाई थी. इस तरह से उन्होंने नौजवानों को जोड़ने का काम शुरू किया. किसी को अंदाजा नहीं था कि वो इसके पीछे चुनावी तैयारियों में जुटे हैं. यह भी बताया जा रहा है कि महीनेभर पहले दिल्ली में उनकी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कराई गई थी. इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ने उनकी जीत का भरोसा पार्टी अध्यक्ष को दिलाया था. हालांकि न तो अभी ओ पी चौधरी ने अपने इस्तीफे को लेकर अपना रुख साफ किया है और न ही सरकार ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की है. बताया जाता है कि डीओपीटी के किसी अफसर ने ओपी चौधरी के इस्तीफे की खबर लीक की है. इसके बाद से अटकलों का दौर शुरू हो गया.

छत्तीसगढ़ मंत्रालय ने रायपुर कलेक्टर के लिए कुछ नए आईएएस अफसरों का नाम उछलने से ओ पी चौधरी के इस्तीफे की अटकलें सच साबित होती नजर आ रही हैं. यह भी बताया जा रहा है कि एक दो दिनों में रायपुर के नए कलेक्टर के नाम की घोषणा हो जाएगी.  

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