scorecardresearch
 

बीजापुर एनकाउंटर: नक्सलियों ने बयान जारी कर ली हमले की जिम्मेदारी, लापता जवान के कब्जे में होने की पुष्टि

जारी प्रेस नोट में चार नक्सलियों के मारे जाने की भी पुष्टि की गई है. साथ ही शहीद जवानों के परिवारों के प्रति नक्सलियों ने खेद प्रकट किया है.नक्सलियों ने इस हमले में 14 हथियार और दो हज़ार से अधिक कारतूस भी लूटे हैं. नक्सलियों की दण्डकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प की तरफ से यह प्रेस नोट जारी किया गया है. नक्सलियों ने लूटे हुए हथियारों की तस्वीर भी जारी की है.

बीजापुर एनकाउंटर को लेकर नक्सलियों ने बयान जारी किया है. बीजापुर एनकाउंटर को लेकर नक्सलियों ने बयान जारी किया है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नक्सलियों ने स्वीकार की लापता जवान को बंधक बनाने की बात
  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने जारी किया प्रेस नोट
  • जम्मू के रहने वाले हैं राकेश्वर सिंह मनहास

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में बीते शनिवार हुए नक्सली हमले को लेकर नक्सलियों ने बयान जारी किया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की तरफ से प्रेस नोट जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली गई है. बयान में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि लापता सीआरपीएफ जवान उनके कब्जे में हैं. बयान में कहा गया है कि सरकार मध्यस्थों का ऐलान करें तो वो जवान को उन्हें सौंप देंगे.

प्रेस नोट में चार नक्सलियों के मारे जाने की भी पुष्टि की गई है. साथ ही शहीद जवानों के परिवारों के प्रति नक्सलियों ने खेद प्रकट किया है.नक्सलियों ने इस हमले में 14 हथियार और दो हज़ार से अधिक कारतूस भी लूटे हैं. नक्सलियों की दण्डकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प की तरफ से यह प्रेस नोट जारी किया गया है. नक्सलियों ने लूटे हुए हथियारों की तस्वीर भी जारी की है.

शीर्ष सुरक्षाबलों के सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों की तरफ से जारी किया गया बयान सही पाया गया है. नक्सलियों की तरफ से मध्यस्थ नियुक्त करने के प्रस्ताव पर चर्चा की जा रही है. जिसपर जल्द ही अंतिम फैसला लिया जाएगा. नक्सलियों के कब्जे में कैद 35 वर्षीय जवान राकेश्वर सिंह मनहास जम्मू के रहने वाले हैं. उनकी पत्नी मीनू मनहास ने सरकार से उन्हें छुड़ाने की अपील की है. जहां एक तरफ सुरक्षाबल नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के मूड में हैं, वहीं नक्सिलयों का लापता जवान का सुरक्षित होने और उसे वापस सौंपने की बात कहना स्थिति को जटिल बना रहा है.

इस मामले में साल 2006 के आईएएस अधिकारी एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों बंधक बनाने का उदाहरण दिया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में साल 2012 में नक्सलियों ने  उनका अपहरण किया था और 12 दिन बाद उन्हें छोड़ दिया था. एक बार फिर नक्सलियों ने कुछ ऐसा ही दोहराया है. इस बार भी सरकार को इस मसले पर फैसला लेना है. 

बता दें कि बीते शनिवार को नक्सलियों से एनकाउंटर में सुरक्षाबल के 22 जवान शहीद हो गए थे. वहीं एक जवान राकेश्वर सिंह इस एनकाउंटर के बाद से लापता थे. कयास लगाए जा रहे थे कि वह नक्सलियों के कब्जे में हैं. अब यह शक सच होता नजर आया है. इससे पहले बीते सोमवार को स्थानीय पत्रकार ने दावा किया था कि उसके पास किसी शख्स का फोन आया था जिसने खुद को हिडमा बताया था और जवान के नक्सली कब्जे में होने की बात कही थी.

गौरतलब है कि इस हमले को लेकर दावा किया जा रहा था कि सुरक्षाबलों से चूक के चलते यह घटना हुई. हालांकि सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने नक्सली ऑपरेशन में किसी भी तरह की चूक से इनकार किया है.

उन्होंने कहा, "जब हम नक्सलियों के गढ़ में जाएंगे, तो वहां एंबुश (घेराबंदी) होगी ही, उससे हमें निपटना होगा. उससे निपटने के दौरान ही ये बड़ी घटना हुई है. ये उनका बहुत बड़ा एंबुश था, जिसका हमारे जवानों ने जवाब दिया है. बहादुरी के साथ हमारे जवानों ने नक्सलियों के साथ जहां लड़ाई की. वहीं जो लोग घायल थे उनको भी बचाया."

 
 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें