
बिहार के मिथिलांचल में मकर संक्रांति पर्व पर दही और चूड़ा खाने की एक अलग ही परंपरा है. समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी में इस बार रिकॉर्ड तोड़ 300 टन से भी अधिक दही की खपत होने की संभावना है. इसको देखते हुए मिथिला दुग्ध संघ, समस्तीपुर और सुधा डेयरी ने ग्राहकों के लिए दूध-दही की कमी नहीं होने देने का लक्ष्य रखा है. 280 टन दही और 22 लाख लीटर दूध का उत्पादन कर एक रिकॉर्ड बनाया है.
मकर संक्रांति के मौके पर समस्तीपुर दरभंगा और मधुबनी जिले के लोगों ने पिछली बार रिकॉर्ड तोड़ दही खाया था. इसी के मद्देनजर डेयरी ने इस बार दही और दूध का उत्पादन बढ़ा दिया है. इसके अलावा अगर डिमांड और बढ़ती है तो उत्पादन बढ़ाने के लिए भी उपाय तैयार रखा गया है. उम्मीद की जा रही है कि इस बार 14 जनवरी से 15 जनवरी तक दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी के लोग दही और दूध खाने का पिछला रिकॉर्ड भी तोड़ने वाले हैं.

दही-चूड़ा लोगों के रिश्ते को मजबूती देने का एक बड़ा माध्यम होता है. आधुनिक युग में भी हमारी पुरानी परंपरा जीवित है जो मकर संक्रांति के दिन देखने को मिलती है. यही कारण है कि इस दिन दूध और दही की मांग बढ़ जाती है. स्थानीय लोगों का मानना है कि मकर संक्रांति पर हर बार दूध और दही की कमी हो जाती है. इसका कारण है कि इस पर्व में दही बनाने के लिए दूध की मांग हर वर्ष बढ़ती जा रही है.

स्थानीय निवासी मनोज कुमार गुप्ता कहते है कि मकर संक्रांति इस बार दो दिन (14-15 जनवरी) पड़ रही है. हमारे यहां दही-चूड़े का काफी महत्व होता है. आज के दिन एक-दूसरे के यहां जाकर दही-चूड़ा ग्रहण करते हैं. मकर संक्रांति का दिन काफी शुभ होता है. दही-चूड़ा मिथिला का एक महत्त्वपूर्ण व्यंजन है. दूध की इसी वजह से आज के दिन में थोड़ी किल्लत हो जाती है. छोटा हो या बड़ा, हर कोई मकर संक्रांति पर दही खाते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
संघ के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे इलाके में मकर संक्रांति का बहुत बड़ा पर्व होता है. इसमें दही-चूड़ा और दूध का इस्तेमाल ज्यादा होता है. इस बार 22 लाख लीटर दूध खपत होने की संभावना है. पिछली बार ये 17 लाख लीटर था. इतना ही नहीं, पिछली बार 202 टन दही की खपत हुई थी. इस बार 280 टन बेचने का लक्ष्य रखा है.

श्रीवास्तव ने बताया कि इस पैमाने पर उत्पादन बिक्री संघ के निदेशक मंडल के सदस्यों, कर्मचारियों और दुग्ध उत्पादक पशुपालकों की बदौलत संभव हो सका है. इस बार सुधा डेयरी ने अपने पिछले साल के सारे रिकॉर्ड को तोड़ उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप अपने उत्पादन को पूरा करने में सफलता हासिल की है. संघ अपने उत्पादन में गुणवत्ता बनाए रखने में हमेशा तत्पर है.