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बिहारः क्या सच में टूट गया है आरजेडी-कांग्रेस का गठबंधन?

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी मानते हैं कि कांग्रेस से उनका पुराना रिश्ता है लेकिन गठबंधन में जो मजबूत होता है उसकी मदद सहयोगी दल के लोगों को करनी चाहिए.

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तेजस्वी यादव और राहुल गांधी (फाइल फोटो) तेजस्वी यादव और राहुल गांधी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तेज प्रताप यादव ने की कांग्रेस से गठबंधन की वकालत
  • तेजस्वी ने भी माना कांग्रेस से आरजेडी का पुराना रिश्ता

बिहार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का कई साल पुराना नाता टूट गया है. कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्तचरण दास ने ये ऐलान भी कर दिया है कि अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बिहार की सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसके बावजूद बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी का मत अलग है. वे ऐसा नहीं मानते.

सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि ये जनता की आंख में धूल झोंकने वाली बात है. बिहार में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में आरजेडी को जिताने के लिये कांग्रेस अलग चुनाव लड़ रही है. वहीं, तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेजप्रताप यादव ने नसीहत देते हुए कहा है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनना है तो कांग्रेस को साथ लेकर चलना पड़ेगा. आरजेडी को कांग्रेस से अलग नहीं होना चाहिए. दोनों दल अंदर से एक ही हैं.

तेजप्रताप ने हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए कन्हैया कुमार को निशाना भी बनाया. इससे ये माना जा रहा है कि दोनों भाइयों में दूरी कुछ घट रही है. हालांकि तेजस्वी यादव भी मानते हैं कि कांग्रेस से उनका पुराना रिश्ता है लेकिन गठबंधन में जो मजबूत होता है उसकी मदद सहयोगी दल के लोगों को करनी चाहिए. आरजेडी मजबूत है. कांग्रेस को सहयोग करना चाहिए क्योंकि हमें एनडीए को हराना है.

तेजस्वी यादव ने ये भी कहा कि बंगाल में कांग्रेस चुनाव लड़ी और हारी लेकिन सोनिया गांधी जब मीटिंग बुलाती हैं तो ममता बनर्जी भी शामिल होती हैं. बहरहाल, पिछले दो दशक से बिहार में कांग्रेस और आरजेडी का रिश्ता पुराना है. दोनों दल कई बार अलग हुए और हर बार एकजुट भी हुए. साल 2000 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा लेकिन सरकार एक साथ मिलकर बनाया. ऐसे कई और उदाहरण है.

 

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