बिहार की सियासी मिट्टी ऐसी है, जहां राजनीति के पुतले हर मौसम में गढ़े जाते हैं. कोई ऐसा दिन नहीं होता कि किसी मुद्दे को लेकर सहयोगी पार्टियों में रार की स्थिति नहीं बनती हो. ताजा मामला है बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर, जहां जदयू और बीजेपी के नेताओं के बीच जुबानी जंग हो गई.
हुआ यूं कि बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर जयंती समारोह में जदयू के बड़े-बड़े नेता मौजूद थे. चर्चा जब बाबा साहेब की शुरू हुई, तो इसी चर्चा में विकास कार्यों की चर्चा होते हुए वो विशेष राज्य के दर्जे तक पहुंच गई. फिर क्या था जदयू नेता जयंती भूल गए और विशेष राज्य के दर्जे की बात हवा में उछलने लगी.
जदयू नेता इशारों-इशारों में ही केंद्र सरकार पर हमलावर हो गए, उन्होंने विशेष राज्य के दर्जे की मांग उठाते हुए कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि बिहार विकास के मामले में देश के अव्वल राज्यों में खड़ा हो सके. जदयू नेता ललन सिंह ने कहा कि बिहार में कभी आलू और लालू की चर्चा होती थी. लेकिन आज आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि बिहार विकास के पथ पर दौड़ रहा है. ललन सिंह यही नहीं रुके उन्होंने इशारों में केंद्र की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की कुछ राज़्य वित्तीय कुप्रबंधन कर रहे है, उन्हें ज़्यादा मदद मिल रही है, जबकि बिहार वित्तीय प्रबंधन कुशलता से कर रहा है, तब उसे जितनी मदद मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिल पा रही है. जब तक बिहार का विकास नहीं होगा, तब तक देश का विकास नहीं हो सकता है.
ललन सिंह के बाद संबोधन करने उठे जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने न्याय पालिका में कंपीटिशन के माध्यम से जजों की नियुक्ति का मामला उठाया और कहा कि जजों की नियुक्ति बिल्कुल प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर होनी चाहिए. उपेंद्र कुशवाहा के उठाए प्रश्न बीजेपी के लिए असहज सियासी हालात पैदा करने के लिए काफी थे.
उधर, बीजेपी कहां पीछे रहने वाली थी. बीजेपी ने इशारों-इशारों में जदयू को आइना दिखाने की कोशिश की. प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल ने कहा कि जिसका प्रावधान ही खत्म हो गया है, उसकी मांग उठाना बेकार है. केंद्र सरकार बिहार को विशेष मदद कर रही है. विशेष पैकेज दे रही है. बिहार का विकास हो रहा है. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि बिहार में विकास हो रहा है और आगे भी बिहार को मदद मिलती रहेगी.
राजनीतिक पंडितों की मानें, तो फिलहाल बीजेपी और जदयू बिहार में सहयोगी दलों के रूप में सरकार चला रहे हैं, लेकिन जदयू के कुछ नेता लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं. अब एक बार फिर उठा विशेष राज्य का मुद्दा बिहार में दोनों दलों के बीच तल्खी ला सकता है और सियासी बयानबाजी का दौर फिर से शुरू हो सकता है.