आगामी लोकसभा चुनाव और अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का असर इस बार बिहार महोत्सव में भी देखने को मिलेगा. राज्य सरकार की ओर से इस बार महोत्सव का मुख्य फोकस सांस्कृतिक व सामाजिक मुद्दों के साथ ही मतदाता जागरुकता पर रखा गया है ताकि स्कूली बच्चे इनके उत्प्रेरक के रूप में ‘चेन एजेंट’ के तौर पर सामने आ सकें.
मंगलवार को शिक्षा विभाग के प्रधानसचिव अमरजित सिन्हा ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस साल 22 मार्च को बिहार दिवस के अवसर पर राजधानी पटना सहित राज्य के अन्य जिलों, प्रखंड और स्कूल स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का मुख्य फोकस सांस्कृतिक, सामाजिक मुद्दे और मतदाता जागरुकता पर होगा.
आचार संहिता के कारण बदलाव
सिन्हा ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लागू होने के मद्देनजर इस बार बिहार दिवस के स्वरूप में थोड़ा बदलाव किया गया है. प्रदेश में कुल 73 हजार सरकारी स्कूल हैं, जिनमें बिहार दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. कार्यक्रमों में कम उम्र में लड़कियों की शादी, दहेज प्रथा, भ्रूणहत्या, धूम्रपान, नशाबंदी और अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर फोकस किया जाएगा.
बिहार दिवस पर पटना में 23 मार्च से शुरू होने वाले कार्यक्रम का उदघाटन राज्य के मुख्यसचिव एके सिन्हा करेंगे और 24 मार्च को इसके समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल डीवाई पाटिल होंगे. आयोजन की जिम्मेदारी प्राथमिक शिक्षा के निदेशक एन श्रवणन को सौंपी गई है.
...ताकि अधिक से अधिक मतदातओं की हो भागीदारी
चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी अधिक से अधिक संख्या में हो इसके लिए बिहार दिवस के दौरान एसवीईईपी कार्यक्रम के तहत विद्यालय स्तर पर बच्चों को यह शपथ दिलाई जाएगी कि वे अपने माता-पिता को उनके मतदान के अधिकार के प्रति प्रेरित करेंगे. इसके साथ ही अभिभावकों को भी मतदान करने की शपथ दिलाई जाएगी.
अमरजित सिन्हा ने बताया कि बिहार में 40 हजार स्कूल मतदान केंद्र सहित अन्य चुनाव कार्य के लिए उपयोग में लाए जाते हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी से अनुरोध किया गया है कि चुनाव कार्य के लिए स्कूलों का प्रयोग लंबी अवधि तक ना किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई ज्यादा दिनों तक बाधित न हो.