लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की घर वापसी कराने के लिए केंद्र ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं ताकि कोई भी अपनी जिंदगी पैदल चलकर खतरे में ना डाले. प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने में जुटी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए चलाई गईं हैं. क्योंकि घर वापसी करने वाले ज्यादातर श्रमिक यूपी और बिहार के ही हैं. जिसकी वजह से 73 फीसदी ट्रेनों का संचालन इन्हीं दोनों राज्यों में हो रहा है.
इस बीच बेगूसराय जिले के बरौनी स्टेशन से आई तस्वीरों ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. बरौनी स्टेशन पर ट्रेन से उतरे सैकड़ों श्रमिकों ने नाश्ते के पैकेट और पानी को लूट लिया जिसकी वजह से सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं. बताया जा रहा है कि कैमूर से बरौनी पहुंची ट्रेन से 400 यात्रियों की आने की सूचना थी लेकिन वहां लगभग 1000 मजदूर पहुंच गए जिससे वहां समस्या खड़ी हो गई.
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दरअसल, मंगलवार की शाम कैमूर से चलकर कटिहार तक जाने वाली दैनिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन जैसे ही प्लेटफॉर्म पर पहुंची हजार से भी अधिक श्रमिक प्लेटफॉर्म पर जमा हो गए. यात्रियों की स्क्रीनिंग के लिए मात्र चार काउंटर लगाए गए थे जिससे स्क्रीनिंग में देरी होते देख मजदूरों ने हंगामा शुरू कर दिया, इसे देखकर पुलिस और पदाधिकारी एक तरफ जाकर खड़े हो गए.
हंगामे को देख स्वास्थ्यकर्मियों ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया और काउंटर छोड़कर अलग हो गए. फिर क्या था यात्रियों ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद नाश्ते और पानी की लूटपाट शुरू कर दी. इस दौरान उन लोगों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी उड़ाई गईं. आरोप है कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती रहीं और तेघड़ा एसडीएम डॉ निशांत सहित सभी पदाधिकारी मूकदर्शक बने रहे.
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बाद में बिना जांच के ही सभी यात्रियों को सड़क मार्ग से अपने-अपने जिले में भेज दिया गया. हाल ही में विभिन्न राज्यों से ट्रेन और विभिन्न मार्गों से श्रमिक बेगूसराय पहुंच रहे हैं जिन्हें प्रथम स्तरीय क्वारनटीन सेंटर में रखा जा रहा है. उनकी जांच भी कराई जा रही है जिससे बेगूसराय में कोरोना मरीजों की संख्या 14 से 40 पहुंच गयी है. हालांकि प्रशासनिक पदाधिकारी पैकेट लूटने और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने के मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे.