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Omicron Peak in India: भारत में कब आएगा कोरोना का पीक? कितनी होंगी मौतें, क्या बिगड़ेंगे हालात? US के हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया

Omicron Peak in India: देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से तीसरी लहर आ चुकी है. हर दिन संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. US के एक हेल्थ एक्सपर्ट ने संभावना जताई है कि भारत में अगले महीने तक कोरोना के मामले पीक पर पहुंच जाएंगे.

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फरवरी में आ सकता है ओमिक्रॉन का पीक फरवरी में आ सकता है ओमिक्रॉन का पीक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तेजी से बढ़ रहे हैं ओमिक्रॉन के मामले
  • अगले महीने आ सकता है पीक
  • डेल्टा से कम खतरनाक ओमिक्रॉन

भारत में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच अब इसके पीक (Omicron wave peak) को लेकर कई तरह की आशंका जताई जा रही है. US के एक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में अगले महीने तक कोरोना के मामले पीक पर पहुंच जाएंगे. एक्सपर्ट ने हर दिन COVID-19 मामलों की संख्या पांच लाख (India covid cases) तक आने की उम्मीद जताई है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार डेल्टा की तुलना में नए वैरिएंट की गंभीरता कम रहेगी.

कब आएगा ओमिक्रॉन का पीक- इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के डायरेक्टर डॉक्टर क्रिस्टोफर मुरे ने कहा, 'आप ओमिक्रॉन की लहर में प्रवेश कर रहे हैं, जैसा कि दुनिया भर के देश इससे गुजर रहे हैं. हमें लगता है कि पीक पर आने के बाद हर दिन इसके मामले बहुत बढ़ेंगे. ये पिछले साल अप्रैल में डेल्टा के आए मामलों की तुलना में बहुत ज्यादा होंगे लेकिन ओमिक्रॉन कम गंभीर है. इसलिए, जब मामले बढ़ेंगे तो जाहिर तौर पर इसके नए रिकॉर्ड बनेंगे. वर्तमान में हमारे पास कई मॉडल हैं जिन्हें हम बाद में जारी करेंगे, हालांकि हम उम्मीद करते हैं कि पीक पर पहुंचने के बाद लगभग पांच लाख मामले हर दिन आएंगे. ओमिक्रॉन का पीक अगले महीने आने की संभावना है.'

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स- भारत के कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश में अधिकांश लोगों में हाइब्रिड इम्यूनिटी (Hybrid immunity) है जिसकी वजह से ओमिक्रॉन कम गंभीर साबित हो रहा है. डॉक्टर मुरे का कहना है, 'दक्षिण अफ्रीका में डेल्टा के साथ-साथ बीटा इफेंक्शन से भी ज्यादा लोग संक्रमित थे. वैक्सीनेशन की वजह से वहां भी बहुत गंभीर मामले नहीं आए. अस्पताल में भर्ती होने वालों और मौत की संख्या भी कम रही, यही वजह है कि हमें लगता है कि भारत में ओमिक्रॉन के मामले ज्यादा होंगे, लेकिन डेल्टा लहर की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने वालों और मौत की संख्या कम रहेगी.'

डेल्टा की तुलना में कम खतरा- डॉक्टर मुरे ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि 85.2 प्रतिशत संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं होगा. ये लोग एसिम्टोमैटिक होंगे. हालांकि, इनमें भी अस्पताल में भर्ती होने वालों और मौत की संख्या होगी लेकिन ये कम होगी. भारत में अस्पताल में भर्ती होने वालों का पीक डेल्टा लहर की तुलना में लगभग एक चौथाई ही होगा और मौत की संख्या भी डेल्टा की तुलना में कम ही रहेगी.'

ओमिक्रॉन से हो सकते हैं और भी म्यूटेशन- कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ओमिक्रॉन फैलने की वजह से और भी म्यूटेशन हो सकते हैं. डॉक्टर मुरे के अनुसार, 'जहां तक म्यूटेशन की बात है, ये अचानक से होते हैं. वायरस का जितना ज्यादा ट्रांसमिशन होगा, उसके म्यूटेशन की संभावना उतनी ज्यादा होगी. हालांकि, अगले एक-दो महीने में ओमिक्रॉन के अलावा किसी नए वैरिएंट का आना फिलहाल मुश्किल है क्योंकि अभी यही बहुत ज्यादा फैल रहा है.' 

इन लोगों के लिए खतरनाक ओमिक्रॉन- एक्सपर्ट्स के अनुसार, ओमिक्रॉन 90-95 फीसदी कम गंभीर है लेकिन फिर एक वर्ग ऐसा है जिनमें बीमार होने का खतरा ज्यादा है जैसे कि बुजुर्ग लोग. फिर भी अस्पताल में भर्ती होने की नौबत कम ही आएगी. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि लोग बेवजह घर से बाहर ना निकलें. कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत आइसोलेट हो जाएं और टेस्ट कराकर इलाज कराएं.

 


 

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