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चिकनगुनिया: जानिए क्या होते हैं लक्षण, कैसे मरीज घर पर रहकर भी हो सकते हैं ठीक, बरतें ये सावधानियां

डेंगू-मलेरिया की ही तरह चिकनगुनिया लगातार खतरनाक बनती जा रही है. मच्छरों से बचाव ही ऐसे में एक मात्र विकल्प बचता है, सबसे जरूरी बात ये है कि ये दोनों मच्छर दिन के उजाले में काटते हें. कई अध्ययनों में पाया गया है कि चिकनगुनिया के मच्छर घर से ज्यादा बाहर काटते हैं, हालांकि, वे घर के अंदर भी पैदा हो सकते हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

मानसून के साथ ही डेंगू-मलेरिया के साथ ही चिकनगुनिया का खतरा भी मंडराने लगता है. अमूमन बारिश के पानी में पनपने वाले मच्छरों के काटने से होने वाली कुछ बीमारियों में से चिकनगुनिया भी एक बीमारी है. इंसानों में यह बीमारी चिकनगुनिया वायरस के वाहक मच्छरों के काटने की वजह से होती हैं. इन मच्छरों को ऐडीस इजिप्ती और एडीस एल्बोपिक्टस नाम से पहचानते हैं. इन दोनों  प्रजातियों की मादा मच्छरों के काटने से चिकनगुनिया वायरस फैलता है. 

खतरनाक है ये बीमारी 

डेंगू-मलेरिया की ही तरह चिकनगुनिया लगातार खतरनाक बनती ती जा रही है. मच्छरों से बचाव ही ऐसे में एक मात्र विकल्प बचता है, सबसे जरूरी बात ये है कि ये दोनों मच्छर दिन के उजाले में काटते हें. कई अध्ययनों में पाया गया है कि चिकनगुनिया के मच्छर घर से ज्यादा बाहर काटते हैं, हालांकि, वे घर के अंदर भी पैदा हो सकते हैं. चिकनगुनिया वायरस सीधे मच्छर से इंसानों में और फिर इंसानों से मच्छरों के जरिए इंसानों में संचारित होता है. 

चिकनगुनिया होने पर क्या करें

आमतौर पर लोगों को लगता है कि चिकनगुनिया हो जाने पर अस्पताल जाना ही एकमात्र उपाय है. लेकिन ऐसा नहीं है. डॉक्टर के संपर्क में रहना जरूरी है लेकिन घर पर रहते हुए भी इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है. 

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1. चिकनगुनिया की कोई स्पेसिफिक मेडिसीन उपलब्ध नहीं है. ऐसे में डॉक्टर की दी हुई दवा ही लें. खुद से इलाज करने से बचें और कोई भी दवा न खाएं. इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है.

2. घर पर रहें और जितना ज्यादा हो सके आराम करें. इस दौरान आराम करना सबसे ज्यादा जरूरी है.

3. चिकनगुनिया में अक्सर लोगों को डी-हाइड्रेशन की शिकायत हो जाती है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लिक्विड लें. लिक्विड डाइट लेना भी फायदेमंद रहेगा.

4. अगर आप किसी दूसरी बीमारी के लिए भी दवा ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर को उसके बारे में जरूर बताएं. एक साथ दो तरह की दवाइयां लेना खतरनाक भी हो सकता है.

5. उन चीजों को ज्यादा से ज्यादा लें जिनसे विटामिन सी मिले. विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है.

6. बहुत अधिक ऑयली और स्पाइसी खाने से परहेज करें.

7. नारियल पानी और सब्ज‍ियों का सूप जरूर लें. इस दौरान शरीर बहुत कमजोर हो जाता है, ऐसे में ये लिक्विड डाइट एनर्जी देने का काम करती है.

8. आइस पैक को तौलिए में लपेटकर जोड़ों पर रखें और हल्के हाथों से दबाएं. इससे दर्द में फायदा होगा.

यूं तो सही देखरेख के साथ घर पर रहते हुए भी इस बीमारी से ठीक हुआ जा सकता है लेकिन बीमारी के दौरान डॉक्टर के संपर्क में जरूर रहें. अगर लगे की स्थिति संभलने के बजाय बिगड़ती ही जा रही है तो देर बिल्कुल न करें. चिकनगुनिया का इलाज क्या है

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आमतौर माना जाता है कि चिकनगुनिया वायरस इंसाने के लिए जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसके लक्षण गंभीर होने पर यह मरीज को बेहद कमजोर कर सकता है. सही डॉक्टर से इलाज करवाने पर मरीजोंका बुखार एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाता है. हड्डियों और जोड़ों का दर्द ठीक होने में कई महीनों का समय ले सकता है. इस बीमारी के 20 प्रतिशत मरीज ठीक होने के काफी बाद तक जोड़ों के दर्द की शिकायत करते हैं. 

 

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