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FACT CHECK: कोलकाता में हाथ-रिक्शा खींच रही ये लड़की नहीं है IAS टॉपर

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है. तस्वीर में एक लड़की को हाथ वाला रिक्शा खींचते देखा जा सकता है. अब तक 30 हजार से अधिक लोग इस पोस्ट को शेयर कर चुके थे.

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IAS टॉपर
IAS टॉपर

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर बहुत शेयर की जा रही है. इसमें एक लड़की को हाथ वाला रिक्शा खींचते देखा जा सकता है. रिक्शे की सीट पर एक बुजुर्ग शख्स बैठा है. तस्वीर के साथ मैसेज ऐसा है कि जो भी पढ़े उसके दिल को छू जाए. मैसेज में लिखा है- "एक IAS टॉपर लड़की  अपने पिता को दुनिया से रूबरू करवाती हुई. लड़की और उसके पिता को सलाम."

इस पोस्ट को "Silchar Diary" नाम के फेसबुक पेज ने भी शेयर किया है. इसी पोस्ट को अधिकतर लोग शेयर कर रहे हैं. ये रिपोर्ट लिखे जाने 30 हजार से अधिक लोग इस पोस्ट को शेयर कर चुके थे.

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी  इस पोस्ट को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया.

इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने तस्वीर के सच तक पहुंचने की कोशिश की तो पाया ना तो तस्वीर में दिखने वाली लड़की IAS टॉपर है और ना ही इसके पिता रिक्शा चालक हैं. तस्वीर के साथ जो मैसेज शेयर किया जा रहा है वो पूरी तरह गलत है.

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जब हमने इस तस्वीर को गूगल पर रिवर्स सर्च किया तो पता चला कि इंटरनेट पर इस तस्वीर को पहले कई जगह इस्तेमाल किया जा चुका है. कुछ रिजल्ट्स को खोजने पर  पता चला कि तस्वीर में दिख रही लड़की का  नाम श्रमोना पोद्दार है.  श्रमोना ने इस तस्वीर को अपने इंस्टग्राम प्रोफाइल पर भी साझा किया है.

हमने श्रमोना से इस बारे में फ़ोन पर बात की. उन्होंने हमें बताया कि वह एक ट्रेवल ब्लॉगर है और कुछ ब्रांड्स के प्रमोशनल असाइनमेंट भी करती है. श्रमोना  कोलकाता के नज़दीक चन्दन नगर की रहने वाली है. उनके पिता एक डॉक्टर है  और निश्चित ही श्रमोना IAS टॉपर नहीं है.

श्रमोना के मुताबिक इस फोटो को इस साल अप्रैल में उत्तरी कोलकाता के शोभा बाज़ार  में लिया गया था. फोटो को उनके दोस्त भास्कर चाल  ने लिया था जो एक फ्रीलांसर फोटोग्राफर है.

उस समय श्रमोना कोलकाता में अलग अलग जगह जाकर इंस्टाग्राम के लिए वाइल्डक्राफ्ट ब्रैंड का कैंपेन  कर रही थी. तस्वीर में उनके कंधे पर वाइल्डक्राफ्ट का बैग भी देखा जा सकता है.

तस्वीर के पीछे की सच्चाई बताते हुए श्रमोना ने बताया कि वे कोलकाता में ही पली बड़ी हैं. किसी को बिठाकर हाथ से रिक्शा खींचने वाले  को देखकर वह हमेशा भावुक हो जाती थी.  उनका कहना था कि " जिस दिन इस तस्वीर को लिया गया,  उसी  दिन  मैंने  तय किया कि मैं भी किसी को बिठाकर रिक्शा खीचूंगी. मैंने एक रिक्शा वाले को पीछे बैठने का आग्रह किया और फिर रिक्शा चलाने की कोशिश की. उस दिन मुझे पता चला की यह कितना मुश्किल होता है.

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इसी दौरान मेरे फोटोग्राफर दोस्त भास्कर ने यह तस्वीर ली थी. कुछ समय बाद मैंने इस तस्वीर को अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर शेयर किया था. तस्वीर के साथ मैंने  इससे जुड़ी  कहानी भी शेयर की थी.

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श्रमोना के मुताबिक ये उनकी जानकारी में है कि इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर गलत मैसेज के साथ शेयर किया जा रहा है. उनका कहना है, यह बहुत ही निराशाजनक है, क्योंकि इस गलत पोस्ट की वजह से उनके माता पिता को भी परेशान होना पड़ रहा है. इस गलत कहानी को लेकर कुछ लोग उनके माता पिता को कॉल भी कर रहे हैं."

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