रमजान के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसके जरिए दावा किया गया है कि कोलकाता में सड़क को पूरा ब्लॉक करके इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया.
वीडियो में भी कुछ ऐसा ही दिखाई देता है कि सड़क के एक तरफ तो ट्रैफिक चालू है लेकिन दूसरी तरफ रखी गईं कुर्सी-टेबलों से पूरा रास्ता ब्लॉक है. टेबलों पर खाने पीने का सामान भी रखा हुआ है.
वीडियो के साथ लिखा है, “सड़क पर नमाज़ के बाद पेश है सड़क पर इफ्तार पार्टी.” फेसबुक और एक्स पर वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा जा रहा है, “वीडियो पश्चिम बंगाल के कोलकाता से है. जातिवादी हिन्दुओं सुधार जाओ वरना वो दिन दूर नही है जब कोई मोहम्मद बाबर, मोहम्मद अकबर, मोहम्मद औरंजेब, दिल्ली की सत्ता पर बैठ के पाकिस्तान, कश्मीर और बांग्लादेश की तरह तुम्हारा अस्तित्व तुम्हारे भारत में ही मिटाएगा”.
वायरल पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये कोलकाता का नहीं बल्कि कर्नाटक के मैंगलोर का वीडियो है.
कैसे पता की सच्चाई?
वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स मिले जिनमें इस वीडियो को मैंगलोर के मुदीपु जंक्शन का बताया गया है.
इसके बाद कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें इस वीडियो के बारे में छपी कुछ न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं. “डेक्कन हेराल्ड” की खबर में बताया गया है कि ये इफ्तार पार्टी मुदीपु जंक्शन के पास एक हाइवे पर 30 मार्च, 2024 को आयोजित की गई थी.
इसकी वजह से ये हाइवे चार घंटे से ज्यादा देर के लिए ब्लॉक रहा था. यहां से आने-जाने वाले वाहन चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी. पार्टी का आयोजन इलाके के रिक्शा चालकों ने किया था.
वीडियो के वायरल हो जाने बाद चुनाव आयोग ने इसका संज्ञान लिया और मुख्य आयोजक अबूबकर सिद्दीकी को आचार संहिता का उल्लघंन करने पर नोटिस थमा दिया. चुनाव आयोग का कहना है कि सड़क ब्लॉक होने की वजह से जनता को परेशानी झेलनी पड़ी.
वहीं आयोजकों का कहना है कि इस पार्टी के आयोजन का मकसद सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देना था. क्योंकि इसमें अलग-अलग समुदायों के लोग शामिल हुए थे.
वीडियो को मैंगलोर का बताकर “वन इंडिया” और “टीवी 9 कन्नड़” ने भी खबरें छापी हैं.
इससे ये बात साबित हो जाती है कि ये वीडियो कर्नाटक का है, न कि बंगाल का.