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फैक्ट चेक: जहां खोदने पर मिली नंदी की ​ये मूर्ति वह मंदिर ही है, कोई मजार नहीं

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा गलत है. तस्वीर किसी मजार की नहीं बल्कि तमिलनाडु के नामक्कल जिले में स्थित एक मंदिर की है,

जहां खोदने पर मिली नंदी की ​ये मूर्ति वह मंदिर ही है, कोई मजार नहीं जहां खोदने पर मिली नंदी की ​ये मूर्ति वह मंदिर ही है, कोई मजार नहीं

देश में अलग-अलग जगहों पर खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्तियां मिलने की खबरें आम हैं. हाल ही में उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान एक प्राचीन शिवलिंग मिला था.

सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही तस्वीर वायरल हो रही है. तस्वीर में एक छोटा सा कमरा दिख रहा है जिसके इर्द-गिर्द हरे रंग की रेलिंग लगी हुई है. कमरे के आस-पास खुदाई की गई है. तस्वीर में खुदाई वाली जगह पर एक नंदी बैल की मूर्ति भी देखी जा सकती है. तस्वीर शेयर करते हुए लोग दावा कर रहे हैं कि खुदाई के दौरान एक मजार के नीचे शिवभक्त नंदी की मूर्ति मिली है.

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा गलत है. तस्वीर किसी मजार की नहीं बल्कि तमिलनाडु के नामक्कल जिले में स्थित एक मंदिर की है, जहां मंदिर के पुनर्निर्माण के दौरान एक नंदी की प्राचीन मूर्ति निकली थी.

एक फेसबुक यूजर ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है, "ऊपर मज़ार, खुदाई किया तो नीचे नंदी पूरे देश की यही सच्चाई है..?" वहीं एक और यूजर ने इसी तस्वीर के साथ लिखा है, "बड़े पेशेवर ढंग से हमारे प्राचीन मंदिरों को दबाया गया है भारत में हर मजार मस्जिद की यही सच्चाई है जो अब निकल कर सामने आ रही हैं."

क्या है सच्चाई

वायरल तस्वीर में दिख रही हरे रंग की रेलिंग के पीछे कुछ मूर्तियां देखी जा सकती हैं. जिसमें से दो मूर्ति बिल्कुल नंदी बैल जैसी लग रही हैं और एक मूर्ति किसी हिंदू भगवान की लग रही है. तस्वीर को गौर से देखने पर लग रहा है कि ये कोई मंदिर है.

कुछ कीवर्ड्स और रिवर्स सर्च की मदद से हमें Puthiyathalaimurai TV की एक न्यूज रिपोर्ट मिली. 5 सितंबर 2021 को प्रकाशित ये रिपोर्ट तमिल भाषा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में नामक्कल जिले के अरियुर गांव के सेलैंडियाम्मन मंदिर में पुननिर्माण का काम चल रहा था. मंदिर में बाउंड्री वाल बनाने के लिए मंदिर के आस-पास खुदाई की गई थी, उसी दौरान वहां एक प्राचीन नंदी बैल की मूर्ति भी मिली थी.

न्यूज रिपोर्ट में मंदिर का एक वीडियो भी मौजूद है. वीडियो में इसी मंदिर को अलग-अलग एंगल से शूट किया गया है जिसे देखकर साफ पता चला रहा है कि ये कोई मजार की नहीं बल्कि एक मंदिर ही है.

जानकारी को पुख्ता करने के लिए हमने 'आजतक' के स्थानीय संवादाता बकरुद्दीन से संपर्क किया. बकरुद्दीन ने मंदिर प्रशासन से बात करके हमें बताया कि वायरल तस्वीर तमिलनाडु के अरियुर गांव में स्थित सेलैंडियाम्मन मंदिर की ही है.

हमारी पड़ताल में ये साफ हो जाता है कि वायरल हो रही तस्वीर किसी मजार की नहीं बल्कि तमिलनाडु के नामक्कल जिले में स्थित एक मंदिर की है, जहां खुदाई के दौरान नंदी बैल की मूर्ति पाई गई थी. एक मंदिर को मजार बताकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है.

सौरभ भटनागर के इनपुट के साथ

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

एक मजार के परिसर में खोदने पर जमीन के नीचे नंदी की मूर्ति पाई गई. इससे साबित होता है कि हमारे प्राचीन मंदिरों को दबाया गया है.

निष्कर्ष

ये तस्वीर किसी मजार की नहीं बल्कि तमिलनाडु के अरियुर गांव में स्थित सेलैंडियाम्मन मंदिर की है.

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