गठबंधन का नाम 'I.N.D.I.A.' क्यों रखा? इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने विपक्षी पार्टियों से 7 दिन में जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने इसे 'आखिरी मोहलत' कहा है. विपक्षी पार्टियों के साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. इस मामले पर अब 10 अप्रैल को सुनवाई होगी.
दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है. पिछले साल जब विपक्षी पार्टियों ने अपने गठबंधन का नाम 'I.N.D.I.A' रखा था, तब गिरिश भारद्वाज नाम के शख्स ने हाईकोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की थी.
भारद्वाज ने अपनी याचिका में मांग की है कि विपक्षी पार्टियों को 'इंडिया' नाम का इस्तेमाल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे पार्टियां देश के नाम पर गलत फायदा ले रही हैं.
उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की थी कि 19 अप्रैल से वोटिंग शुरू हो रही है, इसलिए इस पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए, लेकिन अदालत ने इसे नामंजूर कर दिया.
क्या है मामला?
विपक्षी पार्टियों ने पिछले साल जुलाई में अपने गठबंधन का नाम I.N.D.I.A. यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस रखा था.
इसके बाद गिरिश भारद्वाज नाम के शख्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने मांग की कि अदालत पार्टियों को INDIA नाम इस्तेमाल करने से रोकने का निर्देश जारी करे. इसके साथ ही केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को इन राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दे.
याचिका में कहा गया कि 18 जुलाई को बेंगलुरु में मीटिंग के बाद विपक्षी पार्टियों ने अपने गठबंधन का नाम I.N.D.I.A. रखने का ऐलान किया था. इस दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने BJP से सवाल किया कि क्या वो INDIA को चुनौती दे सकते हैं? इसी में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि ये लड़ाई NDA और INDIA के बीच में है. नरेंद्र मोदी जी और INDIA के बीच में है.
भारद्वाज ने कहा कि देश का नाम 'घसीटकर' राहुल गांधी ने बड़ी चालाकी से ये दिखाने की कोशिश की कि बीजेपी और पीएम मोदी की लड़ाई हमारे देश से है. उन्होंने तर्क दिया कि इससे भ्रम पैदा हो गया है कि 2024 की लड़ाई राजनीतिक पार्टियों या गठबंधन और हमारे देश के बीच होगी.
उन्होंने ये भी तर्क रखा कि गठबंधन का नाम देश के नाम पर रखने से नफरत बढ़ सकती है और इससे राजनीतिक हिंसा होने का खतरा है.
नाम रखना गैर-कानूनी?
याचिका में ये भी कहा गया है कि गठबंधन का नाम I.N.D.I.A. रखना एम्ब्लेम्स एंड नेम्स (प्रिवेन्शन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट यानी प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) कानून की धारा 3 के तहत वर्जित है.
इस कानून की धारा 3 के तहत, कोई भी व्यक्ति अपने कारोबार, पेशे, पेटेंट, ट्रेडमार्क या डिजाइन के लिए राष्ट्रीय प्रतीक, नाम या चिन्हों का इस्तेमाल नहीं कर सकता. हालांकि, केंद्र सरकार ने कुछ मामलों में इनका उपयोग करने की अनुमति दी है.
इस कानून की धारा 5 में ऐसा करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है. अगर कोई भी व्यक्ति या संस्था धारा 3 के तहत दोषी पाया जाता है तो उसे 500 रुपये तक के जुर्माना देना पड़ सकता है.
हाईकोर्ट में अब तक क्या हुआ?
भारद्वाज की याचिका पर 4 अगस्त 2023 को दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस-टीएमसी समेत 26 विपक्षी पार्टियों को नोटिस जारी किया था. पार्टियों के अलावा कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा था.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ राजनीतिक पार्टियों ने मौखिक तौर पर कहा कि ये याचिका सुनवाई के लायक नहीं है. हालांकि, अब तक किसी भी पार्टी ने लिखित में जवाब नहीं दिया है.
हाईकोर्ट के नोटिस पर चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा था कि वो राजनीतिक गठबंधनों को रेगुलेट नहीं कर सकता.
चुनाव आयोग ने कहा था कि 1951 के जनप्रतिनिधि कानून के तहत, राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है, लेकिन राजनीतिक गठबंधनों को रेगुलेट करने को लेकर कोई कानून नहीं है.
हाईकोर्ट ने दी आखिरी मोहलत!
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में मंगलवार को कहा कि जवाब दाखिल करने के लिए राजनीतिक पार्टियों और केंद्र सरकार को 8 मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.
पिछली सुनवाई में भारद्वाज के वकील ने कहा था कि याचिका अगस्त 2023 से लंबित है और राजनीतिक पार्टियों और केंद्र सरकार की ओर से जवाब न दाखिल किए जाने के कारण इसमें और देरी हो रही है.
मंगलवार को हाईकोर्ट ने कहा कि विपक्षी पार्टियों और केंद्र सरकार के पास जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय है. कोर्ट ने ये भी कहा कि जवाब दाखिल करने का ये 'आखिरी मौका' है.
याचिकाकर्ता ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि सुनवाई की तारीख पहले से ही 10 अप्रैल तय है.