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एजेंडा आजतक: महिलाओं के सम्मान के लिए घर से ही बच्चों को सिखाएं- सुष्मिता देव

आजतक के हिंदी जगत के महामंच एजेंडा आजतक के आठवें संस्करण अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि हाल में हमने देखा है कि रेप की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. यह सोचना कि सदन में एक बिल पारित कर देने से हमारा कर्तव्य पूरा हो जाता है तो यह गलत है. यह तो सिर्फ डैमेज कंट्रोल है.

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अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव

  • इंसाफ के लिए आज भी कहीं न कहीं 2012 में ही खड़ी हूंः आशा देवी
  • इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया
  • सुष्मिता-बिल पारित करना ही काफी नहीं, यह तो सिर्फ डैमेज कंट्रोल

'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के पहले दिन ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि मेरा मानना है कि अगर ऐसा लगता है कि सदन में एक बिल पारित करने से हमारा कर्तव्य पूरा हो जाता है तो यह गलत है. यह एक सामाजिक समस्या है.

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि हाल में हमने देखा है कि रेप की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. यह सोचना कि सदन में बिल पारित कर देने से हमारा कर्तव्य पूरा हो जाता है तो यह सोचना गलत है. यह तो सिर्फ डैमेज कंट्रोल है. हालांकि मैं उस कानून के खिलाफ नहीं हूं.

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सुष्मिता देव ने कहा कि मेरा मानना है कि यह एक सामाजिक समस्या है. संविधान कहता है कि महिला और पुरुष दोनों समान हैं जबकि सामाजिक तौर पर ऐसा नहीं है. हम घर, संस्था, समाज जहां भी जाते हैं वहां आज भी वही स्थिति है. लैंगिक समानता के लिए हमें अपने बच्चों को सीख देनी चाहिए.

जल्द से जल्द न्याय मिलेः सुष्मिता देव

उन्होंने कहा कि बचपन से ही बच्चों में लैंगिक असमानता को लेकर सीख देनी चाहिए. पहले तो रेप पर अंकुश लगाना ही चाहिए. लेकिन अगर हम रेप पर अंकुश नहीं लगा पाते हैं तो न्यायिक प्रक्रिया तेजी से होनी चाहिए. जल्द से जल्द न्याय दिया जाना चाहिए. निर्भया को लेकर उनके माता-पिता 7 साल से संघर्ष कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वर्मा समिति कहती है कि कोई भी लड़की किसी भी थाने में जाकर जीरो एफआईआर दर्ज करा सकती है, लेकिन यह बात हर लड़की को नहीं पता है. जीरो एफआईआर का मतलब लड़की को केस दर्ज कराने के लिए घर के पास या घटनास्थल के पास केस दर्ज कराने की जरुरत नहीं होती, वो कहीं भी कराई जा सकती है. उन्होंने कहा कि रेप कोई आंकड़ा नहीं होता, अगर कहीं भी ऐसी कोई घटना हो जाती है तो हर महिला को इसका एहसास होता है. यहां तक की पुरुष भी इससे प्रभावित होते हैं.

‘एजेंडा आजतक’ के ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में निर्भया के माता-पिता आशा देवी और बद्रीनाथ के अलावा बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी , अपना दल की अध्यक्ष और सांसद अनुप्रिया पटेल, ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव भी शामिल हुए.

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मुझे इंसाफ चाहिएः निर्भया की मां

निर्भया की मां आशा देवी ने भी इसी सत्र में कहा, 'मुझे इंसाफ चाहिए. कहीं न कहीं आज भी मैं वहीं 2012 में ही खड़ी हूं क्योंकि आज भी इंसाफ चाहिए. इंसाफ मांगते-मांगते मैं खुद एक सवाल बन गई हूं. आशा देवी ने आगे कहा, '2012 में जो घटना हुई उसमें निर्भया की क्या गलती थी. हमारी क्या गलती थी कि आज भी हमें इंसाफ नहीं मिला.'

दूसरी ओर, निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि रेप के आरोपियों को किसी भी सूरत में जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अगर उन्हें जमानत मिलेगी तो लड़कियों को जिंदा जला दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले की समयसीमा तय की जानी चाहिए.

'एजेंडा आजतक' का आठवां संस्करण शुरू

19 साल से लगातार भारत का नंबर वन न्यूज चैनल रहे 'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण का आगाज सोमवार को हो गया. एजेंडा आजतक की शुरुआत सोमवार सुबह वंदे मातरम से हुई. इसके बाद इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया. कली पुरी ने एजेंडा आजतक के महत्व के बारे में बताते हुए इस आयोजन को अपने सभी कार्यक्रमों की नींव बताया.

एजेंडा आजतक ने नक्शा बदल दियाः कली पुरी

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वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कहा कि सभी तरह के विचारों को बगैर किसी दबाव और रोक-टोक के साथ आपके सामने प्रस्तुत करना हमारा प्रमुख एजेंडा है. हिंदी जगत के महामंच का यह आठवां संस्करण है. यह वो एजेंडा आजतक है जिसने दूसरे और कार्यक्रमों का आयोजन किया है. एजेंडा आजतक का पहला एडिशन 2012 में हुआ था. उस समय आजतक का कोई और इवेंट नहीं था. इस एक इवेंट ने नक्शा ही बदल दिया.

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित दो दिवसीय 'एजेंडा आजतक' 16 और 17 दिसंबर 2019 चलेगा. एजेंडा आजतक का मकसद है, उस एजेंडे को लोगों के सामने लेकर आना जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के विचारकों और चिंतकों की सोच है. ये देश में देश की आवाज का एजेंडा होगा.

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