एजेंडा आजतक के सत्र 'नागरिकता का धर्म' में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शिरकत की. दोनों नेताओं ने नागरिकता संशोधन कानून और जामिया प्रदर्शन के मुद्दे पर पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखा. एक ओर नकवी ने CAA को लागू करने के पीछे सरकार की मंशा के बारे में बताया वहीं दूसरी ओर ओवैसी ने इसका विरोध करते हुए इसकी खामियों की ओर सरकार का ध्यान खींचा.
नकवी ने नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में फैली हिंसा को लेकर कहा कि अफवाहों के जरिए अमन को अगवा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि कानून किसी की नागरिकता छीनने के लिए बल्कि नागरिकता देने के लिए है. यह कानून उन तीन देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देगा जिनके साथ लगातार अन्याय हो रहा है. इस कानून के जरिए अपमान झेल रहे तीन मुल्कों के अल्पसंख्यकों को मानवीय सम्मान दिया जाएगा.
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देश के मुसलमानों की नागरिकता को इस कानून से कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से मोदीजी के एक भी काम को विपक्ष और ओवैसीजी ने सराहा नहीं है. जनकल्याण से जुड़ी हर योजना का इन लोगों ने विरोध ही किया है, चाहे वह महिलाओं से जुड़ा मामला हो या फिर किसानों के कल्याण से जुड़ी योजना हो.
जिन्ना की रूह को पहुंचाई खुशी
ओवैसी ने नकवी की दलीलों पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार कानून बना सकती है लेकिन मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकती जो इन्होंने किया है. उन्होंने कहा कि जहां भी धर्म आ जाएगा वहां बराबरी नहीं रह जाएगी. जामिया विरोध पर ओवैसी ने कहा कि वह तो अल्पसंख्यक दर्जा हासिल यूनिवर्सिटी हैं वहां जिस तरह की बर्बरता हुई उस पर मंत्री की ओर से एक बयान तक नहीं आया.
ओवैसी ने कहा कि असम में हिन्दू बंगाली को तो नागरिकता मिल जाएगी लेकिन 5 लाख मुस्लिम जिन्हें NRC में छोड़ा गया है उनके खिलाफ केस चलेंगे. ओवैसी ने कहा कि सरकार मजहब की बुनियाद पर कानून बनाकर मोहम्मद अली जिन्ना की रूह को खुशी पहुंचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि शरण देने और नागरिकता देने में फर्क है और आप धर्म की बुनियाद पर नागरिकता देने जा रहे हैं यह संविधान के खिलाफ है. अगर देना चाहते हैं तो दीर्घकालिक वीजा दीजिए. ओवैसी ने कहा कि सरकार कहती है कि देश में 1.26 लाख विदेश हैं लेकिन 6 साल में सरकार सिर्फ 6 विदेशियों को वापस भेज पाई है.
जामिया प्रदर्शन पर आर-पार
जमिया के विरोध प्रदर्शन पर नकवी ने कहा कि पुलिस पर जो भी आरोप लगे हैं उसकी जांच हो रही है. लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों जरूरी हैं लेकिन हिंसा की कहीं कोई जगह नहीं है. प्रशासनिक हिंसा भी गलत है और प्रदर्शनकारियों की हिंसा भी गलत है. नकवी ने कहा कि अगर छात्रों को पीटा गया है तो यह बिल्कुल गलत है लेकिन हिंसा को राजनीतिक फायदों के लिए बढ़ावा देना भी गलत है.
ओवैसी ने कहा कि वाइस चांसलर से बगैर पूछे क्या किसी कैंपस में पुलिस घुस सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि इंद्रेश कुमार के आशीर्वाद से नजमा अख्तर को वीसी बनाया गया है और वह इस मामले में कुछ भी नहीं करेंगी. ओवैसी ने कहा कि वहां बच्चियों को मारा गया है, FIR कराने से कुछ नहीं होने वाला है. ओवैसी ने कहा कि कैंपस के हॉस्टल और टॉयलेट में घुसकर छात्र-छात्राओं को मारा गया है लेकिन जब वकीलों से झगड़ा होता है तो पुलिस चूड़ियां पहन लेती है, तब बेबस हो जाती है और बेबसी में धरना देती है.