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मई 2019 तक RBI से एक रुपया नहीं चाहिए: जेटली

'जेटली की पोटली में क्या है' सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में आरबीआई के पास 28 फीसदी रिजर्व है. इतना पैसा रखने की नीति 2015 में बनाई गई. उन्होंने कहा कि सरकार को अगले साल मई तक केंद्रीय बैंक के रिजर्व कैश से एक पैसा नहीं चाहिए.

वित्त मंत्री अरुण जेटली वित्त मंत्री अरुण जेटली

आजतक के महामंच 'एजेंडा आजतक' में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई के कैश रिजर्व को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को अगले साल मई तक केंद्रीय बैंक के रिजर्व कैश से एक पैसा नहीं चाहिए. 'जेटली की पोटली में क्या है' सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में आरबीआई के पास 28 फीसदी रिजर्व है. इतना पैसा रखने की नीति 2015 में बनाई गई.

जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार का सवाल है कि आखिर आरबीआई को कितना रिजर्व चाहिए. इस पैसे का और क्या इस्तेमाल किया जा सकता है. क्या इस पैसे से गरीबी और कारोबारी तेजी लाने के काम किया जा सकता है. इस विषय की गंभीरता को  देखते हुए केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ने एक समिति गठित की जिससे यह तय किया जा सके कि आरबीआई कितना पैसा देश की अर्थव्यवस्था में डाल सकता है.

देश के आर्थिक हालात पर जेटली ने कहा कि चुनौतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था में हैं और देश की अर्थव्यवस्था में भी हैं. वहीं कुछ ऐसे क्षेत्र भी में जहां चुनौतियां ऐतिहासिक हैं. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज रफ्तार से भाग रही है. महंगाई पूरी तरह काबू में है. पहले सरकारी घाटा आसमान पर था लेकिन अब इसपर पूरी तरह से लगाम लगा लिया गया है.

जेटली ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक चुनौतियां बेहद अहम हैं. कच्चे तेल की कीमतें चढ़ाव पर हैं, वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. वित्त मंत्री ने कहा कि 2008 में लेहमन ब्रदर्स संकट का असर भारत पर भी पड़ा. यूपीए ने अजीब नीति अपनाई और बैंकों के जरिए बिना रोकटोक पैसे देना शुरू कर दिया. इससे क्षमता में इजाफा कर दिया  गया लेकिन ज्यादातर लोग इन प्रोजेक्ट्स को संभाल नहीं पाए और देश के सामने 8.5 लाख करोड़ के एनपीए एकत्र हो गया. आरबीआई ने आंखें बंद रखी और सबसे गलत काम यह किया कि 8.5 लाख करोड़ के एनपीए को मजह 2.5 लाख करोड़ बताया.

आरबीआई की स्वायत्तता को कोई खतरा नहीं

वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को कोई खतरा नहीं है. सरकार चुनी हुई होती है. हमें जनता और व्यवसाय को जवाब देना पड़ता है. यह जवाब रिजर्व बैंक को नहीं देना पड़ता, इसलिए तरह-तरह के तंत्र इस्तेमाल करके उसमें प्रधानमंत्री के स्तर पर मीटिंग होती है. रिजर्व बैंक में जो पैसा है वह देश का पैसा है. रघुराम राजन ने भी चिट्ठी लिखकर कहा था कि रिजर्व बैंक में जो पैसा रिज़र्व है उसे कैसे खर्च किया जाए. विषय की गंभीरता से समझे बगैर नारों में इसे बदल दिया गया.

जेटली ने कहा कि आरबीआई के दोनों गवर्नर के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं. मैं आज भी उनसे संपर्क में हूं. आरबीआई की स्वायत्तता को कोई खतरा नहीं है लेकिन अगर अर्थव्यवस्था में कोई दिक्कत है तो हम रिजर्व बैंक से कहेंगे कि मदद करने सामने आए.

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक में दो बैठकें अच्छी हुईं और कई मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें कैपिटल फ्रेमवर्क पर पूरी तरह सहमति थी. इस विषय को उठाना और यह कहना कि आरबीआई की स्वायत्तता पर हमला है, यह गलत है.

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