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'छोटे परदे का काम फिल्म से ज्‍यादा कठिन है'

आजतक के कार्यक्रम सीधी बात में संपादक  प्रभु चावला ने फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन से बातचीत की. अंशःपा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, मुबारकबाद. देश को आप पर गर्व है.राष्ट्रीय पुरस्कार समिति, सरकार को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे इस लायक समझा.

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आजतक के कार्यक्रम सीधी बात में संपादक  प्रभु चावला ने फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन से बातचीत की. अंशः

पा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, मुबारकबाद. देश को आप पर गर्व है.
राष्ट्रीय पुरस्कार समिति, सरकार को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे इस लायक समझा.

ऑरो की भूमिका मुश्किल थी?
थोड़ा संघर्ष करना पड़ा क्योंकि मैं 70 साल का होने वाला हूं, ऐसे में 13 वर्षीय लड़के की भूमिका निभाना मुश्किल हो जाता है. जब बाल्की ने इसके बारे में मुझे बताया तो मैं पहले हंसा, बल्कि मैंने तो उनसे कहा कि भैया रात को क्या पी रहे थे तुम यह तो बताओ. उन्होंने कहा कि ऐसी एक बीमारी होती है जिसका नाम है प्रोजेरिया. फिर मैंने उनसे पूछा कि आप मुझे 13 साल का कैसे बनाएंगे तो उन्होंने मेकअप वालों से बात की फिर मुझे समझया.

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आप बड़ी स्क्रीन पर बड़े कलाकार, महान कलाकार बन गए. आपने बड़ी स्क्रीन को तो बहुत बड़ा कर दिया. अब छोटे स्क्रीन पर आकर उसे भी बड़ा कर दिया. क्या छोटा परदा ज्‍यादा पसंद आता है आपको?
ये सारे नाम तो आप पत्रकारों के कहे हुए हैं. मेरे खयाल से छोटे परदे का काम ज्‍यादा कठिन है, फिल्म के मुकाबले. जो भी लोग छोटे परदे से संबंधित हैं उनका बड़ा आदर करता हूं. यहां हमारे लिए कोई पटकथा, डायलॉग नहीं लिखा होता. यहां सब कुछ मन से करना होता है. कितने उतार -चढ़ाव लाने पड़ते हैं, इन सारी बातों का ध्यान रखते हुए उसे स्वयं निभाना पड़ता है.

टीवी पर शो इसलिए करते हैं कि इसमें पैसा ज्‍यादा है, आपको इससे प्रेम ज्‍यादा है या फिर इसलिए करते हैं कि आप जीवन के साथ नया प्रयोग करना चाहते हैं?
देखिए आप किसी भी व्यवसाय में होंगे तो ये तीनो चीजें ध्यान में आएंगी ही. हम काम करेंगे, तो कुछ नया कर रहे हैं, माध्यम नया है और धनराशि का अलग मापदंड है, उसके अनुसार चलेंगे. पैसे को अलग कर दें तो कलाकार की हैसियत से मुझे नया माध्यम दिखता है इसमें. यह उस .जमाने में आया जब किसी ने शायद इस ओर ध्यान नहीं दिया था कि टेलीविजन में काम कर सकते हैं. मेरे लिए यह एक पहला अवसर था.{mospagebreak}

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कौन बनेगा करोड़पति लालच का शो है?
पहली बात तो यह कि हम चेक तभी देते हैं जब सामने बैठा व्यक्ति अपनी काबिलियत दिखाता है. दूसरी बात यह कि जो इंसान यहां आकर कुर्सी पर बैठता है वह हमारे देश के छोटे-छोटे शहरों, गांव से आशाएं लेकर आता है. उसकी आशाएं यहां एक घंटे में पूरी हो जाएंगी, ऐसा उसने जीवन में कभी सोचा नहीं था. केबीसी ऐसा माध्यम है जहां उन्हें ऐसा अवसर मिलता है.

शो बढ़ाने के लिए सेलिब्रिटी को लाते हैं.
अब आपके सामने हम सेलिब्रिटी ही बैठे हुए हैं ना, आप भी ले आते हैं, हम भी ले आते हैं, क्या है उसमें. सेलिब्रिटी आने से रौनक बढ़ जाती है, जनता उनसे मिलना चाहती है. उन्हें उनसे मिलने का मौका मिलेगा तो इसमें क्या गलत है?

जितने सेलिब्रिटी आते हैं, 50 लाख या 1 करोड़ लेकर जाते हैं? उनके आइक्यू के बारे में बहुत सवाल उठते हैं. कभी कोई सेलिब्रिटी हारता ही नहीं है?
नहीं, बहुत से सेलिब्रिटी हारे भी हैं. जितने भी सेलिब्रिटी प्रोग्राम होते हैं वे चैरिटी के लिए होते हैं, इसलिए हम चाहते हैं कि ज्‍यादा से ज्‍यादा चैरिटी में जाए. हम कोशिश करते हैं कि जो सेलिब्रिटी आए उसका आइक्यू इतना हो कि वह ज्‍यादा से ज्‍यादा जीत कर जाए.

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कौन-सा कॅरियर ज्‍यादा पसंद है-छोटे परदे का या बड़े परदे का?
मुझे काम चाहिए. वह काम अगर कला से संबंधित है तो मैं उसे करने के लिए तैयार हूं.

आपके खास मित्र शाहरुख खान से हमने पूछ लिया कि आप छोटे परदे पर काम क्यों करना चाहते हैं, क्या आप अमित जी की नकल करते हैं? तो उन्होंने कहा कि मैं नकल नहीं करता लेकिन मैं लोगों के बेडरूम में घुसना चाहता हूं? क्या आपका भी सोचने का तरीका यह है कि मैं भी लोगों के घर में बैठा हूं रात नौ बजे.
मुझे जो अवसर मिलता है, उसे करता हूं. किसी के बेडरूम में जाना है या थियेटर में जाना है, यह सोच कर मैं काम नहीं करता.{mospagebreak}

बड़े स्टार छोटे परदे पर आ रहे हैं इसलिए बाकी के टीवी स्टार बड़े परेशान हैं. वे कहते हैं कि इन लोगों ने हमारी नौकरी खतरे में डाल दी है, हमें अब रोल नहीं मिल रहे.
जो काम मिलता है उसे चुनौती के रूप में करता हूं, इसलिए नहीं कि किसी की नौकरी में नुकसान करना है. जितने भी सह-कलाकारों ने टीवी पर काम किया है, चाहे वह शाहरुख हों, सलमान हों, अक्षय हों या प्रियंका हों, उन सभी की धारणा यही रही होगी.

पा में क्या कोई स्पेशल इफेक्ट थे, कैमरा ट्रिक थी या कुछ और था?
हमने कोई स्पेशल इफेक्ट नहीं किए. हमने तय किया था कि इसे प्राकृतिक रखेंगे, कोई ट्रिक नहीं करेंगे. हमारे कैमरामैन पीसी श्रीराम ने तय किया था कि इसे विशेष तरीके से फिल्माएंगे तो मैं शायद छोटा लगूंगा और अभिषेक बड़े लगेंगे.

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आपके जीवन को कुछ चरणों में विभाजित करता हूं-एबीसीएल के चेयरमैन, सांसद, उत्तर प्रदेश के ब्रांड एंबेसेडर. क्या लगता है कि कौन-सा चरण सबसे ज्‍यादा मुश्किल था, किसमें सबसे ज्‍यादा बहुत उतार-चढ़ाव आए?
फिल्मों में जब शुरुआत हुई तो लगता था कि पता नहीं काम मिलेगा या नहीं. लेकिन उस वक्त हमारे पास खोने को कुछ था ही नहीं. किसी ने मुझे एक बात पढ़कर सुनाई थी, जो अंग्रेजों ने गांधी जी के बारे में कही थी कि इस आदमी से बचना, यह बहुत खतरनाक आदमी है क्योंकि इसके पास खोने को कुछ नहीं है. कितनी अच्छी बात है. उस .जमाने में मेरे पास कुछ खोने को नहीं था. मैं तो टैक्सी चलाने के लिए भी तैयार था. वह दौर था जिसमें कष्ट हुआ. लेकिन जिस समय मुझ पर बोफोर्स के आरोप लगाए गए और मैं सांसद बना, वह दौर बहुत ही कठिन था. दरअसल, राजनीति को जाने बगैर हम भावनाओं में बह कर उसमें चले गए. एक महीने बाद ही पता चल गया कि इसमें भावनाएं कोई काम नहीं करतीं. मैंने हार मान ली और राजनीति छोड़ दी. फिर जब एबीसीएल दिवालिया हो गई और सारी फिल्में असफल हो गईं, कुर्की लग गई, उस दौर में एक भी रुपया नहीं था जेब में, 50-60 केस थे, घर हमारा नीलाम कर रहे थे, पता नहीं चल रहा था कि कैसे निकलेंगे इस सब से. लेकिन मेहनत करके किसी तरह से उबर गए. ये दो दौर बहुत ही कठिन थे.{mospagebreak}

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इस दौरान कई लोग आपके करीब आए. राजीव गांधी आपके दोस्त थे, अमर सिंह दोस्त थे, बाल ठाकरे परिवार से आपकी दोस्ती है, इनमें से नजदीक आप किसे समझते हैं?
सब नजदीक हैं. अमर सिंह को हमने अपने परिवार का सदस्य माना है और आज भी मानते हैं. वही रिश्ता गांधी परिवार से है और वही रिश्ता बाला साहब से है. बाला साहब की भले ही राजनीति कुछ भी हो, लेकिन हमेशा उन्होंने हमें और जया को अपने परिवार का सदस्य माना है. जब हम जया को ब्याह कर लाए थे तो उन्होंने जया को इस तरह से अपने घर में प्रवेश करवाया जैसे कि उनके घर में बहू आ रही हो. इस तरह की भावनाएं जब कोई व्यक्ति हमें दिखाएगा तो हमारा उसके साथ भावनात्मक संबंध बनता है. हम उनकी राजनीति में दखल नहीं करते और न ही वह हमसे ऐसा कुछ करने को कहते हैं.

गांधी परिवार के बारे में आपने एक बार हमसे कहा था कि उन्होंने दरवाजे हमारे लिए बंद कर दिए. ऐसा लगता है कि अब दरवाजे खुले हैं आपके और उनके दिल से भी.
मेरे दिल में कोई भी दरवाजा बंद नहीं है. मैं केवल यही कहना चाहता हूं कि जो रिश्ता बाबूजी और मांजी ने गांधी परिवार के साथ, जवाहरलाल नेहरू के समय से, मोतीलाल जी के समय से, सरोजिनी नायडू के समय से बनाया है उसका मैं मरते दम तक आदर करूंगा.

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आपके परिवार की तीन महिलाएं- जया जी, श्वेता और ऐश्वर्य जी-इनमें से आप पर किसकी ज्‍यादा चलती है.
श्वेता. जो वो कहेगी मैं वह कर दूंगा क्योंकि वो हमारी बेटी है बस. बेटे की भी सुनते हैं, बेटे हमारे मित्र हैं. जिस दिन उन्होंने हमारा जूता पहनना शुरू कर दिया, वो हमारे मित्र बन गए.

उद्योगपतियों से भी आपके संबंध हैं. अनिल अंबानी, कुमार मंगलम, सहारा श्री. किसके साथ ज्‍यादा सहज महसूस करते हैं.
सभी के साथ. कुमार मंगलम जी के दादाजी के भी पहले के .जमाने से बाबूजी का रिश्ता रहा है, घनश्यामदास बिड़ला से लेकर वसंत कुमार जी तक, जो कुमार मंगलम जी के दादाजी हैं, आदित्य बिड़ला से रिश्ता बहुत पुराना रहा है. उस रिश्ते को हम कैसे भूल सकते हैं. जब आप हमारी मित्रता बताएंगे कुमार मंगलम जी से तो हम उस रिश्ते को ध्यान देते हैं, उसका आदर करते हैं, जिसकी शुरुआत मांजी और बाबूजी ने की थी. यही बात अगर आप कहेंगे तो अनिल अंबानी और सहारा श्री में नहीं है क्योंकि उनके साथ हमारा कोई पारिवारिक संबंध नहीं है. ये नजदीकी संबंध तब हुआ जब हम फिल्म इंडस्ट्री में आए. हमारे युग में हमारी ये दोस्ती अनिल के साथ और सहारा श्री के साथ है.{mospagebreak}

पीढ़ी-दर-पीढ़ी जो चली आ रही है बात, उसे आगे बढ़ाने में आप विश्वास रखते हैं और आपके दौर में आपने जो दोस्ती बनाई है उसे भी आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं. राजीव गांधी से आपकी बहुत अच्छी दोस्ती थी, आपको लगता है कि राहुल अभिषेक में भी ऐसी दोस्ती होनी चाहिए, बढ़नी चाहिए.
मैं तो मानता हूं कि है और होनी भी चाहिए. अगर इस पीढ़ी में हम कोई संबंध बनाते हैं तो मैं यह उम्मीद करता हूं कि आने वाली पीढ़ी जो है-अभिषेक, या उनके बच्चे या उनके भी बच्चे इस संबंध को बनाए रखेंगे. अगर वो समझते हैं, जैसे मैं मानता हूं कि मांजी-बाबूजी ने जो चीजें प्रारंभ की उसे बनाए रखना मेरा फर्ज बनता है और एक नियम बनता है परिवार में कि हम उस कायदे-कानून, उन रिश्तों को कायम रखें.

फिर से रोमांटिक भूमिका करनी पड़े तो किस अदाकारा के साथ करना चाहेंगे?
जो भी अभिनेत्री सही बैठती है उस रोल में तो उसके साथ काम करने में कोई एतराज नहीं है.

आपको नहीं लगता कि आपको कोई ऐसी भूमिका करनी चाहिए जिससे देश को दिशा प्रदान की जा सके?
मैं ऐसा मानता हूं कि मुझमें खुद में इतनी क्षमता नहीं कि मैं ऐसा सोच सकूं इसलिए हमेशा ऐसी आशा में रहता हूं कि कोई ऐसा किरदार सोचे और फिर मैं उसे निभाऊं. लेकिन जैसा कि आपने कहा कि देश के लिए कुछ करना चाहता हूं तो मैं उसकी चर्चा नहीं करता हूं लेकिन चैरिटी आदि के रूप में बहुत कुछ करता रहता हूं. 

सीधी बात आजतक चैनल पर रविवार रात्रि 8.00 बजे और सोमवार दोपहर 3.30 बजे प्रसारित होता है.

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