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शीर कोरमा से पहले शबाना आजमी ने इस लेस्बियन फिल्म में किया था काम, मचा था बवाल

दीपा मेहता की फिल्म फायर में एक मिडिल क्लास परिवार में दो महिलाओं की कहानी को दिखाया गया था जो देवरानी और जेठानी होती हैं और एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने के बाद अपनी अलग और आजाद दुनिया बसाने की कोशिश करती हैं. इस फिल्म को पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर चोट के तौर पर देखा गया था और फिल्म को कई संगठनों का विरोध झेलना पड़ा था.

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शबाना आजमी और नंदिता दास
शबाना आजमी और नंदिता दास

साल 1998 में देश में रिलीज हुई समलैंगिक रिश्तों की कहानी पर बनी फिल्म फायर में काम कर चुकी शबाना आजमी अपनी लेटेस्ट फिल्म को लेकर चर्चा में हैं. शीर कोरमा नाम की इस फिल्म में दिव्या दत्ता और स्वरा भास्कर मुख्य भूमिका निभा रही हैं. पिछले दो दशकों में भारत का सिनेमा काफी बदल भी चुका है और मेड इन हेवेन जैसी वेबसीरीज और शुभ मंगल ज्यादा सावधान जैसी फिल्मों के आने के बाद से सेक्शुएलिटी से जुड़ी फिल्मों को भारत में अपनाया जाने लगा है लेकिन दीपा मेहता द्वारा निर्देशित फिल्म फायर के साथ ऐसा नहीं था और इस फिल्म को कई संगठनों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था.

शिवसेना और बीजेपी ने जताया था फिल्म को लेकर कड़ा विरोध

दरअसल फिल्म में एक मिडिल क्लास परिवार में दो महिलाओं की कहानी को दिखाया गया था जो देवरानी और जेठानी होती हैं और एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने के बाद अपनी अलग और आजाद दुनिया बसाने की कोशिश करती हैं. इस फिल्म को पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर चोट के तौर पर देखा गया था और फिल्म को कई संगठनों का विरोध झेलना पड़ा था.

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फायर को साल 1998 में अनकट पास किया गया था और इसे एडल्ट रेटिंग के साथ पास किया गया था. इस फिल्म को सबसे पहले 13 नवंबर 1998 को 42 स्क्रीन थियेटर्स में दिखाया गया था और ये फिल्म तीन हफ्तों तक बिना किसी परेशानी के स्क्रीन होती रही थी. 2 दिसंबर को मुंबई के गोरेगांव में 200 से ज्यादा शिवसैनिकों ने सिनेमैक्स थियेटर में हमला किया था और काफी तोड़फोड़ करते हुए इसके विरोध में नारे लगाए थे.

इसके बाद 3 दिसंबर को दिल्ली के रीगल थियेटर में ऐसी ही घटना सामने आई थी. इन लोकेशन्स पर शिवसैनिकों की महिला कार्यकर्ताओं ने फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया था और कहा था कि इस फिल्म के जरिए शादी जैसी संस्था को खतरा है और शिवसेना ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया था. वही बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने सूरत में राजपैलेस और राजमहल को नुकसान पहुंचाया था और आगजनी भी हुई थी जहां ये फिल्म स्क्रीन हुई थी.

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The gorgeous Waheedaji..

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इसके चलते सूरत और पुणे में इस फिल्म की स्क्रीनिंग को उसी दिन रोक दिया गया था. इसके बाद 4 दिसंबर को सेंसर बोर्ड ने एक बार फिर फिल्म को री-एक्जामिन के लिए भेजा था. 5 दिसंबर को महेश भट्ट, दिलीप कुमार और दीपा मेहता समेत कई सितारों ने फिल्म की स्क्रीनिंग्स पर हुई तोड़फोड़ को लेकर प्रदर्शन किया था और सुप्रीम कोर्ट को 17 पेजों की याचिका दायर करते हुए प्रोटेक्शन की गुहार लगाई थी.

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3 layers of clothes even back then !

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इसके बाद 7 दिसंबर को मेहता ने नई दिल्ली में कैंडल लाइट प्रोटेस्ट किया था. 12 दिसंबर को लगभग 60 शिवसैनिकों ने दिलीप कुमार के घर के आगे प्रदर्शन किया था. दिलीप कुमार इस फिल्म के प्रोड्यूसर भी थे और इस घटना के बाद उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई थी. 18 दिसंबर को फायर की स्क्रीनिंग एक बार फिर शुरु हुई थी लेकिन बीजेपी के 100 सदस्यों ने कानपुर के एक थियेटर में तोड़फोड़ की थी. 12 फरवरी 1999 को ये फिल्म एक बार फिर री-रिलीज की गई थी और 26 फरवरी को इस फिल्म की स्क्रीनिंग्स शुरु होने लगी थी. इस फिल्म में किरदारों के नाम को भारी विवाद के चलते बदलकर सीता से नीता कर दिया गया था.

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