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'सुमित्रा जैसी विलेन पहली बार बड़े पर्दे पर दिखेगी', 'गुलाब गैंग' से पहले जूही चावला से बातचीत

अपने करियर में सौ से ज्यादा फिल्में कर चुकीं जूही चावला पहली बार किसी फिल्म में नेगेटिव किरदार में नजर आने वाली हैं. सौमिक सेन निर्देशित 'गुलाब गैंग' में वह नेता के रोल में हैं. फिल्म में उनका मुकाबला माधुरी दीक्षित से है.

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अपने करियर में सौ से ज्यादा फिल्में कर चुकीं जूही चावला पहली बार किसी फिल्म में नेगेटिव किरदार में नजर आने वाली हैं. सौमिक सेन निर्देशित 'गुलाब गैंग' में वह नेता के रोल में हैं. फिल्म में उनका मुकाबला माधुरी दीक्षित से है. जूही से बातचीत के प्रमुख अंशः

गुलाब गैंग के बारे में बताएं?
यह आम मसाला फिल्म है. हमारी इस फिल्म में पुरुष पात्र भी हैं. गांव की पृष्ठभूमि पर फिल्म है. इसमें संदेश भी है. यह महिला सशक्तिकरण की बात करती है. औरतों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के खिलाफ बात करती है. लड़कियों को अच्छी शिक्षा और अच्छी परवरिश दी जानी चाहिए. इस फिल्म में मैंने नेगेटिव शेड वाली पॉलिटिशियन का रोल किया है.

आप पॉलिटिशियन और वह भी नेगेटिव, रोल के लिए कैसे तैयार हो गईं?
सौमिक जब मेरे पास इस फिल्म का ऑफर लेकर आए, तो मुझे लगा कि उनका दिमाग खराब हो गया है. मैंने साफ-साफ कह दिया कि यह रोल आपने मुझे ध्यान में रखकर नहीं लिखा है. मैं इस तरह की फिल्म क्यों करूंगी? मैंने उनसे कहा कि वह मुझे ध्यान में रखकर दोबारा रोल और स्क्रिप्ट लिखकर लाएं, तो मैं सोचूंगी. दो तीन हफ्ते बाद रोल को सॉफ्ट करके उन्होंने मुझे सुनाया, तो मुझे लगा कि किरदार में तो कुछ दम ही नहीं रह गया. तब मुझे लगा कि मैंने अच्छी खासी चीज को गड़बड़ कर दिया. और मैंने उनसे कहा कि मैं फिल्म करूंगी, तो पुरानी स्क्रिप्ट वाली. फिर डायरेक्टर से कई दिन बातचीत के बाद मुझे लगा कि यह जो स्क्रिप्ट है, इसके जो पात्र हैं, अगर इन्हें मैंने और माधुरी ने मिलकर अच्छे ढंग से निभाया, तो फिल्म की बात कुछ और हो जाएगी.

क्या आपको लगता है कि आपके फैन्स नेगेटिव रोल में आपको पसंद करेंगे?
मझे भी ऐसा ही लगा था कि लोग मुझ पर हंसेगे और मेरा मजाक उड़ाएंगे. लेकिन जब सौमिक ने मुझे कैरेक्टर को विस्तार से समझाया तो मेरा विश्वास बढ़ा. मेरा इतना दावा है कि लोग पहली बार एक अलग तरह के विलेन को पर्दे पर देखेंगें.

नेगेटिव कैरेक्टर काफी पसंद किए जाते हैं क्या इसी वजह से आपने यह रोल चुना?
मुझे रज्जो का किरदार तो ऑफर हुआ नहीं था. रज्जो के किरदार का ऑफर तो माधुरी दीक्षित को मिला था. मुझे जो ऑफर हुआ, वही मैंने निभाया. इसमें किसी पर भी भारी पड़ने की बात नहीं है. सच कहूं तो मुझे डर लग रहा था कि लोग मुझे पसंद करेंगे या नहीं. लेकिन मुझे खुशी है कि ट्रेलर आने के बाद लोग मुझे पसंद कर रहे हैं. मुझे तो यह डर सता रहा था कि लोग कहीं यह न कहें कि यह किस तरह का डायलॉग बोल रही है?

पॉलिटिशियन का रोल निभाना किस तरह का अनुभव रहा?
आसान तो नहीं रहा क्योंकि इस तरह का कैरेक्टर इससे पहले मैंने कभी निभाया ही नहीं था. इसके लिए मैने कई महिला नेताओं से प्रेरणा ली. उन्हें बारीकी से ऑब्जर्व कर उनके मैनेरिज्म को अपनाने का प्रयास किया है. सौमिक की मदद से मैं अपने किरदार को निभा पाई.

सौमिक की पहली फिल्म है, आप ने उन पर एकदम से भरोसा कैसे कर लिया?
सौमिक ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी है. इसके डायलॉग लिखे हैं. इस फिल्म को संगीत से भी संवारा हैं. इसके अलावा उन्हें फिल्मों की बहुत अच्छी जानकारी है. अब ऐसा इन्सान अच्छा डायरेक्टर न हो, यह तो हो ही नहीं सकता. उन्होंने नारी सशक्तीकरण को लेकर काफी रिसर्च की है.

माधुरी के साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
माधुरी बेस्ट को-एक्टर हैं. वंडरफुल एक्सपीरियंस रहा.

लोग माधुरी से आपकी तुलना करेंगे ?
कोई तुलना नहीं होगी. मैं तो यहां विलेन हूं. मुझे इस फिल्म में डांस नहीं करना था.

इन दिनों भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आंदोलन के जरिए यानी कि बिना हथियार के लड़ाई हो रही है जबकि गुलाब गैंग में डंडा नजर आ रहा है?
हम अपनी फिल्म में दिखा रहे हैं कि सिस्टम से लड़ने के लिए आपको सिस्टम में जाना पड़ेगा.

अब आप किस हिसाब से फिल्में चुनती हैं?
मुझे अच्छी फिल्मों का हिस्सा बनना है. मैं यह नहीं देखती कि फिल्म में मैं हीरोइन हूं या नहीं.

आपके पसंदीदा डायरेक्टर कौन हैं?
यश चोपड़ा, अजीज मिर्जा, महेश भट्ट जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम करते हुए मैंने हमेशा इन्जॉय किया.

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