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भंसाली का पीछा छोड़ने करे तैयार नहीं करणी सेना, अब लेगी PR फर्म की मदद

संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावती' की हर चाल पर करणी सेना की नजर होगी. 2006 में करणी सेना का संगठन बना था. अब इस ग्रुप ने एक पीआर फर्म भी हायर कर लिया है.

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फिल्म के सीन में दीपिका पादुकोण फिल्म के सीन में दीपिका पादुकोण

संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावती' की हर चाल पर करणी सेना की नजर होगी. 2006 में करणी सेना का संगठन बना था. अब इस ग्रुप ने एक पीआर फर्म भी हायर कर लिया है. इसका मकसद पद्मावती के खिलाफ प्रोटेस्ट बताया जा रहा है. करणी सेना का आरोप है कि भंसाली की फिल्म में इतिहास को लेकर गलत तथ्य हैं.

करणी सेना के लोकेंद्र सिंह कलवी पूर देश में घूम-घूम कर फिल्म का विरोध कर रहे हैं. करणी सेना को इस काम के लिए खुद पर गर्व है. मीडिया इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ये संगठन अपनी कम्यूनिटी के लोगों को विवाद में जोड़ने का काम कर रहा है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर काफी एक्ट‍िव नजर आने वाला ये संगठन अब एक पीआर कंपनी के जरिए फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का माहौल बनाएगी. फिल्म के खिलाफ विरोध करने का ये तरीका करणी सेना को कैसे सूझा ये तो नहीं पता, लेकिन इससे भंसाली और फिल्म के निर्माताओं की मुश्क‍िलें बढ़ सकती हैं. 

बीजेपी सीएम खट्टर की राह अलग

उधर, पद्मावती पर जारी राजनीतिक घमासान के बीच बीजेपी के एक दूसरे सीएम मनोहरलाल खट्टर ने अलग राह पकड़ ली है. एक मामले में तो उनकी राय यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से ठीक उलट है. हरियाणा में फिल्म बैन करने की मांग पर कहा, 'सेंसर से क्लियरेंस से पहले किसी फिल्म को बैन करना ठीक नहीं होगा.' खट्टर ने सिर काटने पर इनाम की घोषणा करने वालों से जवाब मांगने की भी बात कही.

हरियाणा कैबिनेट के दो मंत्रियों की मांग पर बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खट्टर ने कहा, 'पद्मावती को लेकर हम सेंसर बोर्ड के क्लियरेंस के बाद ही कोई फैसला लेंगे. लेकिन फिल्म के नाम पर जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं है. किसी को भी ऐसा करने का हक़ नहीं है.'  उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि सेंसर बोर्ड की ओर से क्लियरेंस से पहले किसी फिल्म को बैन करना ठीक नहीं है.' दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली का सिर काटने पर 10 करोड़ इनाम देने वाले बीजेपी नेता के बयान को खट्टर ने निजी राय बताया. उन्होंने कहा, 'ये उनकी निजी राय है. सरकार का इससे कोई मतलब नहीं है. हम उन्हें बयान के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे.'

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दूसरी ओर फिल्म पर बढ़ते विवाद के मद्देनजर संसदीय कमिटी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है. संसदीय कमिटी के अध्यक्ष भगत सिंह कोश्यारी ने इस मामले पर नोटिस जारी किया है.

पद्मावती फिल्म के खिलाफ राजपूत समाज, नेताओं, क्षत्रिय संगठनों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के बाद फिल्म की रिलीज डेट पहले ही टल चुकी है. सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा था कि फिल्म की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सर्टिफिकेट देने में 68 दिन लग सकते हैं.

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