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वो गायक जिसने मंदिर आंदोलन को संगीत दिए और सुर

राम की भी बात करते हैं जो धर्म के मापदंडों से परे हर एक के दिल में बसता है, रग - रग में बसता है, कभी ईश्वर के रूप में तो कभी अल्लाह के.

रवींद्र जैन रवींद्र जैन

अयोध्या मुद्दे पर सालों के इंतजार के बाद फैसला आने वाला है, पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने हित में फैसला लाने के लिए पूरी ज़ोर लगा चुके हैं, मगर किसी के लिए भी ये सोच पाना मुमकिन नहीं है कि फैसला क्या होगा. चाहें जो भी हो, आस्था का रंग लोगों पर चढ़ा हुआ है, जब हम बात करते हैं राम की तो हम सिर्फ उस राम की बात नहीं करते जो लोगों के बीच एक मुद्दे का विषय बन गया है, हम उस राम की भी बात करते हैं जो धर्म के मापदंडों से परे हर एक के दिल में बसता है, रग - रग में बसता है, कभी ईश्वर के रूप में तो कभी अल्लाह के.

बॉलीवुड में शुरुआत से ही धर्म के नाम पर फिल्में बनाने की प्रथा चलती आई है मगर इसमें कोई दोराय नहीं है कि रामानंद सागर की रामायण से ज्यादा लोकप्रियता किसी और धार्मिक फिल्म या सीरियल को नहीं मिली. स्क्रिप्ट से लेकर किरदार, डायलॉग्स से लेकर संगीत, सीरियल को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया. रामायण का संगीत उसकी जान रहा है, और इसमें जान फूंकने का ये काम किया था संगीतकार रवीन्द्र जैन ने. उनके लिखे, गाए गीतों ने वो मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई.

रवीन्द्र जैन ने रामायण सीरियल का म्यूजिक दिया था, अलग-अलग सिचुएशन के हिसाब से उन्होंने शानदार संगीत दिया. चाहें चौपाइयां हों या भजन या दोहे, रवीन्द्र ने अपने संगीत से उसे हमेशा के लिए अमर कर दिया, वो रवीन्द्र के संगीत का ही जादू था कि लव और कुश की पीड़ा हज़ार लोगों की आंखें नम कर गईं.

राम का कठिन मार्ग, हनुमान की भक्ति, लक्ष्मण की लगन, सीता मां का दुख या फिर रावण का अहंकार सभी को रवीन्द्र ने अपने संगीत और बोलों में एकाएक कर उतारा. आज भी लोग रामायण के भजनों को सुन कर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और राम नाम में रम जाते हैं. ये जादू किसी एक फैसले से कम नहीं होगा, बल्कि लोगों के मन में आस्था के दीप हमेशा जलाता रहेगा.

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