आलू की चाट का स्वाद, रंग-बिंरगे लोग, भांति-भांति के बाबा और कड़कड़ाती ठंड में संगम में डुबकी. इस सब का लुत्फ लेकर कुंभ नगरी इलाहाबाद से चार दिन बाद लौटी मॉडल-अभिनेत्री पूनम पांडे. पेश है इंडिया टुडे के एसोसिएट कॉपी एडिटर नरेंद्र सैनी से हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश:

कुंभ जाने के बारे में कैसे सोचा
कोई स्पेसिफिक वजह तो नहीं थी लेकिन मन किया चली गई. मेरी पहली फिल्म नशा भी कुछ समय में आने वाली है, सोचा भगवान और साधुओं का आशीर्वाद ही ले लें.
कोई और वजह
(हंसते हुए) मैंने सोचा महाकुंभ के मौके पर संगम में डुबकी लगाने से सारे पाप भी धुल जाएंगे...
क्या सारे पाप धुल गए
लग तो ऐसा ही रहा है...

वहां क्या-क्या देखा
वहां मौजूद लोगों को देखकर मुझे लगा कि यह लोग वाकई जीवन जीते हैं. उनकी हर बात खास है. उनमें धुन है और उसी धुन पर आगे बढ़े जा रहे हैं. मैं काशी भी गई वहां राजा-महाराजाओँ की विशाल हवेलियां देखीं. वाकई कमाल थीं.

सबसे अच्छा क्या लगा
औरतों का गीत गाना. मन करता था उस गीत-संगीत को बस सुनती ही रहूं.
क्या अच्छा नहीं लगा
गंगा को गंदा किया जाना. लोग बड़ी ही बेरहमी से फूल, फल, कपड़े और न जाने क्या-क्या गंगा में बहा रहे थे.

महाकुंभ में जाकर कैसा फील किया
मुझे लगा जीवन की यही सच्चाई है बाकी सब छलावा है.
वहां रहना और खाना-पीना कहां हुआ
बाकी लोगों की तरह मैं टैंट मे ही रही. हमारे आस-पास कई तरह के बाबा थे. एक बाबा तो दस साल से खड़े थे.