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'कालीन भैया' ने खरीदा नया घर, कहा 'आज भी नहीं भूला हूं पटना का टीन वाला मकान'

पंकज ने बताया, 'मैं और मेरी पत्नी मृदुला अपने ड्रीम हाउस में शिफ्ट हुए हैं. लेकिन मैं आज भी पटना का अपना टीन वाला कमरा नहीं भूल पाता हूं. एक रात बारिश और आंधी के चलते मेरे घर की टीन वाली छत उड़ गई थी

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पंकज त्रिपाठी अपनी पत्नी के साथ
पंकज त्रिपाठी अपनी पत्नी के साथ

अपने एक्टिंग टैलेंट से थोड़े समय में ही बड़ी पहचान बनाने वाले एक्टर पंकज त्रिपाठी ने हाल ही में मुंबई के मड आइलैंड में एक घर खरीदा है. पंकज का मानना है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के कारण ही वे इस सफलता को पूरी तरह से इंजॉय कर पा रहे हैं.

पंकज ने बताया, 'मैं और मेरी पत्नी मृदुला अपने ड्रीम हाउस में शिफ्ट हुए हैं. लेकिन मैं आज भी पटना का अपना टीन वाला कमरा नहीं भूल पाता हूं. एक रात बारिश और आंधी के चलते मेरे घर की टीन वाली छत उड़ गई थी और मैं आसमां को ताक रहा था. मेरी पत्नी बेहद इमोशनल थीं जब हम अपने ड्रीम हाउस में शिफ्ट हुए थे.' उन्होंने कहा कि पिछले साल तक मैं कोई भी रोल कर लेता था लेकिन अब मैं इस पोजीशन में हूं कि अपनी मर्जी के किरदार निभा सकता हूं.

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सप्ताह में कम से कम एक दिन स्वयं को दीजिए। हम सब के जीवन मे कुछ काम ऐसे होते है जो हमे एक नई ऊर्जा देते हैं। ऐसे गतिविधियों से जुड़िए। सकारात्मकता और रचनात्कमता के लिए ये आवश्यक है। #actors #actorslife #pankajtripathi #bollyowwod #tour #healthy #food

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ज़िन्दगी में दो रास्ते होते है। एक बहती धारा के साथ बहना और दूसरा धाराओं के साथ पंगा लेना और अपने रास्ते खुद बनाना। गैंग्स ऑफ वासेपुर के बाद मुझे बहुत ऑफर आए। उन सभी फिल्मों में मेरे हाथ मे बंदूक ही होते। लेकिन अश्विनी अय्यर जी ने मुझे पंगा लेने वाला रास्ता दिखाया। बंदूक के ठीक बाद मेरे हाथ मे चोक और डस्टर था। फ़िल्म थी नील बट्टे सन्नाटा। एक कलाकार के तौर पर अलग अलग चरित्र पर काम करना चुनौती के साथ रोमांचक भी होता है। ये मेरे लिए कलाकार के तौर पर नए रास्ते खोलने वाला था। ये पंगा था। बंदूक वाले सुल्तान कुरैशी के इमेज से पंगा। अश्विनी के साथ मिलकर हमने अगला पंगा लिया एक खुले पंख वाली बेटी के पिता के रूप में। बिट्टी के पिता नरोत्तम मिश्रा के रूप में। इस बार पंगा था एक रूढ़िवादी समाज के खिलाफ। हँसते, हंसाते बेटियों के परों को खोलना सीखाती थी ये फ़िल्म। बरेली की बर्फी थी ये। अश्विनी के साथ काम करना हमेशा से एक कलाकार के तौर पर नई उम्मीदों, नए दरवाजों को खोलने जैसा है। आप स्वयं को और बेहतर तौर पे एक्सप्लोर करते हो। आप खुद से और खुद के बनाए सीमाओं से लेते हो पंगा। उनके हर फिल्म में काम करना मेरे लिए मेरा खुद से किया हुआ एक अदृश्य करार है। और मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जब आप एक परिवार की तरह होते हैं तो हर काम संतुष्टि देता है। और जब आपका परिवार आपके साथ होता है तो जी ज़िंदगी से पंगा लेना आसान हो जाता है। इस बार हम ले रहे हैं पंगा सीधा पंगा से। हमारी अगली फिल्म 'पंगा' के रूप में। शुभकामनाएं पूरी 'पंगा' टीम को।

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उन्होंने बताया कि 'मैं शुरु से ही कल्चर और आर्ट्स में काफी दिलचस्पी रखता था. 21 साल की उम्र में मैंनै बिस्मिलाह खान के कॉन्सर्ट में जाने के लिए कई मील दूर तक साइकिल चलाई थी. हालांकि मुझे उनका म्यूजिक समझ नहीं आता था लेकिन मैं उसे बड़े ध्यान से सुनता था. ये वो दौर था जब मेरी सिनेमा में कोई दिलचस्पी नहीं थी हालांकि मुझे थियेटर काफी पसंद था. मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा जॉइन किया था और फिर बिहार थियेटर करने लौट गया था. हालांकि मुझे जल्द ही एहसास हो गया कि थियेटर में ना तो कोई भविष्य है और ना ही कोई पैसा. इसलिए मैंने मुंबई जाकर एक्टिंग करने का फैसला किया था.' गौरतलब है कि पंकज त्रिपाठी फिल्म मसान और गैंग्स ऑफ वासेपुर में अपने रोल्स के बाद लोगों के दिलों में जगह बनाना शुरु कर दिए थे.

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