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Review: भटकी कहानी, राय लक्ष्मी की जूली 2 में आखिर क्या दिखाना चाहते थे निर्देशक

फिल्म की कहानी कभी लव एंगल की तरफ जाती है कभी रिवेंज ड्रामे की तरफ तो कभी इमोशन की तरफ पहुंच जाती है. कहानी में कई सिरे हैं जो भटके हुए हैं.

फिल्म का एक सीन फिल्म का एक सीन

फिल्म का नाम: जूली 2

डायरेक्टर:  दीपक शिवदासानी

स्टार कास्ट:  राय लक्ष्मी, पंकज त्रिपाठी, रवि किशन, आदित्य श्रीवास्तव

अवधि: 2 घंटे 15  मिनट

सर्टिफिकेट: A

रेटिंग: 1.5 स्टार

2004 में डायरेक्टर दीपक शिवदासानी ने जूली बनाई थी. इस फिल्म में नेहा धूपिया मुख्य भूमिका में नजर आई थीं. अब 13 साल बाद उन्होंने जूली 2 बनाई है. क्या यह फिल्म वैसी ही बन पड़ी है जैसी 13 साल पहले नेहा की थी? इसे जानने के लिए आइए फिल्म की समीक्षा पढ़ते हैं...

कहानी

फिल्म की कहानी जूली (राय लक्ष्मी) की है. वह अपनी मां के साथ एक ऐसे परिवार में रहती है जहां उसका सौतेले पिता भी है. एक नाजायज औलाद है जिसका पता उसे बाद में चलता है. जूली ने एक्टिंग और डांस का कोर्स कर रखा है. लेकिन उसके पास काम नहीं है. जब वो काम की तलाश में जाती है तो निर्माता-निर्देशक उसे दूसरी नजर से देखते हैं. उसकी जिंदगी में अलग-अलग लोगों की एंट्री होती है. इसी दौरान वो क्रिश्चियन महिला ऐनी के पास पहुंचती है. उसे काम मिलना शुरू हो जाता है. लेकिन एक वक्त के बाद फिर उसके पास काम नहीं है. तब उसे समझौते करने पड़ते हैं. वो अलग-अलग तरीके के लोगों से मिलने की कोशिश करती है. इस दौरान बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न्स देखने को मिलते हैं. इन्हीं के साथ फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है. आखिरकार कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आता है जब जूली एक महारानी की बायोपिक फिल्म 'देवी' करने के लिए जाती है. कई सारे राज का पर्दाफ़ाश होता है. जो महारानी है उसकी डेथ होती है. उसके पति हैं पंकज त्रिपाठी. कहानी में किस तरह पंकज त्रिपाठी, रवि किशन और निशिकांत कामत की एंट्री होती है ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

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क्यों ना देखें

फिल्म की कहानी बोर करने वाली है. घिसी-पिटी कहानी है. रिवेंज ड्रामा बहुत सारे बनाए गए हैं, लेकिन जूली 2 बहुत ही कमजोर कहानी है. आपको पता होता है कि अगले पल क्या होने वाला है. थ्रिलर तो है पर ये कहीं थ्रिलर जैसी लगती नहीं है. करीब सवा दो घंटे की फिल्म 3 घंटे से भी ज्यादा बड़ी लगती है. फ़िल्म में गाने भी बड़े बड़े हैं. गानों को छोटा किया जा सकता था. एडिटिंग और चुस्त हो सकती थी. फिल्म की कहानी बेहतर बनाई जा सकती थी. लंबे लंबे शॉट्स को छोटा किया जा सकता था. कहानी पर काम किया जाना जरूरी था, जिसकी कमी फिल्म देखते साफ़ समझ आती है. राय लक्ष्मी ने हिंदी फ़िल्म में संवाद रुक-रुक कर बोला है. यह थोड़ा अटपटा है. फिल्म की कहानी कभी लव एंगल की तरफ जाती है कभी रिवेंज ड्रामे की तरफ तो कभी इमोशन की तरफ पहुंच जाती है. कहानी में कई सिरे हैं जो भटके हुए हैं.

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क्यों देखें

अगर आपको इरोटिक फिल्मों का बहुत शौक है और आपको पहली वाली जूली पसंद आई थी तो इसे देख सकते हैं. किरदारों की बात करें तो पंकज त्रिपाठी, रवि किशन का काम काफी जंचा है. राय लक्ष्मी और निशिकांत का भी काम ठीक-ठाक है. रति अग्निहोत्री ने बढ़िया काम किया है. एक्टिंग के लिहाज से फिल्म ठीक है. लेकिन कहानी बोरिंग है. लोग ऐसी फिल्म क्यों पैसे लगाकर देखने जाएंगे ये सोचने वाली बात है. फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट मिला है. अगर आप एडल्ट हैं तो ही थियेटर में फिल्म देखने जाए. या टीवी पर फिल्म के आने का इंतज़ार करें.

बजट

बजट करीब 9-10 करोड़ रुपये है. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को अपनी कमाई निकाल पाने में मुश्किल हो सकती है. फिल्म और बेहतर बनाई जा सकती थी. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म कितना कमा पाएगी, यह देख पाना मुश्किल होगा.

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