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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मिस इंग्लैंड ने उतारा ताज, करेंगी लोगों की सेवा

भाषा ने मिस इंग्लैंड का अपना ताज उतारकर कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों का इलाज करने के लिए डॉक्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालने का फैसला लिया है.

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भाषा मुखर्जी
भाषा मुखर्जी

पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है. हर कोई कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहा है. बॉलीवुड स्टार्स ने भी अपने-अपने स्तर पर मदद करने का ऐलान किया है. इसी बीच खबरें हैं कि 2019 में मिस इंग्लैंड बनी भारतीय मूल की भाषा मुखर्जी ने खिताब छोड़ अपना करियर डॉक्टर के तौर पर जारी रखने का फैसला लिया है.

उन्होंने मिस इंग्लैंड का अपना ताज उतारकर कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों का इलाज करने के लिए डॉक्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालने का फैसला लिया है. भाषा ने ये सुनिश्चित कर लिया है कि कोरोना वायरस महामारी के संकट में वो डॉक्टर होने का फर्ज निभाएंगी.

बता दें कि डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक भाषा मुखर्जी के पास दो मेडिकल डिग्रियां हैं. एक डिग्री मेडिकल साइंस में है और दूसरी मेडिसिन एंड सर्जरी में. भाषा का आईक्यू लेवल 146 है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भाषा की 5 अलग-अलग भाषाओं में अच्छी कमांड है.

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भारत में जन्मीं भाषा मुखर्जी

बता दें कि भाषा मुखर्जी का जन्म भारत में हुआ था. बचपन में ही वो अपने परिवार के साथ ब्रिटेन में शिफ्ट हो गई थीं. डॉक्टर से मिस इंग्लैंड बनने की जर्नी के बारे में बात करते हुए भाषा ने कहा था, 'मेरे ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने के सफर की शुरुआत उस समय हुई जब मैं अपनी पढ़ाई के बीच में थी. मुझे इसे करने के लिए खुद को बहुत तैयर करना पड़ा. लेकिन आखिर में मैंने ये करने का फैसला लिया. मैंने अपनी पढ़ाई को बैलेंस करके थोड़ा ब्रेक लिया.'

मिस इंग्लैंड का खिताब जीतने के बाद भाषा मुखर्जी को कई देशों में चैरिटी के लिए इनवाइट किया गया. इसी लिए वो भारत भी आई थीं.

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