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सलमान खान बने बॉलीवुड में फार्मूला नंबर वन

हड्डी तोड़ एक्शन, गुदगुदाने वाला मजाक, हर किसी की जुबां पर चढ़ जाने वाले गीत और तालियां लूटने वाले संवाद. इस खान की फिल्में उस हीरो को वापस ले आई हैं जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं.

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सलमान खान सलमान खान

साल के शुरू में सलमान खान के पटियाला के बारादरी होटल पहुंचने से पहले ही जिम के सामान से भरे दो ट्रक वहां पहुंच गए थे. वे बॉडीगार्ड की शूटिंग कर रहे थे, जिसने बॉलीवुड में सबसे जल्दी 100 करोड़ रु. कमाए हैं, और जिसने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर पहले हफ्ते 110 करोड़ रु. कमाए हैं.

फिल्म के अंत में आने वाले बिना कमीज के शॉट के लिए सलमान पखवाड़े भर तक ट्राइजेमिनल न्यूरेलजिया के नाम से जानी जाती नस संबंधी गड़बड़ी से जूझ्ते हुए सुबह 7 से 9 और रात को शूटिंग के बाद 8 से 11 बजे तक वर्क आउट करते रहे.

वे रोजाना 2,000 एबडॉमिनल क्रंचेस (पेट को बल देने वाली कसरत) करते, जहां एक्शन होना था उस किले तक जाते और शूट के बीच में 5-6 किमी की दौड़ लगाते.

बाजुओं की 17.5 इंच की गुठलियां (बाइसेप्स), 30 इंच की कमर और 42 इंच का सीना बनाए रखना आसान काम नहीं है लेकिन सलमान जानते हैं कि दर्शक कमीज उतरती देखना चाहते हैं. और जो वे चाहते हैं, वही वे करेंगे.

एक्शन से भरपूर पटकथा, प्रतीकात्मक संवादों से भरी-पूरी (''मैं मारता कम हूं और घसीटता ज्‍यादा हूं''), आसानी से नकल किए जाने वाले डांस स्टेप, और एकदम खरा नायकत्व, सलमान का मौजूदा फॉर्मूला इस समय बॉक्स ऑफिस पर नंबर वन है.

सितंबर, 2010 में, दबंग ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 143 करोड़ रु. कमाए थे और जून, 2011 में रेडी ने 103 करोड़ रु. की कमाई की. खान की बॉडीगार्ड ने ब्रिटेन में शुरू में ही 1,93,000 पौंड (1.4 करोड़ रु.) कमाए. यह इलाका रोमांटिक फिल्मों को पसंद करने वाले के तौर पर जाना जाता है. अमेरिका में इसने पहले छह दिनों में 14 लाख डॉलर (6.4 करोड़ रु.) कमाए हैं.

शब्दों का कमाल, उनके संवाद बोलने में आसान और भूलने के लिए काफी मुश्किल होते हैं

वांटेड, 2009: एक बार मैंने कमिटमेंट कर ली तो फिर मैं अपने आप की भी नहीं सुनता.

मैं शराब और खून अपनी मर्जी से पीता हूं, दबाके.

दबंग,  2010: हम तुममें इतने छेद करेंगे कि कन्फ्यूज हो जाओगे कि सांस कहां से लें और पादे कहां से.

मैं आगे और पीछे दोनों देख सकता हूं.

रेडी,  जून 2011: जिदगी में तीन चीज कभी अंडरएस्टीमेट नहीं करनाः आइ, मी और मायसेल्फ.

मैं माडर्न जमाने का कुत्ता हूं...वाउ वाउ वाउ.

बॉडीगार्ड,  अगस्त 2011: मुझपे एक एहसान करना कि मुझपे कोई एहसान ना करना.

मैं मारता कम हूं और घसीटता ज्‍यादा हूं.

 

अमेरिका के न्यूजर्सी में एक जटिल ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे सलमान को डॉक्टरों ने उनकी अगली फिल्म एक था टाइगर पर काम शुरू करने की इजाजत दे दी है. यह फिल्म एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी ड्रामा है जिसके लिए यशराज फिल्म्स ने उन्हें 32 करोड़ रु. का भुगतान किया है.

वे आइएसआइ की जासूस बनीं कैटरीना कैफ के मुकाबले रॉ के एजेंट बने हैं. दोनों ही गुप्त रूप से काम करते हैं और उम्मीद के मुताबिक प्रेम पाश में फंस जाते हैं, और आखिर में एक अनाम स्थान पर जाकर शांति से सुखी जीवन बिताते हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान को युद्ध के कगार पर पहुंचने से बचाए बगैर नहीं.

शूटिंग के लिए ये दोनों पूर्व प्रेमी डबलिन, इस्तंबूल और क्यूबा जाएंगे. बेशक यह सलमान के लिए एक बदल है, लेकिन उन्होंने यह इंतजाम जरूर करवा लिया कि गुजरे साल में उनके लिए काम करने वाला मसाला इसमें भी बरकरार रहेः एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और कम-से-कम ''पांच झकास गाने.'' इनमें से कई तो उनकी खुद की देन हैं, ऐसा कहना है लंबे समय से दोस्त और फिल्म वितरक 73 वर्षीय जे.पी. चोकसी का, जिन्हें खान ''अंकल'' कहते हैं.

सलमान कई लाइनें खुद ही लिखते हैं, उनमें से एक दबंग की है हम तुम में इतने छेद करेंगे कि कन्फ्यूज हो जाओगे कि सांस कहां से लें और पादें कहां से.

वे अक्सर अपना संगीत खुद तैयार करते हैं जैसे बॉडीगार्ड में तेरी मेरी, जिसके बारे में चोकसी कहते हैं कि इसे उनको उन्होंने संगीतकार हिमेश रेशमिया के पास गुनगुनाते हुए सुना था. और हां, पेट में बल डाल देने वाले चुटकले जिनमें से कई तो बहुत ज्‍यादा नादानी भरे होते हैं. जरा गौर फरमाएं: ''तो क्या बम को रम बोलूं? ड्रम बोलूं? च्युइंग गम बोलूं...?''

क्या ये आम आदमी को छूने वाली बातें हैं जो सलमान के लिए काम कर जाती हैं, और जिसे उन्होंने अपने 23 साल के लंबे कॅरियर में बनाए रखा है. किसी भी समय मुंबई के बांद्रा के गैलक्सी अपार्टमेंट स्थित उनके घर के बाहर कम-से-कम 50 लोग खड़े मिल ही जाएंगे, जिन्हें मदद की दरकार होती है.

ग्राउंड फ्लोर पर उनके एक बेडरूम वाले अपार्टमेंट में कागज भेजे जाते हैं, पैसे या आश्वासन उन्हें भेज दिया जाता है. सलमान अपनी फिल्मों में साधारण कपड़े पहनने पर जोर देते हैं, जिनकी आसानी से नकल की जा सकती है. वे कहते हैं, ''मेरी कोशिश रहती है कि पूरी फिल्म में मैं एक जोडी जूता ही पहनूं. नहीं तो बच्चे अपने मां-बाप को और अधिक देने के लिए सताने लगेंगे.''

हीरो के तौर पर उनके सांचे को उनकी पहली ब्लॉकबस्टर्स सूरज बड़जात्या की मैंने प्यार किया (1989) ने स्थापित किया, एक अच्छा बेटा प्रेम और उन्हें इस छवि को तोड़ने की कोई वजह  नजर नहीं आती. वे कहते हैं, ''मां-बाप आप जैसा बेटा चाहें, युवा चाहें कि वे आप जैसे बनें, बच्चे आपको आदर्श मानें.'' और हर कोई उनके जैसा भाई जान चाहता है, जो मुश्किल में उनकी मदद करे. जब वे यह नहीं कर रहे थे, यानी जब वे 2009 में विपुल शाह की लंदन ड्रीम्स में वे नशे की लत के शिकार प्रतिभाशाली संगीतकार बने थे या 2008 में सुभाष घई की युवराज में बदला लेने वाले भाई बने थे तो फिल्में बेतरह नाकाम रही थीं.

वांटेड में कामयाबी का स्वाद चखने के बावजूद वे सफलता के फॉर्मूले पर नहीं पहुंचे. 2009 में वांटेड और 2010 में दबंग के बीच तीन बड़े झ्टके भी मिले-मैं और मिसेज खन्ना, लंदन ड्रीम्स और एक बड़ी फ्लॉप वीर.

उनके जादू का और भी गहन विश्लेषण है, सलमान जोशीली मर्दानगी का नुमाइंदगी करते हैं जो भारतीय पुरुषों में अब खत्म हो रही है लेकिन जिसे वे हासिल करना चाहते हैं. वे कुंवारे हैं, और उनकी सुंदर गर्लफ्रेंड्स की लंबी कतार है. वे ग्रामीण गतिशीलता को शहरी विचारों के साथ मिलाते हैं. कुछ ऐसा जो गोविंदा या मिठुन चक्रवर्ती कभी नहीं कर सके. यह विविधता छोटे शहर की उनकी जड़ों (उनका जन्म इंदौर में हुआ और जब तक वे नियमित रूप से स्कूल जाने वाली स्थिति में नहीं आए उनकी गर्मियां वहीं गुजरतीं) और बॉलीवुड के सफलतम पटकथा लेखक सलीम खान के बेटे तौर पर आती है.

समाजशास्त्री संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग गांवों से शहरों का रुख कर रहे हैं, वे इसे आदर्श के रूप में लेते हैं. यहां तक कि उनकी मालमत्ता भी जनता की नजर में बहुत नहीं आती. पनवेल में 150 एकड़ का उनका फार्महाउस,  जिसमें स्विमिंग पूल, तीन बंगले और अत्याधुनिक जिम है.

सलमान की बाहर से आया-कामयाब हुआ वाली छवि ने उन्हें अपने चरित्र गढ़ने में मदद दी है, जैसे राधे, चुलबुल पांडे और लवली सिंह. फिल्म स्कॉलर रशेल ड्वायर कहती हैं कि वे सामान्य और खास दोनों ही हैं; भारतीय हैं, एनआरआइ नहीं;  परिवार, दोस्तों और काम करने वालों के प्रति ईमानदार, और अंदाज में पूरी तरह से भारतीय, वे भड़कीले नव-शहरी जैसे कपड़े पहनते हैं, कान में बुंदे और ब्रेसलेट सहित.

 ऐसे उद्योग जहां उनके समकालीन खुद को युवा के तौर पर पेश करना चाहते हैं, वे कोई बहाना नहीं करते. उनके करीने से काढ़े गए बाल दुबई के एक डॉक्टर की देन हैं जिसका नंबर वे सभी के साझा करते रहते हैं, उनका शरीर नियमित रूप से की जाने वाली कड़ी मेहनत का नतीजा है.

फिर बारी आती है जबरदस्त एक्शन की. वांटेड, दबंग और बॉडीगार्ड के एक्शन दृश्य निर्देशित किए हैं 480 तमिल फिल्मों के तजुर्बे वाले फाइट मास्टर विजयन ने. 54 वर्षीय विजयन का कहना है कि सलमान की खासियत यह है कि वे निर्देशक और खुद पर बहुत भरोसा करते हैं. ''वे एक भी सवाल नहीं पूछेंगे, जबकि उनके आसपास के लोग चिंतित हो सकते हैं. वे सेट पर पहुंचेंगे और 80 फुट ऊपर से आराम से छलांग लगा देंगे.'' वे तब भी शिकायत नहीं करते जब दृश्य 12वें या 13वें टेक में पहुंच जाता है, वे आखिरी टेक भी उसी ऊर्जा के साथ करते हैं, जैसे पहला टेक.

वे 70-80 के दशक के वेतनभोगी वर्ग के कुछ नई शरारतें समेटे हुए नायक हैं. अक्सर गंभीर एक्शन दृश्य के बीच कॉमेडी का पुट होता है-बॉडीगार्ड में विपक्षी उन पर बेलचे का प्रयोग करता है और वे दर्द से अपनी कमर को मसलते हैं और दबंग में गुंडे को सबक सिखाने से पहले उसकी मां का फोन सुनने देना. वे अपने आसपास के लोगों को देखते हैं और साधारण चीजों को याद रखते हैं: उन्होंने बॉडीगार्ड में उन लोगों जैसी चाल अपनाई जिन्होंने हाल ही में जिम में कदम रखा होता है और उन्होंने पटियाला शूट के दौरान एक कैमरामैन के बाइसेप डांस को भी चुना.

वे कहते हैं, ''अधिकतर चीजें जो मैं करता हूं, वह वास्तविक जीवन से ली गई होती हैं. इसमें कुछ ओरिजिनल नहीं है.'' जैसा साथी कलाकार इमरान खान कहते हैं, ''वे हमेशा ही सलमान खान रहेंगे.'' उनके सबसे बड़े आलोचक सलीम खान का मानना है कि वे काफी समझ्दार हो चुके हैं. वे कहते हैं, ''वे हमेशा से प्रतिभावान थे. उनमें सिर्फ अनुशासन की कमी थी. और यही वह बात है जो सचिन तेंडुलकर को विनोद कांबली से अलग करती है.'' सलमान अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां लोग उन्हें ध्यान में रखकर कहानी लिखना चाहते हैं.''

उन्होंने सयानी बिजनेस समझ भी दिखाई है, वे एक प्रायोजन से 10 करोड़ रु. कमा रहे हैं-वे सात ब्रांडों को प्रायोजित कर रहे हैं, जिसमें हिस्ट्री चैनल भी शामिल है जो चाहता है कि वे हिस्ट्री ''हटके'' पेश करें. उनकी बिइंग ह्यूमन टी-शर्टें भारत में सबसे ज्‍यादा नकल की जाने वाली हैं.

मंधाना टेक्सटाइल्स उनके लिए ब्रांडिंग क्लोदिंग लाइन तैयार करने को 100 करोड़ रु. का निवेश कर रहा है जबकि फाउंडेशन के फेसबुक पेज पर पांच लाख से ज्‍यादा फॉलोअर हैं. कलर्स पर बिग बॉस का एक और सीजन है, जिसमें उनके दोस्त संजय दत्त उनके साथी प्रस्तोता हैं. फिल्मों का कारोबार और बढ़ ही सकता है. भारत परदों के मामले में एक पिछड़ा हुआ बाजार है. यहां दस लाख लोगों पर सिर्फ एक सिनेमा स्क्रीन है जबकि फ्रांस में यह आंकड़ा 77 का है और अमेरिका में 117 का. संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के मुताबिक, भारत जैसी जनसंख्या वाले देश के लिए कम से कम 1,00,000 सिनेमा स्क्रीनों की जरूरत है जबकि यहां सिर्फ 10,000 हैं,

प्रशंसक उन्हें दिलो-जान से चाहते हैं. इनमें मुंबई की एक फर्म में 25 वर्षीय मैनेजमेंट कंसल्टेंट बहरुल इस्लाम भी शामिल हैं जो अपनी दीवार पर मैंने प्यार किया के पोस्टर के साथ बड़े हुए हैं. ''मैं मुश्किलों से निकलने की उनकी काबिलियत का कायल हूं क्योंकि मैं उनमें खुद को देखता हूं.'' या ये दिल्ली के ऑटोरिक्शा चालक 32 वर्षीय राम कुमार तिवारी हो सकते हैं, जो सलमान की फिल्में इसलिए देखते हैं क्योंकि उनमें थोड़ा-थोड़ा सब कुछ होता है. क्षेत्रीय सिनेमा और टिकट की बढ़ती कीमतों के कारण बंटे बाजार के दौर में, वे जोड़ने की एक जबरदस्त ताकत हैं. वे ऐसे खान हैं जो कुछ भी गलत नहीं कर सकता.
-साथ में शिल्पा रत्नम

फॉर्मूला नंबर दो
रोमांटिक कॉमेडी

ये अमेरिकी स्टाइल है, जिसमें एक तेज-तर्रार आत्मनिर्भर लड़की किसी ढीले-ढाले आलसी नौजवान से मिलती है. लड़की को पता है कि उसे क्या चाहिए. लड़के को ये भी नहीं मालूम कि वह लड़की को चाहता है. याद करिए बैंड बाजा बारात और आई हेट लव स्टोरीज. लड़की सुंदर, आकर्षक कपड़े पहनती है, लड़का शाहरुख खान की तरह ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड की वादियों में सिर्फ बांहें फैला रहा है. लड़की का समझ्दार पिता है और लड़के की प्यारी-सी मां. बैंड बाजा बारात के निर्देशक मनीष शर्मा कहते हैं, ''जब किसी कहानी को नए और रोचक अंदाज में पेश किया जाता है, तभी लोग उसे पसंद करते हैं. जैसा बैंड बाजा बारात फिल्म का नयापन और ताजगी भरा था प्रेम बनाम कॅरियर का सवाल.'' रोमांटिक कॉमेडी लड़का-लड़की के बीच संघर्ष और द्वंद्व का सबसे सटीक पैमाना है. दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और उसके बाद जब वी मेट के नएपन और ताजगी से दर्शक उसके साथ जुड़ सके.

खासियत

एक खूबसूरत, आकर्षक युवा जोड़ी. याद करिए ब्रेक के बाद में इमरान खान और दीपिका पादुकोण. फिल्म में बेहद मुश्किल मोड़ पर बहुत भावुक संवाद है. याद करिए तनु वेड्स मनु के अंत में जिम्मी शेरगिल का डायलॉग और याद करिए अनजाना-अनजानी में एयरपोर्ट के लिए भागती प्रियंका चोपड़ा.

बारी इमरान की
कभी सैफ अली खान के जलवे थे (याद करिए सलाम नमस्ते और हम-तुम). अब इमरान खान की बारी है. बॉलीवुड में इस स्टाइल की फिल्में बनाने वाले ज्यादातर निर्देशक उनके दोस्त हैं, जैसे अली अब्बास जफर और शकुन बत्रा.

जल्द देखेंगे

शकुन बत्रा की पहली फिल्म एक मैं और एक तू  में इमरान खान, करीना कपूर को

फॉर्मूला नंबर तीन

मसालेदार किस्से

हर किसी को मसालेदार घटनाओं पर बनी फिल्में जैसे नो वन किल्ड जेसिका, वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई और द डर्टी पिक्चर भाती हैं. इनके लेखक रजत अरोड़ा से पूछे, ''लोगों को ज्यादा मजा आता है, जब उन्हें पता हो कि वाकई ऐसा हो चुका है.'' मुकेश और महेश भट्ट जिन्होंने कोई सनसनीखेज सच्ची घटना नहीं छोड़ी, जन्नत में क्रिकेट सट्टा या शोबिज में मीडिया का चेहरा दिखाना. मधुर भंडारकर जो फैशन, जेल, कॉर्पोरव्ट बना चुके हैं.

खासियत

औरतों की दमदार भूमिका. वे शराब, सिगरेट पीती हैं, गालियां देती हैं और सेक्स भी करती हैं.

जल्द देखेंगे

मिलन लूथरिया की डर्टी पिक्चर में विद्या बालन को सेक्स सायरन सिल्क स्मिता के रोल में

सौभाग्य प्रतीक

इमरान हाशमी. अगर कोई लड़की सेक्स करना चाहती है तब वह इमरान हाशमी के साथ ही होगा. वे चुंबन सरताज हैं. चुंबनों से लबालब उनकी मर्डर-2 ने 28 करोड़ रु. की कमाई की.

फॉर्मूला नंबर चार

ब्रांड एंबेसेडर

कल्कि केकलन बुरी लड़की और लड़के वाली फिल्मों का प्रतीक बन गई हैं. साथ ही वे इस स्याह अंधेरे सिनेमा के स्याह सरताज अनुराग कश्यप की पत्नी भी हैं, जो इन फिल्मों के निर्माता, निर्देशक और इनकी प्रमुख प्रेरणा भी हैं.

जल्द देखेंगे

रिभु दास गुप्ता की साइकोलॉजिकल थ्रिलर माइकेल में नसीरुद्दीन शाह हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर रोल रचे जाते हैं.

गंभीर विषय

ये फिल्में उन अंधेरे कोनों में जाती हैं, जहां बड़े बजट और ढेर सारे सितारों से सजी फिल्में नहीं जाया करतीं.

जैसे दैट गर्ल इन ए यैलो बूट्स के मसाज पार्लर में या शैतान के ड्रग्स के धंधे के अंधेरे कोनों में या दिबाकर बनर्जी की लव सेक्स और धोखा के ग्रॉसरी स्टोर में. दैट गर्ल इन ए यैलो बूट्स के सह निर्माता और गैंग्स ऑफ वसईपुर के निर्माता गुनीत मोंगा कहते हैं कि ये फिल्में दर्शकों के दिमाग को इस कदर हिलाकर रख देती हैं कि वे सिर्फ पॉपकॉर्न खाने के बजाए इस पर बहस करें.

खासियत दहलाने और चोट करने वाले दृश्य, जटिल चरित्र और मुश्किल अदाकारी. इन फिल्मों का पूरा बजट किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के पांच गानों के बजट के बराबर होता है. कम बजट वाली ये फिल्में परिवार की त्रासदियों और पीड़ाओं की अभिव्यक्ति में बेहद ऊंची होती हैं.

फॉर्मूला नंबर पांच

फूहड़ कॉमेडी

ऐसे चुटकुले, जो अक्सर बेडरुम या टॉयलेट से आगे नहीं जा पाते. खूबसूरत हसीना दो या कभी-कभार तीन 40 साल के बुड्ढों के बीच सैंडविच बनती रहती है. अतिसक्रिय कामुकता और कम इस्तेमाल किए गए दिमाग. ऐसी फिल्मों में अक्सर भीड़भाड़ होती है, जिसमें तुषार कपूर, अरशद वारसी और श्रेयस तलपदे जैसे कलाकर खाली जगह  भरने का काम करते हैं.

खासियत

भद्दी, हवा छोड़ना और दनादन बरसने वाले फूहड़ अश्लील चुटकुले.

जल्द देखेंगे

ऐसी फिल्मों के मास्टर डेविड धवन की रास्कल्स में संजय दत्त, अजय देवगन और कंगना रानौत हैं.

जाना-माना चेहराऐसी फिल्मों का सफर गोविंदा ने जहां छोड़ा था, वहां से शुरू किया अक्षय कुमार ने और फिर थैंक यू, हाउसफुल और सिंह इज किंग जैसी फिल्में की.

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