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रुपहले पर्दे पर फिर दिखेगा मुंबई में उत्तर भारतीयों का संघर्ष

कमाल खान निर्देशित फिल्म ‘देशद्रोही’ के बाद महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों लोगों के संघर्ष पर आधारित एक और फिल्म ‘332 मुंबई टू इंडिया’ रुपहले पर्दे पर जल्द ही दर्शकों के लिए नमूदार होने वाली है.

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कमाल खान निर्देशित फिल्म ‘देशद्रोही’ के बाद महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के संघर्ष पर आधारित एक और फिल्म ‘332 मुंबई टू इंडिया’ रुपहले पर्दे पर जल्द ही दर्शकों के लिए नमूदार होने वाली है.

‘332 मुंबई टू इंडिया’ मुंबई में उत्तर भारतीय बनाम मराठी विवाद को एक आम आदमी के नजरिए को निरुपित करने वाली फिल्म है. इस फिल्म में आम आदमी सुबह से लेकर शाम तक रोजगार की लड़ाई लड़ता है. फिल्म के निर्माता संगीत सिवन और निर्देशक महेश पांडेय हैं. पांडेय का कहना है कि एक आदमी कभी भी भाषा की लड़ाई नहीं लड़ सकता, क्योंकि उसे हमेशा रोजी-रोटी की चिंता लगी रहती है.

फिल्म का कथानक पटना के युवक राहुल राज के इर्द गिर्द घूमता है जो मुंबई के कुर्ला इलाके में ‘बेस्ट’ की बस संख्या 332 को कथित तौर पर हाइजैक करने के प्रयास में 27 अक्तूबर 2008 को पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया था. इस घटना के बाद काफी विवाद हुआ था. पांडेय ने इस प्रकरण और विवाद के बाद मुंबई के बदले माहौल की प्रेरणा से फिल्म का निर्माण किया है.

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यह फिल्म इस साल तीन दिसंबर को भारत और दुनिया के कुछ हिस्सों में एक साथ रिलीज होगी. फिल्म के निर्माता संगीत सिवन इससे पहले ‘क्या कूल हैं हम’, ‘अपना-सपना मनी-मनी’ और ‘जोर’ जैसी फिल्मों को निर्देशित कर चुके हैं. फिल्म के निर्माता निर्देशकों ने कहा कि नेता चाहे किसी प्रदेश के हो और आम आदमी की लड़ाई लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन इस संघर्ष में नुकसान आम आदमी का ही होता है.

{mospagebreak}पांडेय और सिवन के अनुसार फिल्म ‘332 मुंबई टू इंडिया’ की कहानी एक सवाल से शुरू होती है और खत्म भी एक सवाल पर होती है. उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीय बनाम मराठी विवाद को लेकर खुद की पहचान पर सवाल खड़ा करते हुए यह फिल्म एक आम भारतीय की कहानी है. इस फिल्म में राहुल राज की भूमिका एक मराठी अभिनेता अमित रियान ने निभाई है. फिल्म में अभिनेत्री शरबनी मुखर्जी हैं.

इससे पहले कमाल खान निर्देशित मल्टीस्टारर फिल्म देशद्रोही के रिलीज को लेकर भी काफी विवाद हुआ था. यह फिल्म राज ठाकरे नीत मनसे के कार्यकताओं द्वारा उत्तर भारतीयों को पीटे जाने और उनके खिलाफ महाराष्ट्र के कई भागों में हुई हिंसा की पृष्ठभूमि पर 2008 में बनी थी.

इस फिल्म के रिलीज होने में कई अड़चनें आई थीं जिसके बाद खान को अदालत की शरण लेनी पड़ी थी. महाराष्ट्र सरकार ने इस फिल्म की रिलीज पर दो महीने का प्रतिबंध लगा दिया था.

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‘332 मुंबई टू इंडिया’ में उत्तर भारतीयों के लिए ‘भैया’ और मराठी शब्द के प्रयोग पर फिल्म सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी. हालांकि ‘देशद्रोही’ इतनी सुर्खियां बटोरने के बाद बॉक्स आफिस पर सफल नहीं हो पायी थी, लेकिन यह देखना रोचक होगा कि ‘332 मुंबई टू इंडिया’ दर्शकों को भाती है कि नहीं.

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