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पापा से पूछकर फिल्मों में किसिंग सीन देता है ये भोजपुरी एक्टर, बताई वजह

अरविंद अकेला कल्लू भोजपुरी सिनेमा के जाने माने स्टार है. लेकिन उन्हें फिल्मों में किसिंग करने के लिए पापा से परमिशन लेनी पड़ती है. है ना ये काफी अजीब और इंटरेस्टिंग बात...!

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अरविंद अकेला कल्लू
अरविंद अकेला कल्लू

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने एक्टर और सिंगर अरविंद अकेला कल्लू अपने पहले ही गाने से छा गए थे. फैन फॉलोइंग के मामले में वह किसी दूसरे स्टार से पीछे नहीं हैं. सोशल मीडिया पर भी उनके चाहने वालों की संख्या लाखों में है. उनके स्टारडम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कल्लू का गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगता है. कल्लू आज अपना 25वां जन्मदिन मना रहे हैं, ऐसे में हम आपको उनके कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में बताते हैं. 

डेब्यू गाने से बन गए सुपरस्टार
अरविंद अकेला कल्लू ने महज आठ साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था. उनका पहला गाना चोलिया के हुक राजा जी 2004 में रिलीज हुआ था. यह गाना रिलीज होने के साथ ही शादी और आर्केस्ट्रा में खूब बजता था. कल्लू इस गाने से रातोरात स्टार बन गए. इसके बाद 'चली समियाना में आज गोली', 'गवनवां कहिया ले जईबा ना', मुर्गा बेचैन बाटे, साइकिल में साइकिल लडावेली,सकेत होता राजा जी, मिस कॉल मार के, लभ के टॉनिक, गाने से अरविंद अकेला भोजपुरी सिनेमा में खुद का लोहा मनवा चुके थे. 

एक्टिंग टैलेंट के कायल हुए फैंस
कल्लू बेहतरीन सिंगर तो है ही साथ ही दमदार एक्टर भी माने जाते हैं. अरविंद अकेला ने साल 2016 में फिल्म दिलदार सजना से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, इस फिल्म ने कल्लू को फैंस के दिलों में काबिज कर दिया. इसके बाद उन्हें कई भोजपुरी फिल्मों में देखा गया. कल्लू भोजपुरी स्टार पवन सिंह को अपना गुरु मानते हैं. 

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पापा से लेनी पड़ती है परमिशन
कल्लू को फिल्मों में किस सीन करने के लिए पापा से परमिशन लेनी पड़ती है. एक इंटरव्यू में कल्लू बताते हैं कि उन्हें या पापा को कोई परहेज नहीं है, लेकिन मैं उन्हें अपना आदर्श मानता हूं, उन्होंने ही मुझे सिंगिंग या एक्टिंग के लिए बचपन से सपोर्ट किया है. कल्लू मेकर्स को साफ-साफ कह देते हैं कि, अगर उनके पिता कह देंगे तो वो सब कुछ करेंगे. 

अरविंद अकेला कल्लू की फिल्म का एक सीन

कैसे पड़ा ये नाम
अरविंद अकेला नाम सुनकर आपको अजीब लगता होगा कि सिंगर और एक्टर का ये नाम क्यों पड़ा. लेकिन इसके पीछे भी एक अजीब सी कहानी है. बचपन में अरविंद काफी अकेले रहा करते थे. इसलिए लोगों ने उनके नाम के आगे अकेला जोड़ दिया. वहीं कल्लू उनके बचपन का नाम है. जिस वजह से वो अपना पूरा नाम अरविंद अकेला कल्लू लिखते हैं.

कल्लू के पिता चुनमुन चौबे भी लोक गायक रहे हैं. वो गांव के छोटे-मोटे प्रोग्राम किया करते थे. उन्ही के साथ कल्लू भी जाया करते थे, जिससे उनका भी इंटरेस्ट इसी क्षेत्र में बनता गया. ऐसे ही एक स्टेज शो के दौरान एक्टर ने पहली बार पवन सिंह का गाना 'झुरु झुरु निमिया गछिया' भक्ति गीत गाया था. इसे गांव वालों ने खूब पसंद किया था. 
 

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