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OK Computer Review: एक मर्डर मिस्ट्री की 'अजीब' कहानी जिसमें है टेक्नोलॉजिकल सस्पेंस

भविष्य कैसा होगा? ये प्रश्न अकेले में बैठे किसी भी शख्स के दिमाग में आ सकता है. वो अपनी वैचारिक सद्बुद्धि से प्रगति के बढ़ते वेग का अंदाजा भी लगा सकता है. ऐसा ही एक अंदाजा है 'ओके कम्प्यूटर'.

वेब सीरीज ओके कम्प्यूटर वेब सीरीज ओके कम्प्यूटर
फिल्म:ओके कम्प्यूटर
3.5/5
  • कलाकार : विजय वर्मा, राधिका आप्टे, जैकी श्रॉफ, रसिका दुग्गल, विभा छिब्बर
  • निर्देशक :नील पागेदर और पूजा शेट्टी

जीवन की गतिशीलता पर हमेशा से प्रश्न उठते रहे हैं. कई सारे पर्यावरण संरक्षकों का ऐसा मानना रहा है कि टेक्नोलॉजी को ज्यादा बढ़ावा देकर हम नेचर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. जबकी आधुनिक विचारधारा वाले लोग इस तर्क से बिल्कुल भी इत्तेफाक नहीं रखते. ये कहना गलत नहीं होगा कि हमारा समाज प्रकृति के प्रति उतना संवेदनशील नहीं रहा है और यही वजह है कि वैज्ञानिक भविष्य को लेकर अभी से फिक्रमंद हैं. भविष्य कैसा होगा? ये प्रश्न अकेले में बैठे किसी भी शख्स के दिमाग में आ सकता है. वो अपनी वैचारिक सद्बुद्धि से प्रगति के बढ़ते वेग का अंदाजा भी लगा सकता है. ऐसा ही एक अंदाजा है 'ओके कम्प्यूटर'. ओके कम्प्यूटर एक ऐसी वेब सीरीज है जो प्रकृति और प्रगति दोनों में से किसी एक पक्ष के बारे में बात नहीं करती. वो दोनों के बीच के संतुलन के बारे में बात करती है. जो फिलहाल असलियत में तो दिखता नजर नहीं आ रहा. आगे का पता नहीं. 

क्या है कहानी?

इस वेब सीरीज की कहानी शुरू होती है एक मर्डर से. साल 2031 चल रहा है. जहां टेक्नोलॉजी इतनी विकसित हो गई है कि आपको धरती पर जितने इंसान नजर आएंगे कमोबेश उतने ही रोबोट भी. रोबोट में आपको जितने ज्यादा इमोशन्स नजर आएंगे शायद ही उतने ही कम इमोशन्स आप इंसानों में पाएंगे. इंसान कैसे? परेशान, हैरान, विचलित, गुस्सैल, जिनमें प्यार का आभाव दिखे, जिसमें जीवन का कोई उद्देश्य ना नजर आए, जिसमें कोई अटैचमेंट ना हो, मशीनों पर निर्भरता ऐसी कि आत्मनिर्भरता विलुप्त दिखे, जहां सुविधाएं तो अनंत हों मगर खुशहाली का नाम-ओ-निशान ना नजर आए. भविष्य के ऐसे ही एक दौर के पुलिस अफसर हैं साजन कुंडू (विजय वर्मा). साजन अपने साथियों और बॉस की नजरों में तो ज्यादा काबिल हैं नहीं मगर उन्हें इस मर्डर मिस्ट्री को सॉल्व करने का एक मौका दिया जाता है. इसमें उनका साथ देने आती हैं लक्ष्मी सूरी (राधिका आप्टे). कहने को तो लक्ष्मी, साजन की साथी हैं मगर दोनों में हमेशा वैचारिक मतभेद ही रहते हैं.

ये मर्डर मिस्ट्री एक ऐसा रोलर कोस्टर है जिसे समझ पाने में अच्छे-अच्छों का दिमाग घूम जाए, मगर कुछ समझ ना आए कि कत्ल किसका हुआ है और कातिल कौन है. बस इस मर्डर मिस्ट्री का पता लगाने के लिए जितनी रोचकता कहानी में दी जा सकती थी उतनी आपको इसमें नजर आएगी. कहानी का सफर कैसा है वो तो आपको वेब सीरीज देखने के साथ ही पता चलेगा मगर कहानी का सार अगर आपको पता चल जाए तो एक बहुत बड़ा सुधार समाज में देखने को मिल सकता है. आज 2021 चल रहा है. कहानी ज्यादा बाद की नहीं है. बस एक दशक आगे की है. मगर हमें डिसाइड ये करना है कि उस एक दशक तक पहुंचचे-पहुंचते कहीं हम टेक्नोलॉजी के बुलट में बैठकर इतने आगे ना पहुंच जाएं कि प्रकृतिक खूबसूरती कहीं पीछे छूट जाए और उसकी दास्तानें ही बचें. बाकी रोबोट के नाम पर वेब सीरीज में एक अजीब सा 'अजीब' भी है. वो कितना अजीब है ये आपको वेब सीरीज देखकर ही पता चलेगा.  

 

कैसी है वेब सीरीज- 

इस वेब सीरीज के अच्छे या बुरे होने का आकलन करने से पहले हमें इस बात का विषेश ध्यान रखना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स पर अभी तक हमारे अपने बॉलीवुड में ज्यादा काम हुआ नहीं है. तो सबसे पहले तो फिल्म के डायरेक्टर नील पागेदर और पूजा शेट्टी इस विषय पर वेब सीरीज बनाने के लिए तारीफ के काबिल हैं. वहीं इसके स्क्रिप्ट राइटर्स और लेखकों द्वारा भी इस कॉम्पलिकेटेड स्टोरी को सरल करने का प्रयत्न अच्छा है. मगर इसके बाद भी इस साइंस-फिक्शन कॉमेडी में बैलेंस जरा डगमगाया हुआ लगा. मतलब थोड़े-थोड़े समय में कुछ एक-आधे सीन्स या डायलॉग्स में आपको हंसी आएगी मगर इससे ज्यादा नहीं. डायलॉग्स की बात करें तो निसंदेह इस वेब सीरीज के डायलॉग्स रचनात्मक थे मगर उसमें ह्यूमर जरा खाली-खाली सा नजर आया. 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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एक्टिंग- 

विजय वर्मा धीरे-धीरे सफलता की गारंटी बनते जा रहे हैं. बड़ी साइलेंटली वे लोगों का दिल अपने किरदारों से जीत रहे हैं. इसमें भी उन्होंने साजन कुंडू का एक बेहद रोचक किरदार प्ले किया है. मगर वजनदार डायलॉग्स उनके अभिनय में और जान ला सकते थे. बाकी एक्सप्रेशन्स का प्रजेंटेशन जो एक्टर सीख जाए उसके अभिनय में जान अपने आप ही आ जाती है. राधकी आप्टे हमेशा की तरह शानदार नजर आईं. उनकी नेचुरल एक्टिंग का कोई तोड़ नहीं. अन्य किरदारों द्वारा भी अच्छा अभिनय किया गया है. कानी कुसरुति, सारंग साथाए का रोल भी बढ़िया है. जैकी श्रॉफ एक यूनिक रोल में नजर आए हैं और छा गए हैं. भले ही उनकी अपीयरेंस की लेंथ जरा कम है मगर उनके अभिनय में काफी दम है. रसिका दुग्गल स्पेशल अपीयरेंस में हैं. 

कुल मिलाकर ये वेब सीरीज देश ही नहीं दुनियाभर के लोगों को एक बार तो जरूर देखनी चाहिए. क्योंकि ना तो पर्यावरण की अनदेखी कोई मामुली बात है नाही टेक्नोलॉजी की अधिकता कोई सराहनीय कदम. बाकी इन दोनों के संतुलन से कोई आपत्ति नहीं. दोनों का कायम होना ही शायद सही दिशा है. साथ ही दोनों का बिगड़ा संतुलन क्या गुल खिला सकता है उसका एक उदाहरण है 'ओके कम्प्यूटर.'

 

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