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Movie Review: बदमाशियां में नहीं है कोई 'फन'

जब बहुत सारी कहानियां एक साथ एक ही फिल्म में चलती रहती हैं तो वे आपको भ्रमित करती हैं और उसका नतीजा भी सिफर ही रहता है. स्क्रिप्ट काफी ढीली है और ऐसा कोई डायलॉग नहीं है जो आपको चौंकाए या चमत्कृत करे.

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Badmashiyaan
Badmashiyaan

फिल्म: बदमाशियां- फन नेवर एंड्स
डायरेक्टर: अमित खन्ना
स्टार कास्ट: सुजाना मुखर्जी, सिद्धांत गुप्ता, शारिब हाशमी, गुंजन मल्होत्रा, करण मेहरा
अवधि: 128 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A
रेटिंग: 1 स्टार

'कॉन' यानी धोखा देने की कहानियां जैसे ब्लफमास्टर, बंटी और बबली, डॉली की डोली और अब बदमाशियां. ऐसा नहीं लगता आपको पता चल गया क्या है फिल्म? जी, धोखे पर बनने वाली फिल्मों के क्रम में नए एंट्री लेकर आए हैं फिल्मकार अमित खन्ना. आइये पता करते हैं ये कितनी अलग है फिल्म.

कहानी:
फिल्म की शुरुआत ही प्लॉट को बयान कर देती है. चंडीगढ़ में नारी (सुज़ाना मुखर्जी) अपने कर्ज में डूबे हुए बॉयफ्रेंड देव (सिद्दांत गुप्ता) को धोखा देती है और उसके पैसे लेकर भाग जाती है. फिर यह उसके लिए पैसे कमाने का जरिया बन जाता है. उसका अगला निशाना होता है जैज़ी (शारिब हाशमी), जो एक लोकल डॉन के किरदार में है. फिल्म में पिंकेश (करण मेहरा ) भी हैं जो देव का दोस्त है लेकिन उसे भी नारी से इश्क़ है जिसका इजहार वह कभी नहीं करता. नारी जैज़ी को भी चूना लगाकर रफूचक्कर हो जाती है और डॉन साहब उसकी तलाश करने लगते हैं. यानी एक तरह से अलग-अलग लव स्टोरीज का ट्रैक एक साथ लेकर मसाला फिल्म बनाने की कोशिश की गई है.

क्यों देखें:
अगर आप ऊपर लिखे हुये किसी भी एक्टर के दीवाने हैं तो ही ये फिल्म देखे. शारिब हाशमी, जिनकी फिल्म 'फिल्मिस्तान' कुछ लोगों को पसंद आई थी, इस फिल्म में भी थोड़ी बहुत छाप छोड़ते हैं.

क्यों न देखें:
जब बहुत सारी कहानियां एक साथ एक ही फिल्म में चलती रहती हैं तो वे आपको भ्रमित करती हैं और उसका नतीजा भी सिफर ही रहता है. स्क्रिप्ट काफी ढीली है और ऐसा कोई डायलॉग नहीं है जो आपको चौंकाए या चमत्कृत करे. कुल मिलाकर फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको उत्साहित करे. गाने भी खास प्रभावित नहीं करते.

 

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