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Movie Review: ना ग्रेट है, ना ग्रैंड है और ना ही मस्ती है

इन्दर कुमार के निर्देशन में बनी फिल्म 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती' रिलीज हो गई है और इससे पहले कि आप इसे देखने का मन बना लें, कैसी है ये फिल्म, अाइए पहले इसकी समीक्षा करते हैं.

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ग्रेट ग्रैंड मस्ती
ग्रेट ग्रैंड मस्ती

फिल्म का नाम: ग्रेट ग्रैंड मस्ती
डायरेक्टर: इन्दर कुमार
स्टार कास्ट: रितेश देशमुख, आफताब शिवदसानी, विवेक ओबेरॉय, संजय मिश्रा, उर्वशी रौतेला, पूजा बोस, मिष्टी, श्रद्धा दास
अवधि: 2 घंटा 07 मिनट
सर्टिफिकेट: A
रेटिंग: 1 स्टार

डायरेक्टर इन्दर कुमार की 'मस्ती ' सीरीज की दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस कर चुकी हैं लेकिन इस बार अनोखी कास्टिंग, उसके बाद फिल्म का लीक होना , क्या वाकई ये फिल्म दर्शकों को थिएटर तक खींच पाने में सक्षम है, आइए समीक्षा करते हैं?

कहानी:
फिल्म की कहानी तीन ऐसे किरदारों की है जो अपनी शादीशुदा जिंदगी में वाइफ के होते हुए भी खुश नहीं हैं. इनमें अमर सक्सेना (रितेश देशमुख), मीत मेहता (विवेक ओबेरॉय) और प्रेम चावला (आफताब शिवदासानी) शामिल हैं. वहीं इन किरदारों और इनकी पत्नियों के अलावा अंताक्षरी बाबा (संजय मिश्रा) का भी अहम रोल है जो संवादों को गांव की अंताक्षरी के माध्यम से सबके सामने प्रस्तुत करते हैं. किन्ही कारणों से अमर, मीत और प्रेम को शहर से गांव जाना पड़ता है, जहां एक हवेली में उनकी मुलाकात रागिनी (उर्वशी रौतेला) से होती है और फिर सिलसिलेवार घटनाक्रम में कई सारे उतार चढ़ाव आते हैं और फिर रामसे (सुदेश लहरी) और गांव की गोरी शिनी (सोनाली राउत) की भी एंट्री होती है. आखिरकार क्या होता है, ये आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा.

स्क्रिप्ट:
फिल्म की कहानी काफी कमजोर है, जहां फर्स्ट हाफ काफी ढीला है वहीं इंटरवल के बाद का हिस्सा तो और भी हिला डुला है, हालांकि संजय मिश्रा और रितेश के संवाद आपको कहीं-कहीं जरूर हंसाते हैं लेकिन नाम के अनुसार फिल्म में बहुत सारी कमियां हैं.

अभिनय:
रितेश देशमुख का अभिनय काफी अच्छा लगता है वहीं संजय मिश्रा और रितेश की सासु मां का किरदार निभाती हुईं उषा नदकरिणी जी ने काफी अच्छा काम किया है. विवेक ओबेरॉय, आफताब शिवदसानी, उर्वशी रौतेला, पूजा बोस, मिष्टी, श्रद्धा दास और बाकी लोगों ने भी ठीक अभिनय किया है. हालांकि कास्टिंग और भी बेहतर हो सकती थी. फिल्म में श्रेयश तलपड़े के साथ साथ सुदेश लहरी और सोनाली राउत का भी कैमियो है.

कमजोर कड़ी:
फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी स्क्रिप्ट और कमजोर कास्टिंग है, जिसे और भी बेहतर किया जा सकता था.

संगीत:
फिल्म का संगीत ठीक है लेकिन कहानी से ज्यादा गाने सुनाई पड़ते हैं, जिसको कम किया जाता तो फिल्म और भी क्रिस्प लगती.

क्यों देखें:
कभी टीवी पर आएगी तो देख लीजिएगा, इस वीकेंड पैसे को बचाना ही बेहतर है.

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