2026 की शुरुआत भारतीय सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण पल लेकर आई है. 1 जनवरी को बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर रहे धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म 'इक्कीस' थिएटर्स में रिलीज हुई. उनका परिवार इस मील के पत्थर को सेलिब्रेट कर रहा है. यह अवसर बॉलीवुड इतिहास की एक अनोखी घटना को याद करने का मौका भी देता है. ये घटना तब हुई जब धर्मेंद्र और उनके बेटे सनी देओल ने बैक-टू-बैक फिल्में रिलीज की थीं. बात 1983 की है. बॉक्स ऑफिस पर पिता-बेटे के बीच मुकाबला देखने को मिला था.
बॉक्स ऑफिस पर टकराए थे धर्मेंद्र-सनी
22 जुलाई 1983 को धर्मेंद्र की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म 'नौकर बीवी का' रिलीज हुई थी. डायरेक्टर राजकुमार कोहली की ये फिल्म एक्शन के लिए जाने वाले धर्मेंद्र के लिए एक स्टाइलिश बदलाव थी. ये पाकिस्तानी फिल्म 'नौकर वोहटी दा' पर आधारित थी. इसमें रीना रॉय, राज बब्बर और अनीता राज जैसे कलाकारों ने भी किया था. बप्पी लहरी ने इसका म्यूजिक कम्पोज किया था. पिक्चर का गाना 'जमाना तो है नौकर बीवी का' बेहद पॉपुलर हुआ और इसने फिल्म के कमर्शियल सक्सेस में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
प्रोडक्शन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी यह है कि एक सीन में अनीता राज को धर्मेंद्र को थप्पड़ मारना था. एक्ट्रेस शुरुआत में वेटरन स्टार को थप्पड़ मारने से हिचकिचा रही थीं. लेकिन धर्मेंद्र ने कैमरे के लिए रियलिस्टिक अप्रोच पर जोर दिया. जब थप्पड़ लगा, तो धर्मेंद्र खुद स्तब्ध रह गए थे, लेकिन कैमरा बंद होते ही यह पल हंसी में बदल गया.
अपने पिता की फिल्म के ठीक दो हफ्ते बाद यानी 5 अगस्त 1983 को सनी देओल ने फिल्म 'बेताब' के साथ अपना सिनेमाई डेब्यू किया था. डायरेक्टर राहुल रावैल की इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म से सनी देओल के साथ-साथ अमृता सिंह ने भी डेब्यू किया था. धर्मेंद्र ने फिल्म की कास्टिंग में सीधा रोल निभाया था और दिल्ली में मिलने के बाद अमृता सिंह को कास्ट किया था. फिल्म कश्मीर की खूबसूरत वादियों में शूट हुई और बाद में बड़ी हिट साबित हुई थी. पिक्चर के हिट होने के बाद एक स्थानीय घाटी को अनौपचारिक रूप से बेताब वैली नाम भी दे दिया गया था.
'बेताब' अपनी क्रिएटिव टीम के लिए भी बड़ी सफलता साबित हुई थी. ये जावेद अख्तर की सलीम खान से प्रोफेशनल अलगाव के बाद उनकी पहली सोलो हिट फिल्म थी. इसमें आर डी बर्मन ने म्यूजिक दिया था, जिसमें 'जब हम जवां होंगे' जैसे गाने शामिल थे. ये गाना उस दौर का स्टेपल बन गया था. 'बेताब', 1983 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, जिसने सनी देओल को एक प्रमुख नए स्टार और भविष्य के एक्शन आइकन के रूप में स्थापित किया.
'नौकर बीवी का' और 'बेताब' की एक साथ सफलता ने भारतीय थिएटर्स में एक अनोखी स्थिति पैदा कर दी थी. कई शहरों में कहा जाता था कि एक सिनेमा हॉल में 'नौकर बीवी का' चल रही होगी, जबकि अगले हॉल में 'बेताब' उत्साही भीड़ खींच रही होगी. फैंस अक्सर दोनों फिल्मों के लिए कतार में लगते थे, थिएटर बदलते थे, लेकिन देओल नाम के प्रति वफादार बने रहते थे.