सतीश कौशिक इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम हैं और उनकी छवि पिछले तीन दशकों से इंडस्ट्री में एक भारी-भरकम शख्सियत की है. मैं फिजिकल अपीयरेंस की बात नहीं कर रहा बात कर रहा उनके प्रोफेशन की. एक एक्टर, एक फिल्म डायरेक्टर, एक डायलॉग राइटर, एक स्क्रीनराइटर और एक प्रोड्यूसर. सतीश कौशिक ने हर एक फील्ड में हाथ आजमाया और कामयाब भी हुए.
सतीश कौशिक ने अपने जीवन में काफी सारे उतार-चढ़ाव देखे. कभी बढ़ते वजन से वे जूझते नजर आए तो कभी वे फ्लॉप फिल्मों की वजह से टूट गए. मगर एक्टर ने खुद को संभाला. 23 किलो वजन कम कर के दुनिया के सामने एक मिसाल कायम की और प्रोफेशनल फ्रंट पर अपने अथक प्रयासों से सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं. कुछ समय पहले ही रिलीज हुई उनकी फिल्म कागज को देश और दुनिया में खूब सराहना मिली. एक्टर के जन्मदिन के मौके पर जातने हैं उनके जीवन के कुछ किस्से और उस रोल के बारे में जिन्हें उन्हें हर तरफ पहचान दिलाई.
सतीश कौशिक का जन्म 13 अप्रैल, 1956 को महेंद्रगढ़ में हुआ था. एक्टर ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से तालीम ली और क्रिएटिव फील्ड में हाथ आजमाने निकल चले. वैसे तो सतीश कौशिक इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि उनके बारे में लिखा जाए तो किताब भी कम पड़ जाए. मगर उनके जन्मदिन के मौके पर बता रहे हैं एक्टर के करियर के सबसे बेस्ट रोल के पीछे की दास्तां. मिस्टर इंडिया फिल्म में सतीश कौशिक ने कैलेंडर का रोल प्ले किया था. ये रोल उनके करियर का सबसे बड़ा रोल साबित हुआ. इस रोल के पीछे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.
कैसे मिला मिस्टर इंडिया में नौकर का रोल
दरअसल, सतीश को फिल्म में कोई रोल मिल नहीं रहा था. इस बात से वे परेशान थे. सारे रोल उनके हाथ से निकले जा रहे थे और वे इस फिल्म में एक्टिंग करना चाहते थे. ऐसे में जब नौकर के रोल की बारी आई तो वे जावेद साहब के पीछे पड़ गए. इस रोल के लिए भी कई सारे लोग थे. खुद सतीश कौशिक एसोसिएट डायरेक्टर भी थे तो उनके पास थोड़ी पावर भी थी. उन्होंने ठान लिया कि ये रोल वे कर के रहेंगे. वे इस रोल को करना चाहते थे इसलिए जो भी इस रोल के ऑडिशन के लिए आता उसे किसी ना किसी बहाने रिजेक्ट कर देते ताकि ये नौकर वाला रोल उन्हें मिल जाए. आखिर उन्हें रोल मिल ही गया. मगर ये रोल उतना खास था नहीं. मगर इसके टाइटल ने इस रोल को खास बना दिया. इस रोल के टाइटल से जुड़ा भी एक किस्सा दिलचस्प है.
कैसे पड़ा नाम कैलेंडर
सतीश कौशिक के पिता का ताला-चाभी का व्यापार था. उनका एक जाननेवाला डीलर था जिसका तकियाकलाम कैलेंडर था. वो हर बात के बीच में कैलेंडर शब्द का इस्तेमाल करता था. वहां से सतीश को अपने रोल के लिए ये टाइटल भी मिल गया जो जावेद साहब को भी बड़ा पसंद भी आया. सतीश कौशिक ने ये रोल इतनी शिद्दत से निभाया कि ये उनके करियर का सबसे बड़ा रोल बन गया.