उत्तर प्रदेश में पहली बार लोकसभा चुनाव में उतर रही आम आदमी पार्टी (आप) ने आखिरकार राजनीति के दांवपेंच सीख लिए हैं. अभी तक केवल भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ने का दम भरने वाली 'आप' ने यूपी में अपने प्रत्याशी उतारते समय जातिगत समीकरणों पर खासा ध्यान दिया है.
सपा और बीएसपी के बीच जातिगत वोट बैंक की लड़ाई के बीच 'आप' ने सवर्णों और मुसलमानों पर दांव खेल कर चुनावी चौसर में अपना पासा फेंक दिया है. अब तक 'आप' ने उत्तर प्रदेश में 64 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं. इसमें 26 सवर्ण तथा 14 मुस्लिम प्रत्याशी है.
प्रदेश की राजनीति में जातिगत वोटों का रंग इतना गहरा है कि चुनाव के समय यहां दूसरे मुद्दे गौण हो जाते हैं. राज्य में दलित और पिछड़ों का बड़ा वोट बैंक है लेकिन सपा और बीएसपी की इन जातियों पर मजबूत पकड़ को देखते हुए 'आप' ने सूबे में क्षत्रिय और ब्राह्मणों को टिकट देने में उदारता दिखाई है. कुछ सीटों पर जातियों के समीकरण को रखते हुए जाट और वैश्य समुदाय के लोगों को भी उम्मीदवार बनाया गया है.
प्रदेश की लगभग 20 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है. आप ने अब तक 14 मुस्लिमों को विभिन्न सीटों से टिकट देकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि 'आप' उन्हें खूब महत्व दे रही है.