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चुनाव

जब राजीव गांधी ने एयरपोर्ट से ही छीन ली थी कर्नाटक के CM की कुर्सी

जब राजीव गांधी ने एयरपोर्ट से ही छीन ली थी कर्नाटक के CM की कुर्सी
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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए हैं. कांग्रेस, बीजेपी से लेकर जेडीएस तक लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय पर फोकस कर रही हैं. क्योंकि कर्नाटक में लिंगायत 17% और वोक्कालिगा 15% हैं. चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया ने लिंगायत समुदाय को लुभाने हिंदू धर्म से अलग अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा दे दिया. कहा जाता है कि सिद्धारमैया ने लिंगायत कार्ड इसलिए खेला क्योंकि कभी कांग्रेस का साथ देने वाला यह समुदाय लंबे अरसे से कांग्रेस से नाराज चल रहा है.
जब राजीव गांधी ने एयरपोर्ट से ही छीन ली थी कर्नाटक के CM की कुर्सी
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दरअसल, इस नाराजगी के पीछे की वजह 28 साल पुरानी है. तब वीरेंद्र पाटिल कर्नाटक के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. उस वक्त लिंगायत समुदाय कांग्रेस के साथ हुआ करता था. फिर 1990 में कर्नाटक के कुछ हिस्सों में दंगे हुए. इस पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी ने वीरेंद्र पाटिल को एयरपोर्ट पर बुलाकर मुख्‍यमंत्री पद से इस्तीफा देने का आदेश दिया.
जब राजीव गांधी ने एयरपोर्ट से ही छीन ली थी कर्नाटक के CM की कुर्सी
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अफवाह फैली कि राजीव ने पाटिल से बात तक नहीं कि और हटाने का फैसला सिर्फ कुछ मिनटों में ले लिया. फिर इस मुद्दे को चुनाव में लिंगायतों के बीच उनके अपमान के तौर पर वीरेन्द्र पाटिल ने प्रचारि‍त किया.
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नतीजा यह हुआ कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जनता दल के हाथों शिकस्त मिली. उनका वोट प्रतिशत 4.14% से बढ़कर 16.99% हो गया. सीटें भी 4 से 40 हो गईं.
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वहीं कांग्रेस को 26.95% वोट व 34 सीटें मिली. बाद में बीजेपी ने लिंगायतों को अपने पाले में किया और बी एस येदियुरप्पा को ही सीएम फेस बनाकर भाजपा 2008 में सत्ता में आई थी.
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गौरतलब हो कि कर्नाटक में दलित समुदाय के बाद दूसरा सबसे बड़ा वोटबैंट लिंगायत समुदाय का है. राज्य में 17 फीसदी आबादी लिंगायत समुदाय की है. कर्नाटक की सत्ता पर वही सरकार काबिज होती है, जिसके पक्ष में ये समुदाय एकजुट होकर वोट करते हैं.
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इसके पहले लिंगायत समुदाय के लोग रामकृष्ण हेगड़े और बाद में कांग्रेस के वीरेंद्र पाटिल को अपना नेता मानते थे, लेकिन इनके जाने के बाद बी एस येदियुरप्पा को लिंगायतों ने वोट दिया. हालांकि, भ्रष्टाचार का आरोप लगने पर उन्हें हटाया तो अगले चुनाव में शिकस्त झेलनी पड़ी. अब इस बार कांग्रेस ने लिंगायतों पर दांव खेला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी उन्हें मनाने के लिए लगातार कर्नाटक के मठों के दौरे कर रहे हैं.
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