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चुनाव

यहां टीपू से नफरत करते हैं लोग, 800 ब्राह्मणों को दी गई थी फांसी!

यहां टीपू से नफरत करते हैं लोग, 800 ब्राह्मणों को दी गई थी फांसी!
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कर्नाटक चुनाव के पहले से ही टीपू सुल्तान को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में विवाद छिड़ा हुआ है. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं टीपू सुल्तान के नाम पर वोट बैंक की राजनीति गरमा रही है. इस बीच इंडिया टुडे की टीम ने कर्नाटक के उस गांव का दौरा किया जो टीपू सुल्तान से नफरत करता है.
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इस गांव का नाम है मेलकोट. जो बंगलुरु से 100 किमी की दूरी पर स्थित है. कहा जाता है कि हर दिवाली को यहां आयंगार ब्राह्मण समुदाय के लोग दिवाली नहीं मनाते हैं.
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इसके पीछे मेलकोट के रहने वाले श्रीनिवास बताते हैं कि दिवाली के दिन टीपू सुल्तान ने 800 ब्राह्मणों को फांसी पर चढ़ाया था और वह ब्राह्मण हमारे पूर्वज थे. फांसी पर चढ़ाए जाने की वजह पूछने पर श्रीनिवास कहते हैं कि टीपू सुल्तान ने इसलिए ब्राह्मणों को मारा क्योंकि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से मना कर दिया था.
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वहीं, इस बारे में गीता का कहना है कि इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है और अब इसका राजनीतिक इस्तेमाल होता है. पहले जो हुआ उससे आज के जनरेशन का क्या लेना देना है.
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मेलकोट के ही रहने वाले संस्कृत स्कॉलर मा अलवर टीपू सुल्तान के नाम पर राजनीतिकरण को गलत बताते हैं. वे कहते हैं कि टीपू सुल्तान बेहद महत्वकांक्षी शासक था, वह किसी भी हाल में अपने देश को बचाना चाहता था इसलिए उसके दौर में कई हत्याएं हुई.

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कुर्ग का उदाहरण देते हुए मा अलवर आगे बताते हैं टीपू सुल्तान ने कुर्ग में भी कई हिन्दुओं का धर्मांतरण इस्लाम में किया था. इसलिए आज भी वहां कई मुस्लिम ऐसे हैं जो टीपू सुल्तान पर नाराजगी जाहिर करते हैं.
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वहीं, टीपू सुल्तान के हिंदू धर्म के प्रति उदारता के भी कई उदाहरण मिलते हैं. इतिहासकार मानते हैं कि टीपू सुल्तान धर्मनिरपेक्ष शासक था. उसने कई मंदिरों में दान दिया. मेलकोट के रंगास्वामी मंदिर में आज भी उसका दान दिया हुआ घंटा और ड्रम आज भी मौजूद हैं.
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बजरंग दल से जुड़े रहे एमके प्रेम कुमार टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की बात पर कहते हैं कि यह महज कांग्रेस की एक चाल है ताकि मुस्लिम वोट बैंक हासिल किया जा सके. वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ब्राह्मण वोट बैंक को हासिल करने के लिए यह मुद्दा उठा रही है.
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