उत्तर प्रदेश की अमरोहा लोकसभा सीट चर्चा में है. यहां से इंडिया गठबंधन से कांग्रेस के टिकट पर दानिश अली चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं भाजपा से कंवर सिंह तंवर मैदान में हैं. अमरोहा ढोलक के लिए प्रसिद्ध है. यहां बने ढोलक विदेश में भी भेजे जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमरोहा दौरे पर थे तब उन्होंने ढोलक बजाया था. पीएम ने कहा, 'अमरोहा सिर्फ ढोलक नहीं देश का डंका भी बजाता है..'
पीएम ने अमरोहा में जिस ढोलक को बजाया था उसे बनाने वाले अमित सैनी ने कहा, विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरे बनाए ढोलक को पीएम मोदी ने बजाया. उन्होंने कहा, जब मुझे पता चला कि ढोलक मोदी जी के हाथों में है तो मुझे बेहद खुशी हुई. सैनी ने कहा कि वह दो पीढ़ियों से ढोलक, डफली, जंबा बनाने का व्यवसाय कर रहे हैं, उनके कारीगर कम से कम 4 पीढ़ियों से यह वाद्य यंत्र खुद बना रहे हैं.
कई बार ऐसा समय भी आया जब मुश्किलात पेश आए. अमित सैनी ने कहा कि पहले बिजली नहीं आती थी, यहां सड़कें बहुत खराब थी. जब लाइट नहीं आती थी तो कुछ कारीगर चले गए. अब 6 साल से बराबर काम आ रहे हैं. उनके कारीगर, अहमद भाई पिछले 8 सालों से उनके साथ काम कर रहे हैं.
किस लकड़ी से बनाए जाते हैं ढोलक?
ढोलक आम की लकड़ी, शीशम आदि से बनाए जाते हैं. एक ढोलक की कीमत 3,000 से 5,000 रुपये के बीच होती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी अच्छी कीमत है. सैनी को इजरायल जैसे देशों से भी ऑर्डर मिले. उन्होंने कहा कि कारोबार में अभी भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. यहां तक कि रूस यूक्रेन युद्ध का असर भी ढोलक उत्पादन के कारोबार पर पड़ा है.अमित सैनी कहा, मुझे हांगकांग से 5 लाख ढोलक बनाने का ऑर्डर मिला. यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद ऑर्डर को रोक दिया गया, खाड़ी से भी ऑर्डर को रोक दिया गया.
सैनी के साथ काम कर रहे अफसर अली ने कहा कि वह दो पीढ़ियों से इस कारोबार में हैं. उन्होंने कहा, '20 साल से काम कर रहा हूं. कमाई अच्छी है, लेकिन मेहनत भी बहुत ज़्यादा है, इसके औज़ार भारी हैं. मेहनत बहुत है, सब नहीं कर पाते हैं. अहमद का बेटा भी इस व्यवसाय में है. वह डमरू बनाता है.
अमरोहा में राजनीतिक रैलियां
अमरोहा में इंडिया गठबंधन ने रैली की थी. जनसभा में अखिलेश यादव, राहुल गांधी और दानिश अली मौजूद रहे. अखिलेश ने कहा था, 'यूपी वाले जब स्वागत करते हैं तब अच्छा स्वागत करते हैं, लेकिन जब विदाई करते हैं, तो ढोल नगाड़ों से विदाई करते हैं. इस बार तो अमरोहा की ढोलक बजाके भारतीय जनता पार्टी की विदाई होने जा रही है.'
26 अप्रैल को वोटिंग
अमरोहा में 26 अप्रैल को वोटिंग है. यहां जनता का मूड क्या है, यह जानने की कोशिश की गई. अमरोहा में एक युवा मतदाता सैयद वारिस ने कहा, 'केंद्र में अगर बीजेपी से कोई लड़ता है तो वो कांग्रेस है. इसलिए हम कांग्रेस को वोट देंगे, उसके साथ गठबंधन में कोई भी हो उसको और मजबूती मिलेगी. मैं दानिश अली को वोट दूंगा.'
यहां के आम भी प्रसिद्ध
अमरोहा में आम के फल भी होते हैं. यहां आम की खेती अच्छी होती है. मौसम में सबसे अच्छे फल आते हैं. अमरोहा के इकबाल ने कहा, यहां कोई अत्याधुनिक अस्पताल, शिक्षा संस्थान नहीं हैं. हमारे पास एक रेलवे स्टेशन है, लेकिन रेल कनेक्टिविटी मौजूद नहीं है.
कुछ वोटरों में नाराजगी भी है. एक मतदाता ने कहा, हम निवर्तमान सांसद दानिश अली से नाराज हैं. यहां से कंवर सिंह तंवर जीतेंगे. मैं उन्हें वोट दूंगा. दानिश अली ने इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया है. वह यहां से हार जाएंगे. वह कभी हमसे मिलने नहीं आए.
2024 में अमरोहा से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार
कंवर सिंह तंवर: बीजेपी
कुँवर दानिश अली: कांग्रेस
मुजाहिद हुसैन: बीएसपी
अमरोहा लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन
वर्ष-2019
विजेता- कुँवर दानिश अली/बसपा
वोट%- 601082/ 51.39
कंवर सिंह तंवर/बीजेपी
537834/45.98
अमरोहा में जाति समीकरण
मुस्लिम: 42 फीसदी
जाटव: 13 फीसदी
राजपूत: 8 प्रतिशत
जाट: 7 फीसदी
खागी: 7 प्रतिशत
सैनी: 5 फीसदी
गुज्जर: 4 फीसदी
अन्य: 4 प्रतिशत
अमरोहा से बीजेपी प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर इस बार जीत को लेकर आश्वस्त हैं. उन्होंने 2014 में यह सीट जीती थी. लेकिन 2019 में दानिश से हार गए. उन्हें एम्बुलेंस वाला सांसद कहा जाता है. इसके पीछे क्या कारण है, उन्होंने बताया, 'मेरी मोबाइल डिस्पेंसरी है. गांव-गांव दवा देती है. सेवा का काम 2011 से कर रहा हूं. कोविड में काम किया. तब मैं सांसद नहीं था. मेरा पैसा मेरी मेहनत का है, मैं जनता की सेवा करता आया हूं. अमरोहा की जनता योगी और मोदी के साथ है.
अमरोहा से लड़ रहे दानिश अली ने कहा, अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए बीजेपी सिर्फ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करती है. बीजेपी साउथ मैं साफ और नॉर्थ मैं हाफ है और जो पहले चरण का मातदान हुआ है. उसमें नॉर्थ मैं हाफ भी नहीं बचा है.