जम्मू और श्रीनगर की श्रीनगर संसदीय सीट पर रोचक मुकाबला होने के आसार हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के मुखिया और वर्तमान सांसद फारूक अब्दुल्ला फिर से मैदान पर हैं. बीजेपी ने श्रीनगर सीट से शेख खालिद जहांगीर को उतारा है. पीडीपी ने आगा सैयद मोहसिन को उतारकर यहां का चुनावी दंगल रोचक बना दिया है. इसके अलावा नेशनल पैंथर्स पार्टी, जनता दल (युनाइटेड), शिवसेना, पीपुल कॉन्फ्रेंस, राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी, मानवाधिकार नेशनल पार्टी के उम्मीदवारों के साथ 3 निर्दलीय भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. पुलवामा अटैक के बाद उठी राष्ट्रवाद की लहर से कश्मीर घाटी में बीजेपी भी कमाल दिखा सकती है.
जम्मू-कश्मीर देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां दो किस्म की सियासत सांस लेती है. एक जम्मू की और एक घाटी, यानी कश्मीर की. श्रीनगर के गुपकार रोड (जहां सभी सियासी आकाओं का ठिकाना है) की नब्ज दिल्ली से तय होती है और डोगराओं के जम्मू की पॉलिटिक्स कश्मीरियत से गुलजार घाटी से. एक ही राज्य के ये दो इलाके हैं, जो अपनी राजधानी छह-छह महीने साझा करते हैं. लेकिन जो बात राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा आक्रामक बनाती है वह है दोनों इलाकों के बीच मुकाबला, बंटवारा और भेदभाव.
बता दें कि जम्मू और श्रीनगर की दो सीटों पर 18 अप्रैल को दूसरे फेज में मतदान होना है. 10 मार्च को लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा होने के बाद देश, चुनावी माहौल में आ गया है. 19 मार्च को इस सीट के लिए नोटिफिकेशन निकला, 26 मार्च को नोमिनेशन की अंतिम तारीख, 27 मार्च को उम्मीदवारों की अंतिम लिस्ट पर मुहर लगी. अब 18 अप्रैल के मतदान के लिए सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है. लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण में 13 राज्यों की 97 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है. मतदान का परिणाम 23 मई को आना है.
श्रीनगर लोकसभा सीट, जम्मू और कश्मीर की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है. सूबे की राजधानी की इस लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सांसद हैं. वह 2017 के उपचुनाव में जीते थे. 2014 के आम चुनाव के दौरान फारूक अब्दुल्ला को पीडीपी के तारिक हमीद कर्रा ने करारी शिकस्त दी थी. 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद भड़की हिंसा के दौरान लोगों पर हुए कथित अत्याचार के विरोध में हामिद कर्रा ने इस्तीफा दे दिया था.
करीब 90 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी वाले इस सीट पर 2017 में हुए उपचुनाव में फारूक अब्दुल्ला करीब 10 हजार वोटों से जीते थे. डल झील के लिए मशहूर श्रीनगर की यह सीट अब्दुल्ला परिवार के लिए हमेशा से खास रही है और इसे उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ माना जाता है. इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस सीट पर उनकी पार्टी ने 10 लोकसभा चुनाव जीते हैं. इस सीट से फारूक अब्दुल्ला की मां बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला और बेटे उमर अब्दुल्ला भी सांसद रह चुके हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
श्रीनगर की लोकसभा सीट से 1967 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के बख्शी गुलाम मोहम्मद जीते थे. 1971 में इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी एस.ए. शमीम ने जीत दर्ज की. इस हार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जबरदस्त वापसी की और लगातार चार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की. 1977 में इस सीट से बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला सांसद बनीं. इसके बाद 1980 में उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला ने इस सीट से जीत दर्ज की. 1984 और 1989 में भी यह सीट नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास ही रही और क्रमश: अब्दुल राशिक काबुली और मोहम्मद सफी भट सांसद बने. 1996 में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई और गुलाम मोहम्मद मीर मागामी जीते. 1998, 1999 और 2004 में यह सीट फिर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास आ गई और तीनों बार उमर अब्दुल्ला सांसद बने. इसके बाद 2009 में इस सीट से फारूक अब्दुल्ला उतरे और जीते, लेकिन 2014 का चुनाव वह हार गए. उन्हें पीडीपी के तारिक हामीद कर्रा ने हराया. इसके बाद 2017 में हुए उपचुनाव में एक बार फिर फारूक अब्दुल्ला इस सीट से सांसद बने.
सामाजिक तानाबाना
श्रीनगर लोकसभा सीट के अन्तर्गत 15 विधानसभा सीटें (कंगन, गन्दरबल, हजरतबल, जादीबाल, ईदगाह, खानयार, हबाकदल, अमिरकादल, सोनवार, बटमालू, चादुरा, बडगाम, वीरवाह, खानसाहिब और चरार-ए-शरीफ) आती हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा सीट की इन 15 सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच कड़ी टक्कर हुई थी. नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 7 (कंगन, गन्दरबल, ईदगाह, खानयार, हबाकदल, बडगाम, वीरवाह) और पीडीपी के पास 8 (हजरतबल, जादीबाल, अमिरकादल, सोनवार, बटमालू, चादुरा, खानसाहिब, चरार-ए-शरीफ) सीटें हैं. इस सीट पर 12 लाख 05 हजार रजिस्टर्ड मतदाता हैं. इसमें 6 लाख 30 हजार पुरुष और 5 लाख 74 हजार महिला वोटर हैं.
2014 का जनादेश
2017 के उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला 10,776 वोटों से जीते थे. उन्हें 48,555 वोट मिला था, जबकि उनके प्रतिद्वंदी पीडीपी के नाजिर अहमद खान को 37,779 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी फारूक अहमद दार (630 वोट) रहे थे. इससे पहले 2014 के आम चुनाव में पीडीपी के तारिक हामिद कर्रा ने फारूक अब्दुल्ला को 42,281 से मात दी थी. कर्रा को 1,57,923 वोट मिले थे. वहीं, फारूक को 1,15,643 वोट मिला था. तीसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी आगा सैयद मोहसिन (16, 050 वोट) थे. खास बात है कि इस सीट पर बीजेपी की जमानत जब्त हो गई थी. उसके प्रत्याशी फयाज अहमद भट को सिर्फ 4,467 वोट मिले थे.
आतंकी बुरहान वानी की मौत के श्रीनगर समेत पूरा प्रदेश हिंसा की चपेट में था. इस हिंसा के दौरान घाटी के लोगों पर हुए कथित अत्याचार के खिलाफ पीडीपी के तारिक हामिद कर्रा ने 2016 में इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 2017 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ. उपचुनाव के दौरान भी खूब हिंसा हुई और करीब 8 लोग मारे गए. हिंसा के कारण श्रीनगर लोकसभा सीट पर सबसे कम करीब 7 फीसदी मतदान हुआ. इससे पहले 1999 के आम चुनाव में श्रीनगर में सबसे कम 11.93 फीसदी मतदान हुआ था. इस चुनाव में उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती को हराया था. 2014 के आम चुनाव में यहां 26 फीसदी मतदान हुआ था.
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