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बाढ़ और पलायन से अभिशप्त सुपौल जिला, हर साल कोसी मचाती है तबाही

बिहार का सुपौल जिला सहरसा से 14 मार्च 1991 में अलग होकर नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया था. जिले में आज भी बिजली-पानी-सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. 

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • सहरसा से 14 मार्च 1991 में अलग होकर नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया था सुपौल
  • 2425 वर्ग किलोमीटर में फैले सुपौल जिले की जनसंख्या 22 लाख 29 हजार 76 है
  • लोकगायिका शारदा सिन्हा, गायक उदित नारायण सुपौल जिले के ही हैं

बिहार का सुपौल जिला उत्तर में नेपाल, दक्षिण में मधेपुरा, पश्चिम में मधुबनी और पूर्व में अररिया जिले से घिरा हुआ है. यह इलाका कोसी नदी के पानी से हर साल आने वाले बाढ़ से प्रभावित होता रहता है. इस इलाके में बाढ़ और रोजगार के लिए पलायन सबसे बड़ी समस्या है. सुपौल वैदिक काल से ही मिथिलांचल का हिस्सा रहा है. जिले के बीच से बहने वाली कोसी नदी ही बिहार को शोक कही जाती है. सुपौल प्राचीन काल में मिथिला राज्य का हिस्सा था. बाद में मगध तथा मुगल सम्राटों ने भी यहां राज किया. बिहार का सुपौल जिला सहरसा से 14 मार्च 1991 में अलग होकर नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया था. जिले में आज भी बिजली-पानी-सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. 

सामाजिक ताना-बाना
2425 वर्ग किलोमीटर में फैले सुपौल जिले की जनसंख्या 22 लाख 29 हजार 76 है. सांस्कृतिक रूप से यह काफी समृद्ध जिला है. नेपाल से करीब होने के कारण यह सामरिक रूप से भी काफी महत्त्वपूर्ण है. क्षेत्रफल के अनुसार यह कोसी प्रमंडल का सबसे बड़ा जिला है. पर्यटन स्थलों में गणपतगंज का विष्णु मंदिर, धरहारा का महादेव मंदिर, बीरपुर में कोसी बैराज, ललितेश्वरनाथ मंदिर (बलुआ बाजार), अनंतविष्णु मंदिर (नाथपट्टी-तुलसीपट्टी), हुलास का दुर्गा महादेव मंदिर, तिनटोलिया का दुर्गा स्थान, प्रतापगंज दुर्गा स्थान आदि प्रमुख हैं. जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती ही है. यहां धान, गेहूं, मक्का, मूंग, पटसन, केला की पैदावार अच्छी होती है. 

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लोकगायिका शारदा सिन्हा, गायक उदित नारायण, भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे ललित नारायण मिश्र, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन जैसी हस्तियों का नाता सुपौल से ही है.

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2015 का जनादेश
जिले की सुपौल विधानसभा सीट की बात करें तो यहां से पिछले चुनाव में जेडीयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव ने 82295 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी. उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी किशोर को 37397 मतों के बड़े अंतर से मात दी थी. पिपरा सीट से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी यदुवंश कुमार यादव को जीत मिली. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विश्वमोहन कुमार को चुनावी समर में मात दी. आरजेडी को कुल 85,944 वोट पड़े तो बीजेपी को 49,575 वोट. इस चुनाव में जीत का अंतर 36,369 रहा.

निर्मली सीट से जेडीयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने 79600 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी.  छातापुर सीट से बीजेपी के नीरज कुमार सिंह ने आरजेडी प्रत्याशी जहूर आलम को 9292 मतों के अंतर से हराया था. जिले की त्रिवेणीगंज सीट से जेडीयू की वीना भारती ने एलजेपी प्रत्याशी को 52400 मतों के भारी भरकम अंतर से हराया था.  

 

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