
दरभंगा जिले की जाले विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) के घटक दल भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के प्रत्याशी जीवेश कुमार ने महागठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मकसूर अहमद उस्मानी को पटखनी दी. दोनों प्रत्याशियों में जीत का अंदर 21,796 रहा. बीजेपी ने बड़े अंतर से कांग्रेस को हराया.
जीवेश कुमार को 87,376 वोट मिले, वहीं मकसूर अहमद उस्मानी को 65,580 वोट हासिल हुए. बीजेपी ने 51.66 फीसदी वोट हासिल किया, वहीं कांग्रेस 38,78 फीसदी वोटों पर सिमट गई. कई दलों से ज्यादा वोट यहां नोटा को मिला. नोटा का विकल्प 3,573 लोगों ने चुना.

जाले सीट के लिए अंतिम चरण में 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी. जाले में 54.02 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. बीजेपी ने निवर्तमान विधायक जीवेश कुमार को टिकट दिया. वहीं, जीवेश के सामने महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के मसकूर अहमद उस्मानी उम्मीदवार रहे,जिन्हें करारी हार मिली. जन अधिकार पार्टी ने इस सीट से अमन कुमार झा को टिकट दिया था, जिन्हें नोटा से भी कम वोट मिला.
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जाले को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. यह सीट 2010 से ही बीजेपी के कब्जे में है. 2010 में बीजेपी के विजय कुमार मिश्रा विधायक निर्वाचित हुए थे. मिश्रा ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राम निवास को मात दी थी. 2015 में बीजेपी ने जीवेश पर भरोसा जताया और जीवेश भी विधानसभा पहुंचने में सफल रहे.
साल 2015 के चुनाव में जाले सीट से 13 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे थे. इस सीट पर 1995 के चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को जीत मिली थी. तब भाकपा के टिकट पर अब्दुल सलाम विजयी रहे थे.
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