
बिहार की औरंगाबाद विधानसभा सीट (Aurangabad Seat) पर भाजपा-कांग्रेस के बीच दिलचस्प मुकाबले में आनंद शंकर सिंह ने जीत हासिल की है. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी रामाधार सिंह को हराया है. बता दें कि औरंगाबाद सीट पर महागठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार आनंद शंकर सिंह चुनाव लड़े जबकि एनडीए खेमे से भाजपा प्रत्याशी रामाधार सिंह चुनावी रण में उतरे. वहीं, राष्ट्र सेवा दल से आशीष कुमार सोनी, जन अधिकार पार्टी से चंदेश प्रसाद गुप्ता और बहुजन समाज पार्टी से अनिल कुमार ने अपनी किस्मत आजमाई. बता दें कि औरंगाबाद विधानसभा सीट पर पहले चरण में यानी 28 अक्टूबर को मतदान हुआ और कुल 53.12 फीसदी वोटिंग हुई.

2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के आनंद शंकर सिंह ने जीत दर्ज की थी. हालांकि इससे पहले बीजेपी के रामधार सिंह 2005 और 2010 का चुनाव जीते थे. ऐसे में कांग्रेस के सामने अपना दुर्ग बचाने की चुनौती है तो वहीं बीजेपी को भी एक बार फिर सत्ता में वापसी की दरकार है.
2015 के चुनाव नतीजे
2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के आनंद शंकर को कुल 63,637 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के रामाधार सिंह को 45,239 मत मिले थे. आनंद शंकर सिंह ने 18 हजार 398 वोटों से रामधार सिंह को मात दी थी. तीसरे नंबर पर बीएसपी के कुशल सिंह (15260 वोट) और चौथे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी कुमार गौरव (5978 वोट) थे.
औरंगाबाद विधानसभा सीट का राजनीतिक समीकरण
यह सीट 1951 में ही वजूद में आई थी. 1951 और 1957 में कांग्रेस के प्रियब्रत नारायण सिन्हा जीते थे. इसके बाद 1962 में ब्रिज मोहन सिंह जीते थे. 1967 में एस सिंह, 1969 में सरयू सिंह, 1972 में ब्रिज मोहन सिंह, 1977 व 1980 में राम नरेश सिंह जीते थे. 1985 और 1990 में कांग्रेस के ब्रिज मोहन सिंह जीते.
इसके बाद 1995 में पहली बार सीट पर बीजेपी की जीत हुई और उसके प्रत्याशी रामधार सिंह जीते. 2000 के चुनाव में आरजेडी के सुरेश मेहता जीते. इसके बाद 2005 और 2010 का चुनाव फिर से बीजेपी के रामधार सिंह जीते. 2014 के चुनाव में कांग्रेस के आनंद शंकर सिंह ने बीजेपी के रामधार सिंह जीते थे.
सामाजिक तानाबाना
2011 की जनगणना के मुताबिक, औरंगाबाद विधानसभा सीट की आबादी 416133 है. इसमें 75.43 फीसदी ग्रामीण और 24.57 फीसदी शहरी आबादी है. इस सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी 21.64 फीसदी है. 2015 के विधानसभा चुनाव में 53 फीसदी और 2019 के लोकसभा चुनाव में 52 फीसदी लोगों ने अपना मताधिकार का प्रयोग किया था.