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कभी दिल्ली की सड़कों पर चाय बेचता था यह 'मिस्टर दिल्ली'

कभी ईंट-भट्ठे में मजदूरी और दिल्ली की सड़कों पर चाय का ठेला लगाने वाला यह शख्स आज 'मिस्टर दिल्ली' है. यह कहानी हौसला हार रहे हर इंसान को प्रेरणा देने वाली है...

Vijay Kumar, Mr Delhi Vijay Kumar, Mr Delhi

दिल्ली में वैसे आए दिन कई तरह के काॅम्‍िपटि‍शन होते रहते हैं. कहीं रैंप वॉक तो कहीं मंहगी कारों की प्रदर्शनी. कहीं बड़े-बड़े मेले तो कहीं देसी-विदेशी फूड स्टॉल्स का जमावड़ा. इन्हीं प्रदर्शनियों के बीच दिल्ली में हर साल शारीरिक सौष्ठव प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है.

जाहिर है कि इन बॉडी बिल्डिंग काॅम्‍िपटि‍शन में किसी न किसी के सिर पर जीत का सेहरा भी बंधता है, लेकिन इस वर्ष संपन्न हुई प्रतियोगिता में 'मिस्टर दिल्ली' का खिताब जीतने वाले शख्स के बारे में जानकर आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे.

आखिर क्या है पूरी बात?
यह कहानी है एक बेहद गरीब परिवार में जन्मे विजय कुमार की. महज 19 वर्ष की उम्र में उन्‍होंने अपने पिता को खो दिया. पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा होने की वजह से उन्हें छोटी उम्र में ही मजदूरी के लिए बाहर निकलना पड़ा. सबसे पहले उन्होंने ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करनी शुरू की, जहां उन्हें 10 से 15 रुपये रोज के मिलते.
वे अपनी सारी कमाई मां के हाथ में रख देते थे. लंबे समय बाद मजदूरी और बचत से उन्होंने एक भैंस खरीदी और मजदूरी छोड़ कर वे दूध बेचने के धंधे में लग गए.

पेट पालने के लिए बेची चाय...
अब इस बात से शायद ही कोई असहमत हो कि चाय हमारे देश का राष्ट्रीय और बहुचर्चित पेय है. हमारे देश के प्रधानमंत्री ने भी कभी चाय बेचने का काम किया था, तो वहीं विजय भी दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में कभी चाय का ठेला लगाया करते थे.

बॉडी बिल्डिंग का कैसे लगा चस्का?
अब जैसा कि भारत के अधिकांश गांवों और शहरों में देखा जाता है कि वहां अखाड़े और जिम होते हैं और उनमें वर्जिश करने वाले पहलवान और बॉडीबिल्डर. विजय भी इन वर्जिश करने वालों को देख कर उनके जैसा शरीर बनाने की सोचा करते लेकिन वे गरीबी की वजह से मजबूर थे. आखिर जिसके पास दो वक्त की रोटियों तक के पैसे न हों वह कैसे बॉडी बिल्डिंग करता?
मगर जो हार मान जाए उसे विजय थोड़े न कहा जाएगा. दिन भर चाय बेचने के बाद वे लाजपत नगर में अशोक भाई की जिम में घंटों पसीना बहाते और खुद के शरीर को बॉडी बिल्डिंग कॉम्‍िपटि‍शन के लिए तैयार कर रहे थे. दिन भर काम के बाद वे यहां जी तोड़ मेहनत करते. एक बॉडी बिल्डर द्वारा लिए जाने वाले डाइट से मरहूम रहने के बावजूद उन्होंने सबकी भरपाई मेहनत से की.

आज भी याद आता है उन्हें गांव...
विजय वैसे तो इस वर्ष की 10 अप्रैल तारीख को संपन्न हुई 'मिस्टर दिल्ली' की प्रतियोगिता में पूरी दिल्ली के प्रतिभागियों के बीच अव्वल रहे और उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया. वह इससे पहले 'मिस्टर वाईएमसी' भी रह चुके हैं, और आगे भी देश-दुनिया के कॉम्प‍िटि‍शन में हिस्सा लेना चाहते हैं.
लेकिन आज की तारीख में नोएडा सेक्टर 93 में 'हेल्थ-क्लब' के नाम से जिम चलाने वाले इस शख्स का दिल आज भी गांव के लिए धड़कता है, और वे नोएडा में जिम चलाने के साथ-साथ उनके गांव के लड़कों को बॉडी बिल्डिंग से जोड़ने के लिए वहां जिम खोलने की प्लानिंग कर रहे हैं.

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