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सुरक्षित महसूस नहीं करते शिक्षक, कम होगा टीचर्स डे सेलिब्रेशन

इन स्कूलों में नहीं मनाया जाएगा शिक्षक दिवस, ये है वजह..

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

इस साल राष्ट्रीय राजधानी में कई स्कूलों में शिक्षक दिवस का उत्सव बड़े पैमाने पर नहीं मनाया जाएगा. शिक्षक दिवस हर शिक्षक की जिंदगी का सबसे बड़ा दिन होता है, लेकिन इस दिन को इस बार न मनाने के पीछे वजह बताई गई है कि शिक्षक अब सुरक्षित और सम्मान महसूस नहीं करते हैं.  

वहीं सभी शिक्षक अपने अधिकार सुरक्षित रखने के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा उपायों और उचित कानून की मांग कर रहे हैं. आपको बता दें, 'दिल्ली राज्य पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसिएशन' की ओर से 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को एक विरोध प्रदर्शन होगा.

वे एलकॉन पब्लिक केस सहित विभिन्न मामलों में  POCSO एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ सुबह 11 बजे जंतर मंतर में एक शांति मार्च करेंगे. वहीं एसोसिएशन एक ऐसी संगठन की स्थापना करना चाहते हैं जिसमें उप शिक्षा निदेशक, उपयुक्त पुलिस, सीबीएसई का उपनिवेश स्तर का अधिकारी, एक मनोचिकित्सक, पब्लिक स्कूलों का प्रतिनिधि और सम्बंधित स्कूल की शिक्षक अभिभावक संघ का अध्यक्ष या महा मंत्री सदस्य शामिल हो. वहीं एसोसिएशन प्रधानमंत्री से सवाल पूछते हुए कहता है कि स्कूल में होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में ऐसे संगठन को उचित जांच करनी चाहिए.

शिक्षक दिवस पर समारोहों को कम करने के लिए राष्ट्रीय प्रगतिशील स्कूल ने शिक्षक दिवस को कम करने की सलाह दी है और कहा है कि बच्चे शिक्षक होंगे लेकिन शिक्षक कोई उपहार नहीं लेंगे और जरूरी नहीं है कि रात का भोजन आयोजित होगा या नहीं. वहीं एक्शन कमेटी स्कूलों को भी ऐसा करना होगा. कि वह भी शिक्षक दिवस को न मनाएं.

ये हैं वह स्कूल जहां कम होगा शिक्षक दिवस का जश्न...

1. स्प्रिंगडेल्स स्कूल पूसा रोड

2. ब्लूबेल, ईस्ट ऑफ कैलाश

3. इंडियन स्कूल, श्री फोर्ट

4. मीरा मॉडल, जनकपूरी

5.  होली चाइल्ड, वसंत कुंज

वहीं शिक्षक दिवस न मनाने के फैसले को लेकर कई शिक्षकों ने कहा है कि वे डरे हुए हैं. उन्हें डर है कि उन्हें 'झूठे आरोपों' पर जेल भेजा जा सकता है. इसलिए इस प्रकार, उन्होंने इस साल 5 सितंबर को बड़े पैमाने पर शिक्षक दिवस नहीं मनाने का फैसला किया है. क्योंकि अब उन्हें लगता है, 'खुशी रही ही नहीं'.  

उन्होंने कहा कि माता- पिता को अपने बच्चों को स्कूल में सौंपते समय कुछ विश्वास होना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो भविष्य में "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु" का मतलब कुछ भी नहीं होगा.

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