हाल ही में IIT और दिल्ली यूनिवर्सिटी ने
अपने छात्रों को सलीकेदार कपड़े पहनने का फरमान
जारी किया था, जो सोशल मीडिया पर बहस का
मुद्दा बद गया था. सोशल मीडिया पर वायरल होने
के बाद आईआईटी और डीयू अपनी सफाई देते
दिखे.
अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में टीचर्स को 'संस्कारी कपड़े' पहनने का फरमान जारी किया गया है. फरमान में कहा गया है कि टीचर्स स्कूल में जींस-टॉप, चमकदार और भड़कीले कपड़े न पहनकर आएं इससे स्कूल में पढ़ने वाले छात्र प्रभावित होते हैं.
पंजाब के डायरेक्टर फॉर पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) ने सभी डिस्ट्रिक एजुकेशन ऑफिसर और स्कूलों के प्रिंसिपल को एक पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि स्कूल में शिक्षक डिसेंट कपड़े ही पहनकर आएं.
दरअसल, यह कदम अभिभावकों की शिकायत
के बाद उठाया गया है. सरकारी स्कूलों में पढ़ने
वाले छात्रों के माता-पिता का कहना है कि स्कूल में
पढ़ने वाले टीचर्स खासतौर से महिला टीचर्स के
उत्तेजक, चमकदार और फैशनेबल पर रोक लगाया
जाना चाहिए.
आदेश में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में अध्ययापक, खासतौर से लेडीज अध्ययापक भड़कीले पहनावों में ड्यूटी करती हैं. कई टीचर्स जींस-टॉप जैसे कई उकसाऊ, फैशनेबल ड्रेस पहनकर स्कूल की ड्यूटी पर आती हैं, जिसका विद्यार्थियों पर असर पड़ता है.
इस आदेश के बाद टीचर्स परेशान हैं. एक
अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार टीसर्च का
कहना है कि उन्हें अपनी पसंद के कपड़े पहनने की
आजादी मिलनी चाहिए. अगर कोई शिक्षक जींस या
दूसरे वेस्टर्न कपड़े पहनना चाहता है तो उसमें कोई
नुकसान नहीं है.
वहीं कुछ महिला टीचर्स का कहना है कि इस आदेश में लॉजिक की कमी है. क्योंकि अधिकांश टीचर्स सूट पहनकर स्कूल आती हैं, बस कुछ ही कभी कभार जींस पहनकर आती हैं.
उच्च अधिकारियों को शिक्षा की गुणवत्ता
सुधारने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए न कि ऐसे
निर्देश जारी करने पर जो गैर-जरूरी हैं.
पंजाब के सरकारी स्कूलों में ऐसे दिशा-निर्देश पहले भी जारी किए जा चुके हैं. साल 2012 में DGSE ने सभी स्कूल शिक्षकों को संस्कारी कपड़े पहनने का निर्देश जारी किया था.