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... ऐसा गीतकार जो गाने नहीं बल्कि सुकून देकर गया

मेरे महबूब कयामत होगी’,‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू जैसे बेहतरीन गानों का नशा शायद ही कम हो. किशोर दा गाने नहीं बल्कि सुकून देकर गए हैं.

किशोर कुमार किशोर कुमार

आम तौर पर गाने, गायकों को बड़ा बनाते हैं, लेकिन किशोर कुमार ने जो गाया, वो गाना बड़ा बन गया. अभिनेता, गायक, कम्पोजर, पटकथा लेखक, निर्माता, निर्देशक तमाम खासियत एक ही शख्स में. जिंदगी एक सफर है सुहाना, मेरे सपनों की रानी और मेरे सामने वाली खिड़की में जैसे बेहतरीन गाने देने वाले किशोर कुमार का जन्म 1929 में 4 अगस्त को हुआ था.

जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

1. किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में वहां के जाने माने वकील कुंजीलाल के यहां हुआ था.

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2. किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था. किशोर कुमार अपने भाई बहनों में दूसरे नम्बर पर थे.

3. उन्होंने इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़े थे और उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना.

4. वह ऐसा समय था जब 10-20 पैसे की उधारी भी बहुत मायने रखती थी. किशोर कुमार पर जब कैंटीन वाले के पांच रुपये बारह आना उधार हो गए और कैंटीन का मालिक जब उनको अपने पांच रुपया बारह आना चुकाने को कहता तो वे कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर गिलास और चम्मच बजा बजाकर पांच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे.

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5. किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फिल्म शिकारी (1946) से हुई.

6. इस फिल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फिल्म जिद्दी में, जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया.

7. किशोर कुमार KL सहगल के जबर्दस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया. जिद्दी की सफलता के बावजूद उन्हें न तो पहचान मिली और न कोई खास काम मिला.

8. यह भी मजेदार बात है कि किशोर कुमार की शुरुआत की कई फिल्मों में मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार के लिए अपनी आवाज दी थी. मोहम्मद रफ़ी ने फिल्म‘रागिनी’और‘शरारत’ में किशोर कुमार को अपनी आवाज उधार दी तो मेहनताना लिया वो भी सिर्फ एक रुपया. 9. काम के लिए किशोर कुमार सबसे पहले एस डी बर्मन के पास गए थे, जिन्होंने पहले भी उन्हें 1950 में बनी फ़िल्म 'प्यार' में गाने का मौका दिया था. एस डी बर्मन ने उन्हें फिर 'बहार' फिल्म में एक गाना गाने का मौका दिया.

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10. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1975 में देश में आपातकाल के समय एक सरकारी समारोह में भाग लेने से साफ मना कर देने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने किशोर कुमार के गीतों के आकाशवाणी(AIR) से प्रसारित किए जाने पर पर रोक लगा दी थी और किशोर कुमार के घर पर आयकर के छापे भी डाले गए.

11. उन्होंने किसी भी पुरूष पार्श्वगायक को 8 फिल्मफेयर अवार्ड मिलने का रिकॉर्ड बनाया.

12. सुरों के इस सरताज ने हाफ टिकट,पड़ोसन, चलती का नाम गाड़ी जैसी फिल्मों में अपना दमदार अभिनय दिखाया.

13. भले ही आज किशोर दा हमारे बीच नहीं है लेकिन वो यादगार गाने जो आज भी गुनगुनाए जाते हैंछ:-

वह शख्स जिसने भारत को दो प्रधानमंत्री दिए...

- रूप तेरा मस्ताना..

- एक लड़की भीगी - भागी सी....

- मेरे महबूब कयामत हो...

- सागर किनारे..

किशोर दा के ना जाने कितने ही गाने हैं जो सदा के लिए अमर हो गए. 13 अक्टूबर 1987 को  उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.

 

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