जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में बीते 49 सालों से सेवा दे रहीं जानी-मानी इतिहासकार रोमिला थापर मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को अपना पक्ष रखा. प्रशासन ने कहा है कि दूसरे काबिल रिटायर शिक्षक जो एमेरिटस बन से चूक गए हैं, अब नये नियमों से उन्हें मौका दिया जाएगा. वहीं जेएनयू शिक्षक संघ ने सीवी मांगने को ही अपमान कहा है.
प्रशासन ने कहा है कि जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिटस मामले में कई समाचार पत्र और सोशल मीडिया में एकपक्षीय राय फैलाई जा रही है. ये प्रशासनिक रिफॉर्म्स को बदनाम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. ये निर्णय प्रशासन द्वारा वैधानिक और अध्यादेशों पर आधारित है. पिछले साल, जेएनयू कार्यकारी परिषद द्वारा एक ऐसा कदम उठाया गया था, जिसमें विश्वविद्यालय के सर्वोच्च सांविधिक निकाय जेएनयू के बाहर के डीन, चेयरपर्सन और प्रसिद्ध शिक्षाविद् शामिल थे. इसमें नियुक्तियों की प्रक्रिया और एमिरिटस प्रोफेसर के पदों की निरंतरता को विनियमित करना था. इसमें सभी नियमों पर चर्चा की गई थी.
इस मामले में रजिस्ट्रार ने कहा है कि वर्तमान में, जेएनयू में 21 एमेरिटस प्रोफेसर हैं. इनमें सामाजिक विज्ञान और मानविकी से 17 और विज्ञान से 4 प्रोफेसर रखे हैं. जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि बहुत से और लोग प्रो एमेरटिस बनने से चूक गए थे जो पूरी काबिलियत भी रखते हैं. जेएनयू प्रशासन ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य था कि प्रो एमरटिस की उम्र सीमा और उनकी नियुक्ति को ब्रॉड पर आधारित किया जाए, ताकि रिटायर्ड डिजर्विंग शिक्षकों के साथ इंसाफ किया जा सके.
विश्वविद्यालय के नये शैक्षणिक नियम और विनियम 32 का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत 75 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके प्रोफेसरों से अनुरोध किया गया है कि वो अपने कंट्रीब्यूशन बताएं ताकि स्थिति की समीक्षा के लिए गठित एक समिति इस पर गौर कर सके. प्रशासन ने कहा कि हर कोई कानून के समक्ष समान है, सभी 12 एमेरिटस प्रोफेसरों को पत्र भेजे गए थे, जिन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए उनकी उपलब्धता और इच्छा को जानने के लिए 75 वर्ष की आयु प्राप्त की है.
लेकिन सिर्फ एक एमिरिटस प्रोफेसर के नाम का उपयोग करके एक अभियान चलाया गया. जेएनयू प्रशासन दोहराता है कि किसी भी एमिरेट्स प्रोफेसर को निशाना नहीं बनाया गया है, जैसा कि झूठा आरोप लगाया गया है. ये केवल एक नियम को लागू करने की मांग की है जो विश्वविद्यालय के अध्यादेश का हिस्सा है.
CV मांगना ही अपमान: जेएनयू शिक्षक संघ
जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो अतुल सूद ने कहा कि JNU प्रशासन ने पहले दिन कहा कि हम केवल जानकारी जमा कर रहे हैं, न हम हटाना चाहते हैं केवल हम उनकी अवेलिबिटी और विलिंगनेस जानना चाह रहे हैं. लेकिन, चिट्ठी के विषय में ही लिखा था कि कंटीन्यूनेशन के बारे में निर्णय करने के लिए जानकारी मांगी जा रही है.
प्रोफेसर सूद ने कहा कि एमरटिस का चयन किसी के प्रोफेसरशिप के दौरान उसके काम के आधार पर होता है. वो विश्वविद्यालय को सीवी नहीं देते बल्कि विश्वविद्यालय उन्हें उनके काम के आधार पर आमंत्रित करता है. अब सवाल ये है कि जब उन्हें एमरटिस बनाने के समय पर सीवी नहीं मांगा गया तो अब सि आधार पर सीवी मांगा गया. प्रो सूद ने कहा कि यूनिवर्सिटी भविष्य में जो भी नियम बनाना चाहे यूनिवर्सिटी बॉडी के द्वारा बना सकती है, लेकिन जिनको पुराने वाइस चांसलर ने बनाया उन्हें वो नहीं बदल सकते हैं.
ये था मामला
जेएनयू रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार की तरफ से इतिहासकार रोमिला थापर को पत्र जारी किया गया था. बीते महीने जारी किए गए इस पत्र में विवि प्रशासन ने लिखा था कि वह उनके काम का आकलन करना चाहता है, जिसके लिए उनका सीवी आवश्यक है।
एमेरिटस प्रोफेसर ऐसे होते हैं मनोनीत: किसी संकाय की तरफ से प्रस्तावित सेवानिवृत ख्यातिप्राप्त नाम को कार्यकारी व अकादमिक परिषद् की मंजूरी मिलने के बाद एमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर मनोनीत किया जाता है.
इतिहासकार हैं रोमिला थापर
रोमिला थापर देश की प्रमुख इतिहासकारों व लेखकों में से एक हैं. वो 30 नंवबर 1931 को लखनऊ में जन्मी थी फिर पंजाब विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक किया. उसके बाद उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास में स्नातक से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की. थापर ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से शिक्षण की शुरुआत की थी. इसके बाद वह कुछ वर्षों तक डीयू में भी पढ़ाती रहीं. वह 1970 में वह जेएनयू आ गईं. तत्कालीन जेएनयू कुलपति प्रो योगेंद्र अलघ ने उन्हें प्रो एमेरिटस सेलेक्ट किया था.