मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि जियो इंस्टीट्यूट को विशिष्ट संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) का महज आशय पत्र दिया गया है. इससे पहले जियो इंस्टीट्यूट को 'उत्कृष्ट संस्थान' का दर्जा प्रदान करने का विवाद सदन में उठा. राज्यसभा के कई सदस्यों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और दशकों से कीर्तिमान स्थापित करने वाले अन्य संस्थानों के साथ उस संस्थान की रैंकिंग करने को लेकर सवाल किया, जो अभी आने वाला है.
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वहीं आपको बता दें, जावड़ेकर ने देश के 6 शिक्षण संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिया है. इन संस्थानों में 3 सरकारी और 3 निजी संस्थान शामिल हैं. इन निजी संस्थानों में एक ऐसा नाम भी सामने आया जिसका नाम न ही प्रचलित था और न ही उसे उत्कृष्ट संस्थानों में शामिल किया है. इस संस्थान का नाम है जियो इंस्टीट्यूट. खास बात ये है कि इस जियो इंस्टीट्यूट का नाम भी पहले नहीं सुना गया और इंटरनेट पर भी इसका अस्तित्व नहीं दिख रहा है. लेकिन फिर भी इसे उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया गया. सरकार की ओर एक 'बिना अस्तित्व' वाले कॉलेज या यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट संस्थान में शामिल करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
वहीं बढ़ते विरोध के चलते जावड़ेकर ने सदन को बताया कि जियो इंस्टीट्यूट को महज आशय पत्र दिया गया है और उत्कृष्ट संस्थान का टैग नहीं दिया गया है. हालांकि मंत्री के बयान से विपक्षी दल के सांसद संतुष्ट नहीं हुए और तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा मीडिया की कुछ रिपोर्ट में विशिष्टता के टैग को चुनाव के बांड (जिसके जरिए कॉरपोरेट के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक दल को चंदा दिया जा सकता है) से जोड़कर देखा गया है.
Congratulations to @ManipalUni, @bitspilaniindia & Jio Inst for getting status of #InstituteofEminence. #TransformingEducation #48MonthsOfTransformingIndia@PIB_India @MIB_India pic.twitter.com/XpRsm8nxIQ
— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) July 9, 2018
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली और बंबई आईआईटी और बंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के तीन विशिष्ट संस्थानों में प्रत्येक को 1,000 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे, लेकिन किसी निजी संस्थान को इस प्रकार की कोई निधि नहीं दी जाएगी. जावड़ेकर ने कहा, "सरकार चयन प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थी और अलग रहकर इसका निरीक्षण कर रही थी. विशेषज्ञों के पैनल द्वारा चयन कार्य को अंजाम दिया गया.
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चयन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जियो के प्रायोजक संगठन ने महाराष्ट्र के कर्जत में संस्थान बनाने का प्रस्ताव दिया. संस्थान को अगले तीन साल में मानित विश्वविद्यालय जैसे विशिष्ट संस्थान स्थापित करने का आशय पत्र प्रदान किया गया है. उन्होंने कहा, "प्रायोजक संगठन इस आशय पत्र के प्रदान किए जाने के तीन साल के भीतर अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने के लिए तत्परता दिखाते हुए एक रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा.
उन्होंने सदन को सूचित किया कि 9 जुलाई 2018 को हुई बैठक में विशेषज्ञों की सक्षम समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बाद उसे मंजूरी प्रदान की गई और आईआईटी-दिल्ली, मुंबई और आईआईएसी- बैंगलोर को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान करने की सिफारिश की गई.