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एेसे थे हमारे टीचर

हम अपनी जिंदगी का लंबा वक्‍त टीचर्स के साथ गुजारते हैं. जिसमें हमें अच्‍छे-बुरे हर तरह के अनुभव होते हैं. हम यहां आपके बताए ऐसे ही अनुभव साझा कर रहे हैं .

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हम अपनी जिंदगी का  लंबा वक्‍त टीचर्स के साथ गुजारते हैं. जिसमें हमें अच्‍छे-बुरे हर तरह के अनुभव होते हैं. हम यहां आपके बताए ऐसे ही अनुभव साझा कर रहे हैं .

मुझे गणित से हमेशा डर लगता था, ले-देकर बस पास होता था.पांचवीं में सुभाष सर मैथ्स पढ़ाया करते थे.छमाही परीक्षा के पहले कंधे पर हाथ रख बस इतना कहा था कि ये मानो ही मत कि तुम्हें गणित नही आती. रिजल्ट अनाउंस हुआ तब 50 में 50 आए. न उन्हें यकीन हो रहा था न मुझे!

- आशीष प्रदीप

क्‍लास बंक करके एक मैं फिल्‍म देखने गई थी. वहां पहुंचकर मैं हैरान रह गई क्‍योंकि उस सिनेमा हॉल में हमारे टीचर पहले से मौजूद थे.

- शुभांगी श्रीवास्‍तव

हमारे इतिहास के टीचर इतिहास इस तरह पढ़ाते थे कि लगने लगता था कोई एपीसोड देख रहे हैं. समीर सर का बोलने का वो ढंग आज भी याद आता है.

- तरुण फोर

मेरी टीचर हमेशा एक बात कहती थी कि समय पीछे से गंजा होता है, उसके बाल आगे से होते हैं. उसे आगे से पकड़ सकते हैं पीछे से नहीं. इसलिए जो बीते समय में हुआ उसे भूल जाओ. अपने आज को देखो वही भविष्‍य को बेहतर बनाएगा.

- शुभम शुक्ला

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शिक्षक एक छात्र को अच्छे-बुरे दोनों ही तरह से प्रभावित कर सकते हैं, मैंने दोनों ही प्रभावों का अनुभव किया है, 10वीं कक्षा में एक शिक्षक ने मेरे मन मैं गणित विषय को लेकर इतना डर पैदा कर दिया था कि गणित बोर्ड परीक्षा के दिन डर कि वजह से मुझे बुखार आ गया था और मेरा एक साल खराब हो गया. उसके बाद जब मैं एम.एस.सी की पढ़ाई कर रही थी, उस समय मेरे शिक्षक डॉ. श्रीकांत सिंह, मयंक सर और राम अवतार सर ने मार्गदर्शन के साथ-साथ हर पल प्रोत्साहन भी दिया जिसके कारण मेरे मन खुद के लिए एक मजबूत विश्वास जागा और आज मैं अपने आप को सफलता की राह पर आगे बढ़ता देख रही हूं.

- दीपल सिंह

सर्वपल्ली राधाकृष्णन से तो कभी नहीं मिला, लेकिन होश संभालने से लेकर अबतक में कई ऐसे लोग से मिला जो मेरी जिंदगी में टीचर की भूमिका में रहे. हां, मैं स्कूल-कॉलेज के नौकरीपेशा टीचर्स को अपना टीचर नहीं मानता, जो स्कूल एक सिलेबस पूरा करने के लिए आते थे और फिर अपनी दिहाड़ी पक्की करके अपने रास्ते को हो लेते थे. मैं हमेशा से ऐसे लोगों को टीचर मानता हूं जिनसे मैं कुछ सीख सकूं, जिनसे मैं मोटिवेट/इंस्पायर हो सकूं या कह लो जिन्हें मैं खुद के लिए या समाज के लिए उपयोगी मानता हूं. इनमें सबसे पहले नंबर पर मेरा पिताजी ही आते हैं. वही मेरे असली टीचर हैं.

- राघवेंद्र मिश्रा

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कॉलेज टाइम में मुझे स्‍टेज से बहुत डर लगता है. मेरे टीचर मिस्‍टर श्‍ार्मा ने मेरे इस डर को दूर किया. हमेशा मुझे प्रेरित करते और सिखाते थे. धीरे-धीरे मेरा सारा डर निकल गया. आज मैं टीचिंग लाइन में हूं जहां मुझे रोजाना बहुत सारे स्‍टूडेंट्स के सामने बोलना पड़ता है. ये सब उनके प्रोत्‍साहन का नतीजा है.

- अमित तिवारी

मुझे मेरे 12वीं क्‍लास में अंग्रेजी के टीचर मुझे आज भी याद हैं. उनके पढ़ाने का तरीका इतना आसान था कोई भी चेप्‍टर कभी कठिन नहीं लगता था. उनसे आज भी मैं मिलने जाता हूं. क्‍लास रूम से लेकर जिंदगी के कई मौकों पर उन्‍होंने मुझे सही राह दिखाई है.

- अंकित वर्मा

मेरे टीचर्स अक्‍सर परेशान होकर सभी स्‍टूडेंट्स से कहा करते थे कि तुम सब कोई काम नहीं कर सकते. इसके बाद हम उनसे कहते थे कि सर, जो कोई नहीं करते वे कमाल करते हैं. इतना सुनक‍र वो मुस्‍करा दिया करते थे. मैं बस यही कहूंगा कि टीचर और स्‍टूडेंट के बीच अब रिलेशन पहले से फ्रेंडली हो गया है.

- शंशाक मिश्र

बात तब की है जब मैं 10वीं क्लास में था. बचपन से मुझे मैथ्स में काफी इंटरेस्ट रहा है, उन दिनों मेरे मैथ्स के टीचर थे दीपक शर्मा.मेरे लिए सबसे बड़ा प्राइड मूमेंट उनसे तब रहा जब उन्होंने पूरे स्कूल के सभी बच्चों में से मुझे ईस्ट दिल्ली मेंटल मैथ्स कंप्टीशन के लिए चुना.उनके आगे 12वीं क्लास के बच्चें भी खड़े थे पर उन्होंने केवल मुझे चुना.जब मैंने उनसे पूछा कि आपने सिर्फ मुझे क्यों चुना तो उन्होंने कहा था कि मुझे सबसे ज्यादा तुझ पर भरोसा है. और जब मैं उस कंप्टीशन में जीत कर आया था तब उनकी आंखों में हल्की सी नमी थी.

- रवि गुप्ता

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शिक्षा,शिक्षक व शिक्षार्थी के बेहतर सामंजस्य से ही कोई भी राष्ट्र आगे बढ़ता है। मुझे इस बात की खुशी है कि मुझे जो भी शिक्षक मिले वे इस अनुशासन को भली-भांति समझते थे. स्कूल से लेकर कॉलेज तक ऐसे बहुत से शिक्षक हैं जिनका नाम ले सकता हूं. लेकिन एक शिक्षक मिले मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री अरविंद महाविद्यालय में. प्रो. विपिन कुमार मलहोत्रा. नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने जिस अंदाज में राजनीतिक शास्त्र पढ़ाया वह आज भी याद है. उनको देखने भर से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही. शिक्षक दिवस के इस अवसर पर मैं अपने सबसे प्रिय गुरुवर विपिन मलहोत्रा जी को प्रणाम करता हूं.

- आशुतोष कुमार सिंह

मैं जब 7वीं क्‍लास में था तब मैनें एक दिन अपने टीचर के बैठने से पहले उनकी कुर्सी खींच ली और वो गिर पड़े. ये देखकर मैं बहुत डर गया था, सोचा अब तो मुझे डांट पड़ेगी, हो सकता है मुझे स्‍कूल से निकाल दिया जाए. थोड़ी देर बाद वो उठे और उन्‍होंने बोला कि बहुत शरारती हो. इतना दिमाग पढ़ाई में लगाते तो तुम्‍हारे माता-पिता के साथ मुझे भी गर्व होगा. आज वो कई बच्‍चों को मुफ्त में शिक्षा भी देते हैं.

- मोहम्‍मद असगर

यहां सभी ने अपने टीचर्स से जुड़े अपने अनुभव हमारे साथ साझा किए हैं आप भी हमारे साथ अपने अनुभव aajtak.education@gmail.com पर भेज सकते हैं, जिन्‍हें हम अपनी वेबसाइट www.aajtak.in/education पर साझा करेंगे.

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